कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से 'खतरे' में भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी

बढ़ते कोरोना मामलों के मद्देनजर फिर वैक्सीनेशन नियमों में बदलाव किया गया है. (सांकेतिक तस्वीर)

बढ़ते कोरोना मामलों के मद्देनजर फिर वैक्सीनेशन नियमों में बदलाव किया गया है. (सांकेतिक तस्वीर)

India Coronavirus Vaccine Diplomacy: कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार 15वें दिन वृद्धि हुई है और 3,95,192 लोग अभी कोविड-19 का इलाज करा रहे हैं जो संक्रमण के कुल मामलों का 3.35 प्रतिशत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 12:17 AM IST
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नई दिल्ली. भारत में महज दो दिनों में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के एक लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं. बीते 24 घंटों में संक्रमण के 53,476 नए मामले आए जो इस साल अभी तक एक दिन में आए सर्वाधिक मामले हैं. इसके साथ ही देश में संक्रमण के कुल मामले 1,17,87,534 पर पहुंच गए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण के मामलों में लगातार 15वें दिन वृद्धि हुई है और 3,95,192 लोग अभी कोविड-19 का इलाज करा रहे हैं जो संक्रमण के कुल मामलों का 3.35 प्रतिशत हैं. वहीं इस बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की दर गिरकर 95.28 प्रतिशत रह गई है. आंकड़ों के मुताबिक 153 दिनों में संक्रमण के एक दिन में आए यह सर्वाधिक मामले हैं. 251 और लोगों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या 1,60,692 पर पहुंच गई है.



कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार को अपनी वैक्सीन डिप्लोमेसी (Vaccine Diplomacy) पर सोचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफे के बाद घरेलू मांग को पूरा करने के मकसद से भारत पहले ही एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन (AstraZeneca Coronavirus Vaccine) की खुराक के निर्यात पर फिलहाल के रोक लगा चुका है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. इस वैक्सीन को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (SII) ने तैयार किया है जो कि टीका बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है.



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एक सूत्र ने बताया कि हालात को ध्यान में रखते हुए वर्तमान समय के लिए सभी कुछ को रोक दिया गया. मामले की जानकारी रखने वाले दोनों ही सूत्रों ने नाम ना बताने की शर्त पर यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, जब तक भारत में कोरोना की स्थित में सुधार नहीं आता, तब तक के लिए कोई निर्यात नहीं. सरकार ऐसे समय में कोई खतरा मोल लेना नहीं चाहती जबकि देश में लोगों को टीका लगाने की जरूरत है.


निश्चित तौर पर सरकार के इस कदम से वैक्सीन के लिए गए वैश्विक समझौतों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कोवैक्स वैक्सीन साझा कार्यक्रम को भेजे जाने वाले टीकों पर असर पड़ेगा. डब्ल्यूएचओ के इस कार्यक्रम में कम आय वाले 64 देशों को कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा की जानी है. भारत ने अब तक 60.5 मिलियन डोज की आपूर्ति की है, जिसमें से कोवैक्स कार्यकम के तहत 17.5 मिलियन डोज को एसआईआई ने पूरा किया गया है, लेकिन पिछले गुरुवार (18 मार्च) से किसी भी वैक्सीन का निर्यात नहीं हुआ है.



हालांकि वैक्सीन के निर्यात पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यह साफ नहीं है कि वैक्सीन निर्यात की रफ्तार कब तक धीमी रहेगी. गौरतलब है कि भारत ने कोवैक्स साझा कार्यक्रम के तहत इस साल 20 करोड़ डोज देने का वादा किया है. एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला ने पिछले हफ्ते ब्राजील, मोरक्को और सऊदी अरब को एक पत्र लिखते हुए कहा था कि वैक्सीन डोज को भेजने में देरी होगी, जिसके लिए उन्होंने एसआईआई प्लांट में लगी आग को जिम्मेदार बताया था, लेकिन बाद में इसका खंडन करते हुए उन्होंने हाल ही में कहा कि ऐसा वैक्सीन आपूर्ति में देरी की वजह से हो रहा है.



भारत में टीकाकरण की जरूरतों को वर्तमान समय में कोवीशील्ड और कोवैक्सीन के जरिए पूरा किया जा रहा, जबकि अन्य वैक्सीन जैसे स्पूतनिक वी के जल्द ही आने की उम्मीद है. एसआईआई और भारत बायोटेक दोनों ही वैक्सीन बनाने की क्षमता को बढ़ाने की प्रक्रिया में है. एसआईआई एक माह में सात से दस करोड़ तक वैक्सीन डोज बनाने में सक्षम है. वहीं, भारत बायोटेक एक महीने के समय में 1.25 करोड़ डोज ही तैयार कर सकता है.


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