महाराष्ट्र में रेमडेसिविर पर राजनीति तेज, बीजेपी सांसद का नवाब मलिक पर पलटवार

 एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने शनिवार को आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने निर्यात कंपनियों को राज्य को रेमडेसिविर की आपूर्ति नहीं करने के लिए कहा है. फाइल फोटो

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने शनिवार को आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने निर्यात कंपनियों को राज्य को रेमडेसिविर की आपूर्ति नहीं करने के लिए कहा है. फाइल फोटो

BJP MP Manoj Kotak: नवाब मलिक के आरोप से कुछ दिन पहले केंद्र ने कोविड-19 के मामलों में अनायास वृद्धि के चलते रेमडेसिविर इंजेक्शन के निर्यात पर रोक लगा दी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2021, 9:08 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के खिलाफ कारगर दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) पर राजनीति शुरू हो गई है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) के आरोपों पर मुंबई नॉर्थ ईस्ट से बीजेपी सांसद मनोज कोटक (Manoj Kotak) ने पलटवार किया है. बीजेपी सांसद ने महाराष्ट्र और गुजरात सरकार को बीडीआर फॉर्मा की ओर से लिखे पत्र को ट्वीट कर नवाब मलिक पर पलटवार किया है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि महाराष्ट्र में रेमडेसिविर की सप्लाई में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है. बीडीआर फॉर्मा ने महाराष्ट्र और गुजरात सरकार के पास अनुमति के लिए आवेदन किया था और दोनों सरकारों ने तय मानकों पर अपनी अनुमति दी है. उन्होंने आगे लिखा, "महामारी के दौरान फर्जी सूचनाएं प्रसारित करना आपराधिक कृत्य है, जब दांव पर लोगों की जान हो तो कभी राजनीति नहीं करनी चाहिए."

इससे पहले एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने शनिवार को आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने निर्यात कंपनियों को राज्य को रेमडेसिविर की आपूर्ति नहीं करने के लिए कहा है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में सत्तासीन बीजेपी को कोरोना वायरस से निपटने के बजाय चुनाव जीतने में अधिक दिलचस्पी है. भाजपा ने यह कहते हुए उन पर पलटवार किया कि मलिक को ‘झूठे’ एवं ‘बेबुनियाद’ आरोप लगाने के लिए माफी मांगनी चाहिए, अन्यथा सबूत देना चाहिए. उसने कहा कि उन्हें अपने पद से हट जाना चाहिए.

मलिक के आरोप से कुछ दिन पहले केंद्र ने कोविड-19 के मामलों में अनायास वृद्धि के चलते रेमडेसिविर इंजेक्शन के निर्यात पर रोक लगा दी थी. रेमडेसिविर कोविड-19 के क्लिनिकल प्रबंधन प्रोटोकॉल के तहत गंभीर मरीजों के वास्ते इस्तेमाल के लिए सूचीबद्ध दवा है. राज्य के अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘यह दुखद एवं चौंकाने वाली बात है कि जब महाराष्ट्र सरकार ने 16 निर्यात कंपनियों से रेमडेसिविर मांगा, तब हमसे कहा गया कि केंद्र सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र को यह दवा नहीं देने को कहा है.’’

उन्होंने कहा कि यह खतरनाक परिपाटी है और ऐसी स्थिति में तो राज्य सरकार के पास इन निर्यातकों से रेमडेसिविर का भंडार जब्त करने और उसे जरूरतमंदों को देने के सिवा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा. इससे पहले मलिक ने ट्वीट किया था ‘‘देश में 16 निर्यातोन्मुखी इकाइयां हैं, जिनके पास रेमडेसिविर की 20 लाख वाइल्स (शीशियां) हैं. चूंकि सरकार ने अब निर्यात पर पाबंदी लगा दी है, इसलिए ये इकाइयां देश में यह दवा बेचने की अनुमति मांग रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें अनुमति नहीं दे रही है.’’


उन्होंने लिखा, ‘‘सरकार कहती है कि उसे उन सात कंपनियों के जरिए बेचा जाए जो उसका उत्पादन कर रही हैं. ये सात कंपनियां यह जिम्मेदारी लेने से मना कर रही हैं. यह निर्णय लेने का संकट है.’’ बाद में मलिक ने कहा, ‘महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (इस मुद्दे पर) फोन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें बताया गया कि वह (प्रधानमंत्री) पश्चिम बंगाल की यात्रा पर हैं. यह दर्शाता है कि भाजपा की रूचि इस संकट का समाधान करने से अधिक चुनाव जीतने में है.’’
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज