कोरोना संक्रमण के मामले में कोवैक्सीन 78 प्रतिशत तक प्रभावी, डबल म्यूटेंट स्ट्रेन भी बेअसर

हैदराबाद की भारत बायोटेक ने सीएमआर के साथ मिलकर कोवैक्सीन विकसित की है. (Photo- news18 creative)

हैदराबाद की भारत बायोटेक ने सीएमआर के साथ मिलकर कोवैक्सीन विकसित की है. (Photo- news18 creative)

efficacy of Covaxin: आईसीएमआर ने कहा कि कोवैक्सीन दो बार उत्परिवर्तन कर चुके बी.1.617 सार्स-सीओवी-2 प्रकार को भी संवर्धित करने में कामयाब रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 21, 2021, 6:17 PM IST
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नई दिल्ली. स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन के निर्माताओं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और भारत बॉयोटेक ने बुधवार को कहा कि तीसरे चरण के अंतरिम विश्लेषण के तहत कोविड-19 संक्रमण के मामले में कोवैक्सीन संपूर्ण रूप से 78 प्रतिशत तक प्रभावी पाई गई है. इसके साथ ही कोरोना संक्रमण के गंभीर मामलों में कोवैक्सीन 100 फीसदी प्रभावी है. कोवैक्सीन के प्रभावी होने से जुड़े इन आंकड़ों का ऐलान दूसरे अंतरिम विश्लेषण के आधार पर किया गया है. दरअसल कोवैक्सीन के फेज-3 के ट्रायल में 87 वालंटियर्स कोरोना के लक्षणों वाले थे. अपनी पहली अंतरिम विश्लेषण रिपोर्ट में भारत बायोटेक और आईसीएमआर ने कहा था कि कोवैक्सीन का प्रभाव 81 फीसदी है.

निर्माताओं की ओर से एक साझा बयान में कहा गया, "हाल में संक्रमण के मामले बढ़ने के चलते 127 लक्षणों वाले केस दर्ज किए गए. परिणामस्वरूप कोरोना के हल्के, मॉडरेट और गंभीर मामलों में वैक्सीन का प्रभाव 78 प्रतिशत दर्ज किया गया है. कोविड के गंभीर मामलों में वैक्सीन 100 फीसदी प्रभावी है, इसकी वजह से मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में कमी देखी गई है. बिना लक्षणों वाले मामलों में वैक्सीन का प्रभाव 70 फीसदी है और कोवैक्सीन लगवाने मरीजों में संक्रमण कम होने की पुष्टि भी हुई है."

कोवैक्सीन का अंतिम विश्लेषण जून में

कोवैक्सीन के निर्माताओं ने कहा है कि वैक्सीन के प्रभाव और सुरक्षा से संबंधी अंतिम विश्लेषण जून में उपलब्ध होगा. अंतिम रिपोर्ट को पीयर रिव्यू पब्लिकेशन के लिए जारी किया जाएगा. आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल और हेल्थ रिसर्च विभाग के सचिव बलराम भार्गव ने कहा, "आईसीएमआर और भारत बायोटेक के वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत रंग लाई है और हम एक उच्च गुणवत्ता वाली और प्रभावों वाली वैश्विक वैक्सीन विकसित करने में कामयाब रहे हैं. मुझे खुशी है कि कोवैक्सीन कोरोना वायरस के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ बेहद प्रभावी है. नए अध्ययन के आंकड़े वैश्विक स्तर पर वैक्सीन के मामले में हमारी स्थिति को और मजबूत करते हैं."
25,800 उम्मीदवारों पर परीक्षण

भारत में रिसर्च और अनुसंधान के जरिए बनाई गई कोवैक्सीन को ग्लोबल इनोवेटर वैक्सीन बताते हुए भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा एल्ला ने कहा कि कोवैक्सीन, कोरोना वायरस के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी है और ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल में इसके सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है. वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी भी मिली हुई है. कोवैक्सीन के फेज 3 ट्रायल में 25,800 उम्मीदवारों को शामिल किया गया था, जिनकी आयु सीमा 18 से 98 वर्ष थी. इनमें 60 साल से ऊपर के लोगों की संख्या 10 प्रतिशत थी.

सार्स-सीओवी-2 पर कितना असरदायक



इससे पहले आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने कहा था कि ‘कोवैक्सीन’, सार्स-सीओवी-2 के कई प्रकारों को निष्प्रभावी करती है और दो बार अपना म्यूटेशन कर चुके वायरस के प्रकार के खिलाफ भी प्रभावी है. आईसीएमआर ने ट्वीट किया, “आईसीएमआर का अध्ययन दिखाता है कि कोवैक्सीन सार्स-सीओवी-2 के विभिन्न प्रकारों को निष्प्रभावी करता है और दो बार परिवर्तित किस्मों के खिलाफ भी प्रभावी रूप से काम करता है.”

ब्रिटेन, ब्राजील में मिले स्ट्रेन भी बेअसर

आईसीएमआर की राष्ट्रीय जीवाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने सार्स-सीओवी-2 वायरस के विभिन्न प्रकारों: बी.1.1.7 (ब्रिटेन में मिला प्रकार), बी.1.1.28 (ब्राजील का प्रकार) और बी.1.351 (दक्षिण अफ्रीका का प्रकार) को सफलतापूर्वक अलग किया और संवर्धित किया. स्वास्थ्य अनुसंधान के शीर्ष निकाय ने कहा कि आईसीएमआर-एनआईवी ने ब्रिटेन के प्रकार और ब्राजील के प्रकार को बेअसर करने की कोवैक्सीन के सामर्थ्य को प्रदर्शित किया.



आईसीएमआर ने कहा कि संस्थान दो बार उत्परिवर्तन कर चुके बी.1.617 सार्स-सीओवी-2 प्रकार को भी संवर्धित करने में कामयाब रहा है. वायरस का यह प्रकार भारत के कुछ क्षेत्रों और कई अन्य देशों में पाया गया है. कोवैक्सीन वायरस के इस प्रकार को भी निष्प्रभावी करने में सफल रही है.
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