निजी अस्पतालों की गुहार, वैक्सीन खरीद पर नीति स्पष्ट करे सरकार, प्रभावित हो रहा टीकाकरण

कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने केंद्र सरकार से सर्विस चार्ज को 150 रुपये तक सीमित करने के प्रावधान पर भी दोबारा विचार करने को कहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Covid-19 Vaccination: कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने केंद्र सरकार से सर्विस चार्ज को 150 रुपये तक सीमित करने के प्रावधान पर भी दोबारा विचार करने को कहा है.

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    नई दिल्ली. देश के कई प्राइवेट अस्पतालों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई टीकाकरण नीति (New Vaccination Policy( के ऐलान के बाद वैक्सीन की खरीद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है. इसके चलते प्राइवेट अस्पतालों के टीकाकरण केंद्रों पर वैक्सीनेशन कार्यक्रम को रोकना पड़ रहा है. निजी अस्पतालों ने वैक्सीन की खरीद के लिए सिंगल विंडो सिस्टम और स्पष्ट प्रक्रिया की मांग की है. उनका दावा है कि वैक्सीन खरीद के लिए उन्होंने भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और राज्य सरकारों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया.

    सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के गवर्नमेंट एंड रेगुलेटरी अफेयर्स के डायरेक्टर प्रकाश कुमार सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखा है, "आपके निर्देशानुसार हम देश के किसी भी प्राइवेट अस्पताल से वैक्सीन की खरीद के ऑर्डर को स्वीकार नहीं कर रहे हैं. भविष्य में प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन सप्लाई के लिए रोडमैप खातिर हमें आपके दिशानिर्देशों का इंतजार है."

    निजी अस्पतालों की समस्या को समझाते हुए बत्रा अस्पताल के एससीएल गुप्ता कहते हैं, "समस्या ये है कि हम वैक्सीन की खरीद कैसे कर पाएंगे, इस बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है. जब हमने राज्य सरकार के अधिकारियों से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि 21 जून तक इंतजार कीजिए. अभी पॉलिसी क्लियर नहीं है."

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    उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार ने भी हमें इंतजार करने को कहा है. हमने कंपनियों से संपर्क किया था, लेकिन वे भी वैक्सीन की खरीद और बिक्री प्रक्रिया के बारे में नीतियों को लेकर स्पष्ट नहीं हैं." ऐसी स्थितियों के चलते लोगों का टीकाकरण प्रभावित हो रहा है.

    उन्होंने कहा, "भारत में तीसरी लहर की चिंता के बीच हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाना चाहते हैं. हमारे बहुत सारे लोग और स्वास्थ्य कर्मी जिन्होंने वैक्सीन की पहली डोज ली है, दूसरी डोज का इंतजार कर रहे हैं."

    वैक्सीन की खरीद प्रक्रिया स्पष्ट नहीं
    सरोज अस्पताल के चीफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी के हेड पीके भारद्वाज ने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों के लिए वैक्सीन की खरीद प्रक्रिया को स्पष्ट नहीं किया गया है, साथ ही यह भी नहीं पता है कि प्राइवेट अस्पताल कितनी वैक्सीन खरीद सकते हैं. ज्यादा निजी अस्पतालों में टीकाकरण रोक दिया गया है और सिर्फ उन लोगों को टीका दिया जा रहा है, जिन्होंने पहली डोज लगवा रखी है.

    दिल्ली वालंटरी हॉस्पिटल फोरम के सचिव भारद्वाज ने कहा, "सरकार को जल्द से जल्द स्पष्ट गाइडलाइन बनानी चाहिए ताकि टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित ना हो और खतरनाक वायरस के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो सके." जयपुर स्थित शेखावटी अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर और राजस्थान डॉक्टर्स एसोशिएसन के प्रेसिडेंट सर्वेश सरन जोशी ने कहा, "हमने कोविशील्ड और कोवैक्सीन के निर्माताओं से बात की है, उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें प्राइवेट अस्पतालों को सीधे सप्लाई नहीं देने को कहा है. ऐसे में मध्य श्रेणी के अस्पताल सीधे तौर पर प्रभावित हैं."

    रायपुर स्थित सीता मेमोरियल मल्टीस्पेशियलिटी डेंटल क्लिनिक के डायरेक्टर जीतेंद्र सर्राफ ने कहा, "जब हमने राज्य सरकार के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन बेचने के मामले में अभी स्पष्ट गाइडलाइन का इंतजार है." इंडियन डेंटल एसोशिएसन के सदस्य सर्राफ ने कहा, "हमने भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट दोनों को पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है."

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    सर्विस चार्ज को सीमित करने के प्रावधान पर विचार करने की भी बात
    कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने केंद्र सरकार से सर्विस चार्ज को 150 रुपये तक सीमित करने के प्रावधान पर भी दोबारा विचार करने को कहा है. अस्पतालों का कहना है कि इतने कम सर्विस चार्ज में अपने केंद्रों के बाहर टीकाकरण कैंप का आयोजन करना संभव नहीं होगा.

    गुप्ता ने कहा, "150 रुपये के सर्विस चार्ज पर हम केवल अपने केंद्रों पर ही टीकाकरण कर सकेंगे. हमने RWAs और प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों में जाना शुरू कर दिया था. लेकिन इतने कम सर्विस चार्ज में टीकाकरण सेशन आयोजित कर पाना मुश्किल होगा. सर्विस चार्ज को 150 रुपये तक सीमित करने से टीकाकरण अभियान प्रभावित होगा. सरकार को इसके लिए भी एक मैकेनिज्म बनाना चाहिए."

    दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद घरेलू टीका निर्माता कंपनियों को अपने उत्पादन का सिर्फ 25 प्रतिशत ही प्राइवेट अस्पतालों को बेचने का निर्देश दिया गया है. गाइडलाइन के मुताबिक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन की डिमांड पर नजर रखेंगे, ताकि छोटे और बड़े अस्पतालों में वैक्सीन के वितरण में बैलेंस बना रहे.

    इस डिमांड के आधार पर केंद्र सरकार प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन उपलब्ध कराएगी और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिए प्राइवेट अस्पताल सरकार को भुगतान करेंगे.

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