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WHO से मंजूरी पाने के करीब कोवैक्सीन! सिलसिलेवार तरीके से जानें अब तक क्या हुआ

कहा जा रहा है कि एक बार फेज-3 स्टडी के अंतिम विश्लेषण का डेटा उपलब्ध हो जाएगा, तो कंपनी कोवैक्सीन के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती है.(पीटीआई फाइल फोटो)

कहा जा रहा है कि एक बार फेज-3 स्टडी के अंतिम विश्लेषण का डेटा उपलब्ध हो जाएगा, तो कंपनी कोवैक्सीन के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती है.(पीटीआई फाइल फोटो)

WHO Approval for Covaxin: मई में भारत बायोटेक ने EUL के लिए WHO के पास आवेदिन दिया था. कहा गया था कि वैक्सीन को जुलाई-सितंबर तक सूची में शामिल किया जा सकता है.

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    नई दिल्ली. देश में मंजूरी प्राप्त भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की कोवैक्सीन को जल्द ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से भी अप्रूवल मिल सकता है. WHO की तरफ से दी गई नई जानकारी के अनुसार, कोवैक्सीन का रोलिंग डेटा जुलाई में शुरू होगा. कंपनी ने 23 जून को संगठन के साथ बैठक की थी. मंगलवार को ही WHO ने EUL/PQ यानि इमरजेंसी यूज लिस्टिंग/प्रीक्वालिफिकेशन में शामिल वैक्सीन उम्मीदवारों की मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी अपडेट की थी.

    मंगलवार को भारत बायोटेक की जॉइंट एमडी सुचित्रा ऐल्ला ने कहा था कि कोवैक्सीन अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करती है. WHO की गाइडलाइंस के अनुसार, EUL एक प्रक्रिया है, जिसके तहत नए और बगैर लाइसेंस वाले प्रोडक्ट्स का पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के दौरान इस्तेमाल किया जा सकता है.

    WHO और कोवैक्सीन के बीच जारी इस प्रक्रिया को सिलसिलेवार तरीके से समझिए-

    मई में भारत बायोटेक ने EUL के लिए WHO के पास आवेदन दिया था. कहा गया था कि वैक्सीन को जुलाई-सितंबर तक सूची में शामिल किया जा सकता है.

    23 जून को WHO और भारत बायोटेक के बीच एक प्री-सबमिशन मीटिंग हुई. फार्मा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में लिखा गया कि एक बार भारत बायोटेक कोवैक्सीन के फेज-3 ट्रायल का पूरा डेटा जमा कर देता है, तो डोजियर पूरा हो जाएगा और फिर संगठन इसकी समीक्षा करेगा. अधिकारी ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि कोवैक्सीन की EULआवेदन की समीक्षा प्रक्रिया एफिकेसी स्टडी डेटा के जमा किए जाने के बाद जुलाई में शुरू हो जाएगी.

    कहा जा रहा है कि एक बार फेज-3 स्टडी के अंतिम विश्लेषण का डेटा उपलब्ध हो जाएगा, तो कंपनी कोवैक्सीन के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती है.

    यह भी पढ़ें: Explained: कोरोना के खिलाफ किस तरह और कितनी कारगर है मॉडर्ना वैक्सीन? जानें सब कुछ

    भारत बायोटेक के अमेरिकी साझेदार ऑक्यूजेन को एफडीए से एक सिफारिश प्राप्त हुई है. इसमें कहा गया है कि EUL का पीछा करने के बजाए कोवैक्सीन के लिए बायोलॉजिक्स लाइसेंस एप्लीकेशन या पूर्ण लाइसेंस पर काम करना चाहिए. अमेरिकी नियामक ने अधिक जानकारी और डेटा मांगा था. हालांकि, कंपनियों को लगा कि इससे अतिरिक्त क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत बढ़ेगी और मंजूरी पाने के समय में इजाफा होगा.

    NIH ने कहा कि कोवैक्सीन प्राप्त करने वाले लोगों के ब्लड सीरम पर की गई दो स्टडीज की गई थीं. इनके नतीजों से पता चला है कि वैक्सीन एंटीबॉडी तैयार करती हैं, जो SARS-CoV-2 के अल्फा (B.1.1.7) और डेल्टा (B.1.617) वेरिएंट्स को प्रभावी ढंग से बेअसर कर देती है.

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