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म्यांमार में तख्ता-पलट: असम राइफल्स ने पूरी तरह सील किया बॉर्डर, लेकिन खतरा टला नहीं है

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी को भी भारत में अवैध तरके से आने न दिया जाए.

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी को भी भारत में अवैध तरके से आने न दिया जाए.

Assam Rifles: आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, करीब 300 म्यांमार के नागरिक अब तक मिजोरम आ चुके थे. इनमें से करीब 150 म्यांमार के पुलिसकर्मी थे. इन सभी शरणार्थियों के लिए बॉर्डर पर कैंप लगाए गए हैं. भारत सरकार के निर्देश के बाद अब असम राइफल्स ने म्यांमार बॉर्डर की सुरक्षा बढ़ा दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 7:33 PM IST
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नई दिल्ली. म्यांमार में तख्ता पलट (Myanmar crisis) के बाद असम राइफल ने भारत-म्यांमार बार्डर पर सतर्कता को और बढ़ा दिया है. म्यांयार से भारत आने वाली सभी सड़कों के एंट्री प्वाइंट को सील कर दिया गया है. म्यांमार के नागरिक अवैध तरीके से भारत में न घुस सकें, इसकी सारी जिम्मेदारी असम राइफल पर है.

दरअसल, भारत और म्यांमार के बीच 1600 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो कि देश के चार राज्यों से लगती है. इसलिए असम राइफल की ज़िम्मेदारी और बढ़ गई है. साथ ही उग्रवादियों के मूवमेंट पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है. भारत और म्यांमार के बीच कुल 72 बॉर्डर पिलर है, जिनमें से 32 मिज़ोरम में है. सीमा पर किसी तरह की कोई घुसपैठ न हो सके इसलिए हर मौसम में असम राइफल के जवान घने जंगलों और नदियों के रास्ते अपनी सीमा पर पेट्रोलिंग करते हैं.

मिजोरम में जवानों के लिए पेट्रोलिंग करना है बड़ी चुनौती
एक ऐसी ही पेट्रोलिंग न्यूज़18 की टीम ने भी थोड़ी देर तक असम राइफल के साथ थी. जो कि भारत-बांग्लादेश-म्यांमार ट्राइजंशन पर बने बार्डर पिलर नंबर 1 तक पेट्रोलिंग के लिए निकल रही थी. साल के सात महीने मिज़ोरम में बरसात का मौसम रहता है और उस दौरान इन इलाकों में पेट्रोलिंग करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
ऐसी चुनौती का नजारा इस पेट्रोलिंग के दौरान भी दिखा जब नदी के रास्ते निगरानी के लिए निकले इस पेट्रोल पार्टी का एक जवान पैर फिसलने से पानी में डूबने लगा. डूबते हुए जवान को तुरंत ही उसके साथी ने बचाया और फिर से पेट्रोलिंग शुरू की. मिज़ोरम में भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात असम राइफल बटालियन के कमांडिंग अफसर कर्नल बिजोय ने बताया कि इसी तरह से घने जंगल से होते हुए हम अपने बार्डर पिलर तक पेट्रोलिंग करते हैं.



पेट्रोलिंग टीम में महिला जवान भी होती हैं शामिल
चूंकि जंगल घने हैं और बरसात के मौसम में काफी ख़तरनाक भी हो जाता है, लेकिन अपनी सीमा और अपने इलाके को महफ़ूज़ रखने के लिए असम राइफल लगातार अपने काम को अंजाम देती है. इस पेट्रोलिंग टुकड़ी में एक महिला असम राइफल वीमेन भी शामिल थी. राइफल वूमेन की मौजूदगी भी इसलिए उन इलाकों में जरूरी है जब कभी बार्डर के पास वाले गांव में कभी तलाशी या छानबीन करनी होती है तो महिलाओं की तलाशी असम राइफल वीमेन ही करती है.

वक्त के साथ अपग्रेड हुई असम राइफल
तकनीकी तौर पर असम राइफल ने समय के साथ-साथ अपने को अपग्रेड भी किया है अब किसी भी पेट्रोलिंग के लिए जाने वाली टुकड़ी में एक ड्रोन या कहे क्वार्डकॉप्टर चलाने वाला जवान भी शामिल होता है. ये जवान पेट्रोलिंग टीम से पहले अपने ड्रोन से उस इलाके पर नजर रखता है कि कहीं कोई ख़तरा या कोई चुनौती तो नहीं है.

तख्तापलट के बाद भारत आ रहे हैं म्यांमार के लोग
ऐसा इसीलिए है क्योंकि भारत म्यांमार सीमा पर इंसर्जेट ग्रुप सक्रिय है और असम राइफल के साथ कभी भी मुठभेड़ हो सकती है. मिज़ोरम से लगने वाली 510 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इन दिनों काफी सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि तख्ता पलट के बाद से ही म्यांमार से शरणार्थियो के अवैध तरीक़े से आने की संभावना बढ़ गई है. जानकारी के मुताबिक़ तकरीबन 300 से ज्यादा रिफ्यूजी अब तक म्यांमार से मिज़ोरम पहुंचे हैं, जिसमें 100 से ज्यादा म्यांमार पुलिस के अधिकारी और जवान हैं, जिन्हें म्यांमार सेना ने तख्तापलट का विरोध करने वाले को गोली तक मार देने के आदेश जारी किए हैं.

हालांकि केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी को भी भारत में अवैध तरीके से आने न दिया जाए, लेकिन मिज़ोरम के लोग इससे उलट मानवता के आधार पर उन्हें आश्रय देने की बात कर रहे है. यही नहीं कहा जा कहा है कि मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने तो प्रधानमंत्री को एक पत्र लिख कर गृह मंत्रालय की तरफ से अवैध तरीक़े से म्यांमार के लोगों को भारत में आने से रोकने और जो आए हैं उन्हें जल्द से जल्द वापस भेजे जाने वाले ऑर्डर को वापस लेने की बात कही है.

क्या कहता है भारत-म्यांमार सीमा का कानून
मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने तो म्यांमार के निर्वासित सरकार के विदेश मंत्री से भी बात की है. दोनों देशों के बीच फ़्री बार्डर मूवमेंट रिजीम है जिसके तहत सीमा के पास रहने वाले दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के देश में 16 किलोमीटर तक आ जा सकते है लेकिन कोरोना के बाद से इस व्यवस्था को सस्पेंड कर दिया गया था और अब भी इस FMR को फिर से लागू नहीं किया गया है. म्यांमार बॉर्डर की तारबंदी न होने के चलते ये पूरी तरह से खुला बॉर्डर है. बॉर्डर पर रहने वाले नागरिक एक दूसरे की सीमा में बिना पासपोर्ट-वीजा के 8-8 किलोमीटर तक दाखिल हो सकते हैं और 14 दिनों तक रह भी सकते हैं.

मिज़ोरम का ये हिस्सा इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं से कालादान प्रोजेक्ट होकर गुज़रता है. पिछले कुछ साल में उस प्रोजेक्ट पर वहां के इंसर्जेट ग्रुप अराकान आर्मी ने ज़बरदस्त हमले किए ताकि ये प्रोजेक्ट पूरा न हो सकें. ये वही अराकान आर्मी है जिसे चीन से हथियार, पैसा और खास ट्रेनिंग मिलती है. तकरीबन 600 से ज्यादा बार म्यांमार की सेना और अराकान आर्मी के बीच इस इलाके में झड़प हो चुकी है, लेकिन कि पिछले साल ही नवंबर में ही म्यांमार आर्मी और अराकान आर्मी के बीच सीजफायर हो गया और अराकान आर्मी ने अपने सभी लोगों को बार्डर के पास से बेस पर लौटने को कहा है. जानकारों की मानें तो म्यांमार में तख्तापलट को लेकर म्यांमार के ज़्यादातर इंसर्जेट ग्रुप ख़िलाफ़ हैं.
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