भ्रष्टाचार सूचकांक: भारत की रैंकिंग में सुधार के लिए कदम उठाने को लेकर कोर्ट में PIL दायर

भ्रष्टाचार सूचकांक: भारत की रैंकिंग में सुधार के लिए कदम उठाने को लेकर कोर्ट में PIL दायर
जनहित याचिका में उपाध्याय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के अलावा भारत के विधि आयोग, गृह मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय को इसमें पक्ष बनाया गया है

भाजपा नेता (BJP Leader) और वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका में भ्रष्टाचार सूचकांक (Corruption index) में शीर्ष 20 देशों में शामिल रहे देशों के अच्छे आचरण की पड़ताल करने के लिये तथा रिश्वत और काले धन (Black Money) के सृजन का उन्मूलन करने के बारे में सुझाव देने के लिए विशेषज्ञ समितियों का गठन करने का अनुरोध किया गया है.

  • भाषा
  • Last Updated: September 13, 2020, 6:59 PM IST
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में एक जनहित याचिका दायर (Public Interest Litigation- PIL) कर केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों (Union Territory) को ‘‘वैश्विक भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक’’ (Global corruption perception index) में भारत की खराब रैंकिंग में सुधार के लिए सुझाव देने को लेकर विशेषज्ञ समितियों (expert committees) का गठन करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ द्वारा तैयार भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) में 180 देशों के बीच भारत 80वें स्थान पर है.

भाजपा नेता (BJP Leader) और वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका में भ्रष्टाचार सूचकांक (Corruption index) में शीर्ष 20 देशों में शामिल रहे देशों के अच्छे आचरण (good behavior) की पड़ताल करने के लिये तथा रिश्वत और काले धन (Black Money) के सृजन का उन्मूलन करने के बारे में सुझाव देने के लिए विशेषज्ञ समितियों (expert committees) का गठन करने का अनुरोध किया गया है.

सभी राज्यों के साथ विधि आयोग, गृह और कानून मंत्रालय को बनाया गया है पक्षकार
वकील अश्वनी कुमार दुबे के जरिये दायर की गई अपनी जनहित याचिका में उपाध्याय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के अलावा भारत के विधि आयोग, गृह मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय को इसमें पक्ष बनाया है.
याचिका में भ्रष्टाचार के खतरे, काले धन का सृजन और ‘बेनामी’ लेन-देन को खत्म करने के लिए उपाय और भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में भारत की रैंकिंग में सुधार के वास्ते सुझाव दिये जाने के लिए विधि आयोग को निर्देश दिये जाने का अनुरोध भी किया गया है.



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याचिका में कहा गया है कि व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त होने के कारण देश की आजादी के 73 साल बाद भी, 50 फीसदी आबादी संकट में है और वे आजीविका में कठिनाइयों का सामना कर रही है.
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