कोरोनाः भारत में रेमडेसिविर दवा की कमी क्यों? प्रोटोकाल का उल्लंघन, अवैध भंडारण और कालाबाजारी

पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के परभणी जिले में एक मेडिकल स्टोर के मालिक को रेमडेसिविर दवा की एक खुराक को 6 हजार रुपये में बेचने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था. फाइल फोटो

पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के परभणी जिले में एक मेडिकल स्टोर के मालिक को रेमडेसिविर दवा की एक खुराक को 6 हजार रुपये में बेचने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था. फाइल फोटो

Remdesivir shortage in India: मौजूदा समय में डॉक्टर और अस्पताल इस दवा के इंजेक्शन को हल्के श्वास संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे कोरोना मरीजों के लिए भी सुझा रहे हैं. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 5:58 AM IST
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नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) के निर्यात पर बैन लगा दिया है. साथ ही कोरोना वायरस के इलाज में प्रयुक्त होने वाली इस दवा के अवयवों पर भी रोक लगा दी है. सरकार की ओर जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि आने वाले दिनों में रेमडेसिविर की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि रेमडेसिविर के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों को कोई फायदा होता है, इसका कोई सबूत नहीं है. देश भर में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए दवा की मांग में खासा इजाफा हुआ है. ऐसे में कई राज्यों ने रेमडेसिविर की कमी का हवाला दिया है.

दरअसल रेमडेसिविर का विकास हेपटाइटिस सी के इलाज के लिए हुआ था, लेकिन बाद में इबोला वायरस के इलाज में इसका प्रयोग किया गया. कोरोना वायरस के इलाज में प्रयुक्त शुरुआती दवाओं में रेमडेसिविर भी थी, जिसकी वजह से यह दवा मीडिया की सुर्खियों में रही. हालांकि 20 नवंबर 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि कोरोना मरीजों के इलाज में डॉक्टरों को रेमडेसिविर के इस्तेमाल से बचना चाहिए. हालांकि डब्ल्यूएचओ के दावों के उलट दवा बनाने कंपनी ने रेमडेसिविर के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि दवा कोरोना के इलाज में कारगर हैं.

पिछले साल दिसंबर महीने में ब्रिटेन स्थित कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने कोरोना वायरस से संक्रमित और दुर्लभ इम्युन सिस्टम वाले एक मरीज को रेमडेसिविर दवा दी और पाया कि मरीज के स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार हुआ और वायरस शरीर से खत्म हो गया. इस अध्ययन को नेचर कम्युनिकेशंस ने प्रकाशित किया, जिसके बाद भारत सहित कई सारे देशों द्वारा रेमडेसिविर के इस्तेमाल की खबरें आईं. रेमडेसिविर पर अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा था कि दवा उस समय ज्यादा कारगर होती है, जब संक्रमण के शुरुआती स्टेज में इसे मरीज को दिया जाए. इससे पहले कि वायरस व्यक्ति के शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचाए.

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बाद रेमडेसिविर की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है. दवा के अवैध भंडारण, ब्लैक मार्केटिंग के चलते बाजार से रेमडेसिविर गायब हो गई है. पिछले सप्ताह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि दवा का उपयोग बिना किसी आधिकारिक प्रोटोकॉल के अवैध रूप से किया जा रहा है. राज्य को हर दिन 50 हजार खुराक मिलती है, और सभी गोलियों की मरीजों के इलाज में खपत हो जाती है, जिसकी वजह से राज्य में रेमडेसिविर की कमी हो गई है. टोपे ने कहा था कि हो सकता है कि फार्मासिस्ट और स्टॉकिस्ट इस दवा की ब्लैक होर्डिंग कर रहे हों, जिसे रोकने की जरूरत है.
कोरोना वायरस संक्रमण से पहले रेमडेसिविर का इस्तेमाल सार्स बीमारी के इलाज में किया जा रहा था. मौजूदा समय में डॉक्टर और अस्पताल इस दवा के इंजेक्शन को हल्के श्वास संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे कोरोना मरीजों के लिए भी सुझा रहे हैं. महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया था. मंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए था कि रेमडेसिविर के इंजेक्शन का प्रयोग न्यायिक रूप से किया जाए और दवा के अवैध भंडारण को रोकने के लिए इसकी कीमतों पर लगाम लगाई जाए.

पिछले सप्ताह महाराष्ट्र के परभणी जिले में एक मेडिकल स्टोर के मालिक को रेमडेसिविर दवा की एक खुराक को 6 हजार रुपये में बेचने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस दवा की कीमत 4800 रुपये है. दवा की कालाबाजारी को रोकने के लिए पुणे के अस्पतालों ने रेमडेसिविर के इंजेक्शन को सीधे कोरोना मरीजों को सौंपना शुरू कर दिया, बजाय कि परिजनों और रिश्तेदारों को देने के.

हालांकि रेमडेसिविर की कमी का मामला सिर्फ महाराष्ट्र से नहीं जुड़ा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के ड्रग रेगुलेटर ने रेमडेसिविर की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए कई राज्यों को हाल ही में निर्देश जारी किया था. रिपोर्ट के मुताबिक देश में रेमडेसिविर को तय कीमत से 10 गुणा ज्यादा दाम में बेचा जा रहा है. एक सोशल मीडिया पोस्ट में पश्चिमी गुजराात के एक हिस्से में लोगों को रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने के लिए लंबी लाइन में देखा गया था. गुजरात के साथ मध्य प्रदेश में मेडिकल स्टोर्स के बाहर लंबी कतारें दिख रही हैं. 9 अप्रैल को तो दवा ना मिलने से आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया था.





मौजूदा वक्त में देश की कई सारी भारतीय कंपनियों को जाइलेड साइंसेज (Gilead Sciences) से दवा की मैन्युफैक्चरिंग का लाइसेंस प्राप्त है. स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल के लिए कंपनी ने एक दिन में 39 लाख यूनिट के निर्माण का लाइसेंस दिया है. एक बयान में सरकार ने निर्माता कंपनियों से कहा कि दवा की सप्लाई को बढ़ाया जाए और इस बारे में जवाबदेह एजेंसियों को सूचित किया जाए. रेमडेसिविर का निर्यात आगे स्थिति में सुधार होने तक प्रतिबंधित रहेगा.
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