कोविड-19 के इलाज में अब नहीं होगा इन दवाओं का उपयोग, कुछ टेस्ट भी हुए बंद

स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने दिशा निर्देशों में कोविड-19 से जुड़े बाकी नियमों का पालन यथावत रखने के लिए कहा है (सांकेतिक तस्वीर)

स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने दिशा निर्देशों में कोविड-19 से जुड़े बाकी नियमों का पालन यथावत रखने के लिए कहा है (सांकेतिक तस्वीर)

Coronavirus Treatment Medicine: रेमडेसिविर का इस्तेमाल कोविड -19 के तीव्र और गंभीर मरीजों जो अस्पताल में भर्ती है, उन पर ही होगा. साथ में बीमारी होने के 10 दिन तक ऑक्सीजन पर रखा जा सकता है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस बीमारी के मरीजों की देखरेख के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी तरह की दवाइयों के इस्तेमाल के लिए मना कर दिया है. अब एसिम्पटोमेटिक और हल्के कोविड के मामलों के लिए बस बुखार और सर्दी जुकाम की ही दवा दी जा सकती है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने दिशा निर्देशों में कोविड-19 से जुड़े बाकी नियमों का पालन यथावत रखने के लिए कहा है. यानि मास्क पहनना, शारीरिक दूरी बनाकर रखना, हाथ धोना और इधर-उधर ना थूकना और छींकने जैसे व्यवहार का पालन एसिम्पटोमेटिक, हल्के और तीव्र और गंभीर सभी को करना होगा.


कौन सी दवा नहीं होगी इस्तेमाल

डीजीएचएस ने 27 मई को जारी अपने नए दिशानिर्देश में हल्के लक्षण वाले और एसिम्पटोमेटिक मरीजों को दी जाने वाली सभी दवाएं देने से मनाही कर दी है. इन दवाओं में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन, आइवरमेक्टिन, डॉक्सीसाइक्लिन, जिंक, मल्टीविटामिन आदि शामिल हैं. डॉक्टर से कहा गया है कि वो अनावश्यक जांच भी ना करवाएं जिसमें सीटी स्केन जैसी जांच शामिल हैं. हल्के लक्षण वाले मामलों में दिशानिर्देश हैं कि मरीज खुद के बुखार, सांस की तकलीफ, ऑक्सीजन सेचुरेशन (SpO2) या कोई और तकलीफ पर नज़र रखे.


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इसमें ये भी कहा गया है कि लोग बस दिख रहे लक्षणों में राहत के लिए एंटी पायरेटिक (बुखार के लिए) और एंटीटसिव (सर्दी जुकाम के लिए) लें और कफ से राहत के लिए ब्यूडेसोनाइड की 800mcg की डोज़ को दिन में दो बार इन्हेलर से लें, इसके अलावा किसी और दवा की ज़रूरत नहीं है. मरीज की बाद में जांच की जा सकती है कि उसमें लक्षण बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं. जहां एसिम्पटोमेटिक मामलों में कोई दवा की ज़रूरत नहीं है, वहीं जिन्हें पहले से कोई बीमारी है वो अपनी पहले से चल रही दवाओं को ले सकते हैं. डीजीएचएस ने सलाह दी है कि जिन्हें भी कोविड के लक्षण नज़र आते हैं उन्हें सेहतमंद और संतुलित आहार लेना चाहिए साथ ही पानी पीते रहना चाहिए.


रेमडेसिविर इस्तेमाल के लिए दिशानिर्देश



1. रेमडेसिविर का इस्तेमाल कोविड -19 के तीव्र और गंभीर मरीजों जो अस्पताल में भर्ती है, उन पर ही होगा. साथ में बीमारी होने के 10 दिन तक ऑक्सीजन पर रखा जा सकता है.

2. ये उन मरीजों के लिए नहीं होगी जिनमें हल्के लक्षण हैं और जो घर में या कोविड केयर में इलाज करा रहे हैं.

3. ये दवा केवल वरिष्ठ डॉक्टर या विशेषज्ञ जो सीधे मरीज की देखरेख में शामिल है, वो ही लिख सकेंगे.

4. अगर कोई ऐसी परिस्थिति हो जाती है जिसमें बगैर किसी वरिष्ठ की उपस्थिति में ये दवा देनी हो तो इसके लिए ड्यूटी डॉक्टर को टेलीफोन पर वरिष्ठ डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेनी होगी.


बेहद गंभीर और बुरी तरह बीमार मरीजों के लिए टोसिलीज़ुमेब (tocilizumab) इस्तेमाल के दिशानिर्देश

1. अगर किसी मरीज में ऑक्सीजन की ज़रूरत पूरी करने के बाद भी 24-48 घंटे में कोई सुधार नहीं दिखता है ऐसे में स्टेरॉयड tocilizumab लगाने की सलाह दी जा सकती है.

2. अगर किसी मरीज में इन्फ्लामेंट्री मार्कर्स (C-Reactive Protein≥75 mg/L) में ज्यादा बढ़ोतरी दिख रही है तो भी उसे दवा दी जा सकती है.

3. हालांकि जब मरीज को Tocilizumab दी जाए तो इस बात की अच्छे से पुष्टि कर लें कि उसे किसी तरह का कोई बैक्टीरियल, फंगल या ट्यूबरकुलोसिन से जुड़ा संक्रमण तो नहीं है.


स्टेरायड के लिए दिशानिर्देश

1. एसिम्पटोमेटिक और कोविड- 19 के हल्के लक्षण वाले मामलों में स्टेरॉयड नुकसानदायक है.

2. स्टेरॉयड केवल अस्पताल में भर्ती, तीव्र, गंभीर और अतिगंभीर कोविड-19 के मामले में ही दी जाए.

3. खुद से स्टेरायड के इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी है.

4. जिन मरीजों को स्टेरॉयड दिया जा रहा है उनकी खून में शर्करा की मात्रा को लगातार जांचा जाए क्योंकि हायपरग्लाइसीमिया की शिकायत हो सकती है.


खून पतला करने वाली दवा के लिए दिशानिर्देश

1. कोविड-19 के मध्यम तीव्र मामलों में लो मोलेक्यूलर वेट हिपेरिन के डोज इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

2. खून बहने का खतरा होने पर इसे नहीं दिया जाना चाहिए.

3. गंभीर मामलों में लो मोलेक्यूलर वेट हिपेरिन का इस्तेमाल किया जा सकता है.

4. थेरेपेटिक डोज यानि इलाज के तौर पर तभी दिया जाए जब मरीज में थ्रंबोएम्बोलिज्म या नसों में खून का थक्का जमने के संकेत मिल रहे हों.



हाइ रेजोल्यूशन सीटी (एचआरसीटी) स्कैन के दिशानिर्देश

1. करीब दो-तिहाई कोविड-19 के एसिम्पटोमेटिक मरीजों में एचआरसीटी की रिपोर्ट में असामान्यता पाई जाती है, लेकिन ये लक्षण आगे नहीं बढ़ते हैं.

2. कोविड-19 से संक्रमण के पहले हफ्ते में छाती की एचआरसीटी कराने पर चूंकि ये फेफड़ों में फैला हुआ दिख सकता है, इससे गलत अंदाजा भी लग जाता है.

3. दिशानिर्देश कहते हैं कि युवा लोगों में फेफड़ों का बहुत बड़ा हिस्से होने पर भी हाइपोक्सिया विकसित नहीं होगा, जबकि बुजुर्गों में फेफड़ों का कम हिस्सा होने पर भी हाइपोक्सिया हो सकता है.

4. बार-बार एचआरसीटी करवाने से रेडिएशन की वजह से बाद में कैंसर का खतरा हो सकता है.

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