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कोरोनाः केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, 45 से कम उम्र के जजों, वकीलों को पहले वैक्सीन देना संभव नहीं 

जनहित याचिका में कोविड-19 टीकाकरण के लिए न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायिक कर्मियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है. फाइल फोटो

जनहित याचिका में कोविड-19 टीकाकरण के लिए न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायिक कर्मियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है. फाइल फोटो

Coronavirus Union Govt tells Supreme court New Category for Judiciary in Vaccination in enviable-केंद्र ने SC से कहा, 45 से कम उम्र के जजों, वकीलों को पहले वैक्सीन देना संभव नहीं

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 15, 2021, 8:56 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि प्राथमिकता के आधार पर कोविड-19 रोधी टीका (Coronavirus) लगाने के वास्ते 45 साल से कम उम्र के न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायिक कर्मियों के लिए अलग श्रेणी बनाना उचित नहीं है. सरकार ने कहा कि पहले से ही श्रमशक्ति और अवसंरचना क्षमता से परे तैयार किए जा रहे टीके का वैश्विक महामारी (Corona Pandemic) के मद्देनजर निर्यात भी किया जा रहा है. प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यिन की पीठ ने कहा कि वह संबंधित याचिका पर 18 मार्च को सुनवाई करेगी.

सीरम, बायोटेक ने रखा अपना पक्ष
याचिका में आग्रह किया गया है कि कोविड-19 टीकाकरण के लिए न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायिक कर्मियों को प्राथमिकता श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया जा चुका है. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और भारत बायोटेक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालय इस बारे में विवरण मांग रहे हैं कि कितने टीकों का उत्पादन किया जा रहा है और सभी लोगों को टीका कब लगाया जाएगा.

अगली सुनवाई 18 मार्च को
रोहतगी ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है और उन्होंने उच्च न्यायालयों के समक्ष दायर सभी मामलों को सुप्रीम कोर्टमें स्थानांतरित करने का आग्रह करते हुए याचिका दायर की है. पीठ ने इसपर कहा कि वह स्थानांतरण याचिका पर जनहित याचिका के साथ ही 18 मार्च को सुनवाई करेगी. जनहित याचिका में कोविड-19 टीकाकरण के लिए न्यायाधीशों, वकीलों और न्यायिक कर्मियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है.



'अलग कैटेगिरी बनाना संभव नहीं'
केंद्र ने अपने शपथपत्र में कहा कि 45 साल से कम उम्र के वकीलों और अन्य के लिए अलग श्रेणी बनाना उचित नहीं है और इस तरह का वर्गीकरण दूसरे कार्यों और व्यवसाय से जुड़े लोगों एवं समान भौगोलिक स्थितियों और परिस्थितियों में काम करने वाले लोगों के साथ भेदभाव होगा. इसने कहा कि पहले से ही श्रमशक्ति और अवसंरचना क्षमता से परे तैयार किए जा रहे टीके का वैश्विक महामारी के मद्देनजर निर्यात भी किया जा रहा है.

केंद्र ने कहा कि टीकाकरण संबंधी निर्णय पूरी तरह कार्यपालिका का निर्णय है, जो देश के व्यापक हित को देखते हुए लिया गया है और यह न्यायिक समीक्षा का विषय नहीं है.
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