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हाईकोर्ट का आदेश- डोर-टू-डोर वैक्सीन अभियान पर हलफनामा दाखिल करे BMC

महाराष्ट्र में एक अगस्त से डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की गई है.

महाराष्ट्र में एक अगस्त से डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की गई है.

Door to Door Vaccination: याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया, "जो लोग 15-20 साल से बिस्तर पर पड़े हैं, उनके पास कोई सरकारी पहचान पत्र नहीं है और इसलिए उन्हें इस पहल का लाभ नहीं मिल रहा है, हालांकि वे सबसे ज्यादा कमजोर हैं."

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    मुंबई. पूरे महाराष्ट्र में 1 अगस्त से डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन (Corona Vaccination Drive) अभियान शुरू हो गया है. इसी बीच बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने गुरुवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को बिस्तर पर पड़े लोगों के लिए घर-घर टीकाकरण अभियान के मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है. हाईकोर्ट ने बीएमसी को इसके लिए बुधवार (11 अगस्त) तक का वक्त दिया है. बता दें कि वकील ध्रुति कपाड़िया द्वारा दायर एक याचिका में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुंबई में डोर-टू-डोर वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की गई थी. याचिकाकर्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ को बताया कि कुछ गंभीर मुद्दे हैं जिन्हें डोर टू डोर टीकाकरण अभियान के सुचारू संचालन और बिना किसी परेशानी के सभी जरूरतमंद लोगों तक जल्द से जल्द से पहुंचाने की आवश्यकता है.

    याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया, “जो लोग 15-20 साल से बिस्तर पर पड़े हैं, उनके पास कोई सरकारी पहचान पत्र नहीं है और इसलिए उन्हें इस पहल का लाभ नहीं मिल रहा है, हालांकि वे सबसे ज्यादा कमजोर हैं.” उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय डॉक्टर बिस्तर पर पड़े लोगों को पूर्व चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र देने के लिए या तो तैयार नहीं है या फिर संकोच कर रहे हैं, जो कि बीएमसी नीति के अनुसार अनिवार्य है और इससे अभियान भी प्रभावित हो रहा है.

    याचिकाकर्ता ने कहा, “बीएमसी ने अपने घर-घर टीकाकरण के लिए एनजीओ को लगाया है और इस डोर टू डोर टीकाकरण अभियान के लिए बीएमसी और एनजीओ की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर कोई स्पष्टता नहीं है.”

    4466 लाभार्थियों के परिजनों ने किया है आवेदन
    जानकारी के लिए बता दें कि डोर टू डोर वैक्सीनेशन के लिए 4466 लाभार्थियों के परिजन ने बीएमसी के पास आवेदन किया है. मुंबई में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो कोरोना की वैक्सीन के लिए वैक्सीनेशन सेंटर पर जाने में अक्षम हैं. चलने फिरने में असमर्थ और शारीरिक रूप से कमजोर होने के नाते बेड पर ही पड़े रहने वालों को भी वैक्सीन का लाभ मिल सके, इसके लिए बीएमसी ने एक रूप रेखा तैयार भी की है.

    विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशानुसार इन लाभार्थियों को को-वैक्सीन दी जाएगी. सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार कम से कम 6 महीने से बिस्तर पर होने का चिकित्सा प्रमाण पत्र परिजन को वैक्सीनेशन से पहले दिखाना अनिवार्य होगा. विशेषज्ञों की टीम की अगुआई में लाभार्थियों का टीकाकरण किया जाएगा.

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