आखिर क्यों प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीनेशन को राजी हुई सरकार, समझिए कारण

फरवरी के आखिरी हफ्ते तक 1 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों का टीकाकरण हुआ है. फाइल फोटो

फरवरी के आखिरी हफ्ते तक 1 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों का टीकाकरण हुआ है. फाइल फोटो

Vaccination in Private Hospitals: 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी को देखें तो सिर्फ सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण कराने से बड़ी आबादी तक पहुंचने में समय लगता और लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 6:58 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस टीकाकरण कार्यक्रम के संबंध में केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एक बड़ा ऐलान किया. बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि 1 मार्च से प्राइवेट अस्पतालों में भी कोरोना वायरस का टीका लगने लगेगा. हालांकि प्राइवेट अस्पताल में टीका लगवाने लोगों को भुगतान करना होगा. ये फ्री नहीं होगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तीन से चार दिनों के भीतर प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगवाने पर कितना भुगतान करना होगा, इस बारे में वैक्सीन निर्माताओं और अस्पतालों से चर्चा करके ऐलान करेगा. बहरहाल, 16 जनवरी से शुरू हुए कोरोना वायरस टीकाकरण कार्यक्रम में सरकार ने निजी क्षेत्र को भी अपने साथ ले लिया है. अब सवाल ये है कि सरकार आखिर क्यों प्राइवेट अस्पतालों में टीकाकरण के लिए राजी हुई?

महाराष्ट्र में कोरोना के दो नए स्ट्रेन

दरअसल, पहली नजर में देखें तो सीधा सा अर्थ है कि निजी क्षेत्र के कार्यक्रम में आने से टीकाकरण को रफ्तार मिलेगी. महाराष्ट्र और केरल सहित कई राज्यों में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर से बढ़ना शुरू हो गए हैं. अमरावती और यवतमाल में कोरोना वायरस के दो नए स्ट्रेन मिले हैं और लगभग ग्रामीण पृष्ठभूमि वाला विदर्भ क्षेत्र वायरस संक्रमण का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है. महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में लॉकडाउन है. केरल में हर रोज अब भी सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं. जोधपुर में रात का कर्फ्यू लगाया गया है. मध्य प्रदेश में बाहर से आने वाले लोगों की थर्मल स्कैनिंग हो रही है. कर्नाटक में केरल से लगे सीमाई इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है. अन्य राज्यों ने अपने स्तर पर कई कदम उठाए हैं.

1 मार्च से टीकाकरण का दूसरा चरण
ये सारी स्थितियां बता रही हैं कि देश में वायरस संक्रमण फिर से सिर उठा रहा है. ऐसे में ज्यादा तेजी के साथ टीकाकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ाना जरूरी हो जाता है. जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण कार्यक्रम में सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को प्राथमिकता देते हुए पहले टीकाकरण करना शुरू किया और फरवरी के आखिरी हफ्ते तक 1 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन कर्मचारियों का टीकाकरण हुआ है. इन वर्गों के बाद सबसे जरूरी है 60 से ज्यादा उम्र के लोगों का टीकाकरण, जिसके लिए सरकार ने 1 मार्च से कार्यक्रम शुरू करने का ऐलान किया है.

बड़ी आबादी को करना पड़ता इंतजार

इसके साथ गंभीर बीमारियों वाले 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग वैक्सीन लगवा सकेंगे. 45 वर्ष से ज्यादा उम्र लोगों की आबादी को देखें तो सिर्फ सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण कराने से बड़ी आबादी तक पहुंचने में ज्यादा समय लगेगा और लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता. यहीं पर निजी क्षेत्र की भागीदारी अहम हो जाती है. केंद्र सरकार ने एक तरीके से उचित समय पर निजी क्षेत्र को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है.



अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर पीछे नहीं जाना चाहती सरकार

निजी क्षेत्र के टीकाकरण कार्यक्रम में आने से एक और महत्वपूर्ण चीज पर सरकार फोकस करते हुए कोरोना के असर को थाम सकेगी. अगर वायरस संक्रमण को लेकर भविष्य में स्थिति बिगड़ती है, तो अर्थव्यवस्था पर उसका असर दोबारा पड़ेगा. औद्योगिक इलाकों में लॉकडाउन और कामकाज की बंदी आम जिंदगी को बदहाल बना देगी. ऐसे में अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर 2020 के लॉकडाउन में वापस जाना सही नहीं होगा. केंद्र सरकार के फैसले से ये जाहिर भी होता है कि सरकार अब अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर पीछे नहीं लौटना चाहती है.



लिहाजा देश में टीकाकरण तेजी से आगे बढ़े इसके लिए निजी क्षेत्र को भागीदारी देने का फैसला उचित ही कहा जाएगा.
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