बटला हाउस मुठभेड़ पर कुछ प्रेस ब्रीफिंग के बाद गृह मंत्रालय ने कहा और प्रेस वार्ता नहीं: करनैल सिंह

बाटला हाउस एनकाउंटर (प्रतीकात्‍मक  तस्‍वीर)

बाटला हाउस एनकाउंटर (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Batla House encounter : करनैल सिंह ने 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हुई मुठभेड़ से जुड़ी यह और ऐसी ही कई अन्य जानकारियां अपनी किताब 'बटला हाऊस: ऐन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन' में साझा की हैं. इस मुठभेड़ में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के दो आतंकवादी मारे गए थे.

  • भाषा
  • Last Updated: September 12, 2020, 10:32 PM IST
  • Share this:

नई दिल्ली. दिल्ली में 2008 में हुए बम धमाकों की जांच का नेतृत्व करने वाले पुलिस अधिकारी करनैल सिंह (Karnail Singh) के मुताबिक इन धमाकों के करीब एक हफ्ते बाद हुई बटला हाउस मुठभेड़ (atla House encounter) पर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जब कुछ संवाददाता सम्मेलन किये तो गृह मंत्रालय की तरफ से उसे निर्देश मिला कि जांच में प्रगति के बारे में मीडिया को और जानकारी न दी जाए. सिंह ने 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हुई मुठभेड़ से जुड़ी यह और ऐसी ही कई अन्य जानकारियां अपनी किताब 'बटला हाऊस: ऐन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन' में साझा की हैं. इस मुठभेड़ में इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के दो आतंकवादी मारे गए थे.

इस मुठभेड़ के दौरान बटला हाउस इलाके में पुलिस कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा शहीद हो गए थे. लेखक ने खुफिया ब्यूरो(आईबी), विभिन्न भारतीय शहरों में घटनाक्रम से जुड़े तारों, स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारियों और मुखबिरों से मिली विभिन्न जानकारियों को एक साथ गूंथकर मुठभेड़ की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले घटनाक्रम का मिनट-दर-मिनट ब्योरा अपनी इस किताब में पेश किया है. मुठभेड़ के समय दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के संयुक्त आयुक्त रहे सिंह ने कहा कि पुलिस द्वारा मीडिया के साथ कुछ मौकों पर जानकारियां साझा किये जाने के बाद उन्हें पुलिस आयुक्त का एक फोन आया कि गृह मंत्रालय नहीं चाहता कि वे जांच में होने वाली प्रगति के बारे में और मीडिया ब्रीफिंग करें.

IPS अधिकारी ने अपनी किताब में किए कई खुलासे 

आईपीएस अधिकारी ने अपनी किताब में लिखा, 'आतंकवादियों के अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े होने के विवरण बाहर आने से राजनीतिक हलकों के कुछ लोग खुश नहीं थे. मेरी यह दलील व्यर्थ साबित हुई कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और एक पुलिस अधिकारी के तौर पर यह हमारा कर्तव्य है कि हम आतंकवादियों को पकड़ने के लिये सुराग पर काम करें, भले ही उनका धर्म कुछ भी हो.' उन्होंने कहा कि वह जानते थे कि 'ऐसे महत्वपूर्ण मामले में मीडिया को यूं ही अलग छोड़ देने के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि ऐसे में आधी-अधूरी जानकारी बाहर आएगी या फिर उससे भी बुरा यह हो सकता है कि गलत और मनगढ़ंत खबरें आने लगें.'
उनके मुताबिक, मीडिया हमसे जानकारी मांग रहा था लेकिन हमें सख्त आदेश थे कि मीडिया से जांच संबंधी कोई बात साझा न की जाए. 'इसलिये, वहां अफरा-तफरी थी. मैं दावे से कह सकता हूं कि दिल्ली पुलिस धारणा की लड़ाई हार रही थी.' उन्होंने कहा कि बटला हाउस मुठभेड़ आतंकवाद के खिलाफ जंग में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम साबित हुई.

रूपा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की जा रही इस किताब में सिंह ने लिखा, 'इसने आईएम को करारा झटका दिया क्योंकि उसके प्रमुख सदस्यों को काबू में किया गया और भारत में उसके नेटवर्क की कमर टूट गई. हमनें अपने सबसे होशियार और बहादुर अफसरों में से एक को खो दिया, जिसकी तफ्तीश से हम आईएम के मुख्य सदस्यों तक पहुंचे.' यह मुठभेड़ विवादों के घेरे में रही और इसको लेकर काफी सियासत भी हुई. कुछ दिनों पहले राजधानी में हुए धमाकों की वजह से सरकार पर भी दबाव था.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज