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आरोपियों को किस आधार पर मिलनी चाहिए जमानत? सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से जुड़े झारखंड हाई कोर्ट के फैसलों पर ऐतराज जताया है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी/फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से जुड़े झारखंड हाई कोर्ट के फैसलों पर ऐतराज जताया है. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी/फाइल फोटो)

Supreme Court News: झारखंड हाई कोर्ट ने भारी-भरकम राशि जमा कराने के एवज में कई आरोपियों की जमानत याचिका स्‍वीकार कर ली. ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

जमानत देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम व्‍यवस्‍था दी है
बेल के लिए झारखंड हाई कोर्ट की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल
SC ने जमानत से जुड़े कई मामलों में फिर से व्‍यवस्‍था देने का दिया निर्देश

नई दिल्‍ली. अदालतें आरोपियों को किस आधार पर जमानत दे, इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्‍वपूर्ण व्‍यवस्‍था दी है. शीर्ष अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट की ओर से कुछ मामलों में आरोपियों को दी गई जमानत पर सख्‍त ऐतराज जताते हुए इनपर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जमानत देने का आधार अपराध की प्रकृति होनी चाहिए न कि आरोपी की भुगतान करने की क्षमता पर इसका निर्णय लिया जाना चाहिए. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को ऐसे मामलों में दिए गए फैसलों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने के लिए झारखंड हाई कोर्ट द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को खारिज करते यह टिप्‍पणी की है. दरअसल, झारखंड हाई कोर्ट ने भारी-भरकम राशि जमा करने के एवज में कई आरोपियों को जमानत दे दी. इस पूरी प्रक्रिया में अपराध की प्रकृति पर विचार नहीं किया गया. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने आरोपियों को पीड़ित को मुआवजा देने के एवज में भी बड़ी राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कई मामलों पर दिए गए आदेशों पर विचार करने के बाद यह टिप्‍पणी की. शीर्ष अदालत ने कहा कि इन मामलों में जमानत देने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का कोई कानूनी आधार नहीं है.

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झारखंड ने ऐसे ही एक केस में घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना से जुड़े मामले के एक आरोपी और उनके माता-पिता को 25 हजार रुपये के मुचलके और पीड़ित को मुआवजा देने के तौर पर 7.5 लाख रुपये जमा कराने के एवज में जमानत दे दी. आरोपी की पत्‍नी का कहना था कि शादी के वक्‍त उनके परिवार ने दहेज के तौर पर इतनी ही राशि (7.5 लाख रुपये) ससुराल पक्ष को दी थी. आरोपी ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. आरोपी की याचिका को स्‍वीकार करते हुए जस्टिस दिनेश माहेश्‍वरी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने जमानत के शर्तों को खारिज करते हुए कहा कि हाई कोर्ट द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानून सम्‍मत नहीं है.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक और गंभीर टिप्‍पणी की. शीर्ष अदालत ने कहा कि इससे पहले भी हाई कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए इसी तरह के आदेश पारित किए हैं. इनमें दहेज से लेकर आईपीसी की धारा 420, 376, पॉक्‍सो एक्‍ट से जुड़े मामले शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सभी मामलों पर नए सिरे से विचार करने के लिए उन्‍हें हाई कोर्ट के पास भेज दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट इन पर नए सिरे से निर्णय करे.

Tags: Jharkhand High Court, National News, Supreme Court

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