अक्टूबर में कोरोना के जिस स्ट्रेन की हुई पहचान, उसमें हुआ खतरनाक बदलाव, जानें सबकुछ

रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरस के स्ट्रेन B.1.167 में तीसरे म्यूटेशन की पहचान की गई है. (पीटीआई फाइल फोटो)

रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरस के स्ट्रेन B.1.167 में तीसरे म्यूटेशन की पहचान की गई है. (पीटीआई फाइल फोटो)

Coronavirus Third Mutant Strain: जीनोम सीक्वेंसिंग के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने जनवरी 2021 में सार्स-कोव2 जीनोम कंसोर्टियम (INSACOG) की स्थापना की. INSACOG के साथ 10 लैबोरेट्री को जोड़ा गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2021, 7:19 PM IST
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नई दिल्ली. भारत में कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर के लिए कई विशेषज्ञों ने वायरस के B.1.167 डबल म्यूटेंट स्ट्रेन को जिम्मेदार माना है, हालांकि इसकी पहचान जीनोम सीक्वेंसिंग के तहत पिछले साल 5 अक्टूबर को ही कर ली गई थी, क्योंकि वायरस के लिए जरुरी स्पाइक प्रोटीन (Spike Protien) में वायरस के पहले के दो म्यूटेशन E484Q और L425R की पहचान की गई थी. स्पाइक प्रोटीन ही वायरस को मानव शरीर की कोशिका से जोड़ता है. ऐसे में B.1.167 की पहचान होते ही संक्रमण को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने और व्यापक स्तर पर जीनोम सीक्वेंसिंग करने की आवश्यकता थी, बावजूद इसके वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग की रफ्तार बहुत धीमी थी, ये नवंबर और जनवरी में फंड की कमी, स्पष्ट दिशा निर्देश का अभाव और खासतौर पर कोरोना संक्रमण के घटते मामलों के चलते प्रशासन की दिलचस्पी ना होने की वजह से सुस्त पड़ती गई. और अब वायरस के स्ट्रेन B.1.167 में तीसरे म्यूटेशन की पहचान की गई है, एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि हालात चिंताजनक होने के चलते जीनोम सीक्वेंसिंग के मामले में तेजी से कदम उठाए जाएंगे.

जीनोम सीक्वेंसिंग क्यों है जरूरी?

जीनोम सीक्वेंसिंग से वायरस के भीतर आने वाले बदलावों का पता चलता है, इससे वायरस की उत्पत्ति और एक खास भौगोलिक इलाके में पहुंचने के रास्ते, म्यूटेशन और बदलावों से जुड़ी अहम जानकारियां भी मिलती हैं, इससे ये पता चलता है कि वायरस कमजोर पड़ रहा है, या ताकतवर हो रहा है. यही वजह है कि चीन से शुरू में ही जीन सीक्वेंस हासिल करने वाले देशों ने रिकॉर्ड टाइम में वायरस की वैक्सीन विकसित कर ली. वैश्विक स्तर पर संक्रमण फैलने के 6 महीनों के भीतर चीन, ब्रिटेन और अमेरिका ने हजारों की संख्या में जीनोम सीक्वेंसिंग की, लेकिन भारत में मात्र कुछ सौ सीक्वेंसिंग हुई.

सार्स-कोव2 जीनोम कंसोर्टियम की स्थापना
जीनोम सीक्वेंसिंग के महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने जनवरी 2021 में सार्स-कोव2 जीनोम कंसोर्टियम (INSACOG) की स्थापना की. INSACOG के साथ 10 लैबोरेट्री को जोड़ा गया है. ये बात ध्यान रखने वाली है कि जीनोम सीक्वेंसिंग में समय लगता है और यह खर्चीला भी है. एक सीक्वेंसिंग में 3 से पांच दिन का समय लग सकता है और इस पर खर्चा 3 से 5 हजार का आता है.

बायोटेक्नोलॉजी विभाग को खुद से फंड जुटाने को कहा

INSACOG को सरकार की ओर पहले 6 महीने के लिए 115 करोड़ की राशि दी गई है और अतिरिक्त राशि के लिए बायोटेक्नोलॉजी विभाग को खुद से फंड जुटाने के लिए कहा गया है. 115 करोड़ के फंड की पहली किश्त 31 मार्च को जारी की गई और आवंटन को 115 करोड़ का 80 फीसदी कर दिया गया. फरवरी में काम शुरू करने के बाद से INSACOG ने 13 हजार से ज्यादा सीक्वेंसिंग की हैं, जबकि उसका लक्ष्य संक्रमण के नए मामलों के 5 फीसद का जीनोम सीक्वेंसिंग करने का है.



वायरस स्ट्रेन में तीन अलग-अलग वैरायटीज

भारत में प्रतिदिन 2.5 लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक INSACOG प्राप्त हुए सैंपल का 1 फीसदी से भी कम सीक्वेंसिंग कर पा रहा है. लेकिन, ऐसी जानकारियां संस्थान को मिल रही हैं, जो चिंतित करने वाली हैं. सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि पिछले सप्ताह स्वास्थ्य मंत्रालय को बताया गया था कि डबल म्यूटेंट स्ट्रेन में एक और म्यूटेशन हो रहा है और यह तीसरा म्यूटेंट बन सकता है और वायरस के स्ट्रेन में तीन अलग-अलग वैरायटीज पाई गई हैं.

इन राज्यों से ट्रिपल म्यूटेंट वैरायटीज

ट्रिपल म्यूटेंट वैरायटीज के लिए जिन राज्यों से सैंपल भेजे गए थे, उनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ शामिल हैं. स्ट्रेन के तीसरे वर्जन में स्पाइक प्रोटीन के बाहर म्यूटेशन देखा गया है, लेकिन इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल से मिले 17 सैंपल में इसे पाया गया है. इन सब चुनौतियों के बीच दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और ब्राजील का स्ट्रेन भी है. 16 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 13,614 सैंपल में 1,189 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें से 1109 सैंपल ब्रिटेन के स्ट्रेन से जुड़े हैं, दक्षिण अफ्रीका के स्ट्रेन से जुड़े 79 सैंपल हैं और 1 सैंपल ब्राजील के स्ट्रेन से जुड़ा पॉजिटिव पाया गया था.



वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें नहीं पता कि संक्रमण के लिए कौन सा स्ट्रेन कितना जिम्मेदार है. हमारे पास कोई सबूत नहीं है. ये B.1.167 हो सकता है या B.1.1.7 (ब्रिटेन) या दोनों हो सकते हैं. ऐसी परिस्थितियों में ही जीनोम सीक्वेंसिंग अहम हो जाती है.
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