Coronavirus Vaccine: सीरम ने तैयार किए 4 करोड़ डोज, ICMR की कोविशील्ड पर भी आई खुशखबरी

कॉन्सेप्ट इमेज.
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Coronavirus Vaccine In India: भारत में कोरोना के मामले 86 लाख के पार हो गए हैं. इस बीच वैक्सीन पर काम जारी है. ICMR, SII ने हाल ही में तीसरे फेज के लिए रजिस्ट्रेशन किया है. वहीं SII ने 4 करोड़ डोज तैयार कर लिए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 13, 2020, 1:30 PM IST
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 Coronavirus Vaccine Updates: देश में कोरोना (Coronavirus In India) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. सर्दी के मौसम और देश के कुछ अन्य इलाकों में बढ़ते प्रदूषण के चलते हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं. इस बीच सभी को कोरोना की वैक्सीन का इंतजार है. खबर है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सीटी (Oxford University) और फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका  (astrazeneca)द्वारा वैक्सीन की खुराक तैयार करने वाली भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने करीब 4 करोड़ खुराक बना ली है.

हालांकि अभी तक यह नहीं बताया गया कि वैक्सीन की इन खुराकों का इस्तेमाल कहां होगा. इस सवाल पर भी कोई जानकारी नहीं दी गई कि इसका इस्तेमाल सिर्फ भारत के लिए होगा या फिर यह दुनिया भर में आपूर्ति की जाएगी.

कोवोवैक्स को नोवावैक्‍स ने विकसित किया
हमारी सहयोगी वेबसाइट मनीकंट्रोल के अनुसार  ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन कोविशील्ड के साथ-साथ ICMR और सीरम इंस्टीट्यूट अमेरिकी फार्मा कंपनी नोवाबैक्स (Novavax) के कोरोना वायरस वैक्सीन कोवोवैक्‍स (Covovax) का भी क्‍लिनिकल ट्रायल साथ मिलकर कर रहे हैं. कोवोवैक्स को नोवावैक्‍स ने विकसित किया है और सीरम इंस्टीट्यूट इसे आगे बढ़ाने का काम कर रहा है.
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सीरम इंस्टीट्यूट ने DCGI से वैक्सीन को स्टॉक करने मंजूरी मिलने के बाद कोरोना वायरस वैक्सीन के 4 करोड़ डोज का उत्पादन कर लिया है. इस दोनों वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की फंडिंग ICMR कर रही है, जबकि सीरम इंस्टीट्यूट दूसरे खर्च उठा रही है.

‘कोविशिल्ड’ टीके के तीसरे चरण के ‘क्लिनिकल ट्रायल’ के लिए ICMR-SII ने पंजीकरण किया पूरा
इसके साथ ही सीरम और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भारत में कोविड-19 के टीके ‘कोविशील्ड’ के तीसरे चरण के ‘क्लिनिकल ट्रायल’ के लिए 1,600 प्रतिभागियों का पंजीकरण पूरा होने की गुरुवार को घोषणा की.

अमेरिका की ‘नोवावैक्स’ द्वारा विकसित ‘कोवोवैक्स’ के लिए ICMR और SII मिलकर काम कर रहे हैं. ICMR ने एक बयान में कहा, ‘‘साझेदारी महामारी के फैलने के गंभीर परिणामों को कम करने के लिए निजी-सार्वजनिक संस्थानों के सहयोग का एक शानदार उदाहरण है.’

ICMR ‘क्लिनिकल ट्रायल साइट’ का खर्च उठा रहा है और SII ‘कोविशील्ड’ पर आने वाले अन्य खर्चे उठा रही है. अभी SII और ICMR देश में 15 विभिन्न केन्द्रों में ‘कोविशील्ड’ का 2/3 चरण का ‘क्लिनिकल ट्रायल’ कर रहे हैं. उन्होंने 31 अक्टूबर को सभी 1,600 प्रतिभागियों का पंजीकरण पूरा कर लिया था.

ICMR ने कहा, ‘अभी तक हुए परीक्षणों के परिणाम से यह उम्मीद जगी है कि ‘कोविशील्ड’ घातक वैश्विक महामारी का एक वास्तविक समाधान हो सकता है. भारत में अभी तक जितने टीकों का मानव परीक्षण हुआ है, उसमें ‘कोविशील्ड’ के नतीजे सबसे अच्छे हैं.’
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