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कोरोनाः कैडिला हेल्थकेयर को वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल की मिली मंजूरी

CDSCO ने ये सिफारिश जनहित में एहतियाती कदम के तौर पर कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को देखते हुए लिया है.
CDSCO ने ये सिफारिश जनहित में एहतियाती कदम के तौर पर कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को देखते हुए लिया है.

Central Drugs Standards Control Organisation on Coronavirus Vaccine: सीडीएससीओ ने ये सिफारिश जनहित में एहतियाती कदम के तौर पर कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को देखते हुए लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2021, 8:47 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने कोरोना वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए फॉर्मा कंपनी जायडस कैडिला को मंजूरी दे दी है. ANI के मुताबिक सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने कैडिला हेल्थकेयर को तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल की सिफारिश की है. साथ ही CDSCO ने भारत बायोटेक की वैक्सीन के भी आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल की सिफारिश की है. इससे पहले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड को भी आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल की सिफारिश की गई थी. सीडीएससीओ ने ये सिफारिश जनहित में एहतियाती कदम के तौर पर कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन को देखते हुए लिया है.

केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन की कोविड-19 संबंधी विशेषज्ञ समिति ने शनिवार को भारत बायोटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन कोवाक्सिन के भारत में सीमित आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी देने की सिफारिश की, जो कुछ नियामक प्रावधानों पर निर्भर करेगी. एक्सपर्ट कमिटी की सिफारिश के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) दोनों वैक्सीन को अंतिम मंजूरी देगा.

ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञ समिति ने कुछ नियामक प्रावधान लागू किए हैं, जिनमें कहा गया है कि टीका 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों में रोग को रोकने के लिए इम्युनिटी बढ़ाने के लिहाज से है और इसमें चार से छह सप्ताह के अंतर पर दो खुराक मांसपेशियों में इंजेक्शन के माध्यम से दी जानी चाहिए. देश में मौजूदा वक्त में कोरोना वायरस की 6 वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल जारी है. इनमें कोविशील्ड और कोवाक्सिन भी शामिल है. कोवाक्सिन को भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने साझे तौर पर विकसित किया है.



इन दोनों वैक्सीन के अलावा अहमदाबाद में कैडिला हेल्थकेयर लिमिटेड और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से ZyCOV-D को विकसित किया जा रहा है. साथ ही NVX-CoV2373 को नोवावैक्स के साथ मिलकर सीरम इंस्टीट्यूट विकसित कर रहा है. एक अन्य वैक्सीन को अमेरिकी संस्था एमआईटी और बायोलॉजिकल ई लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा निर्मित किया जा रहा है.

वहीं अमेरिका संस्था एचडीटी और पुणे स्थित गेनोवा बायोफॉर्मास्युटिकल्स लिमिटेड भी साझे तौर पर कोरोना वायरस वैक्सीन बना रही हैं.
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