कोविड-19 अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बन सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर आरोपी अगली तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो आरोपी की अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी जाएगी. 
 (Supreme Court)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर आरोपी अगली तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो आरोपी की अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी जाएगी. (Supreme Court)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज़मानत के दौरान की गई इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणियों पर दूसरे न्यायालय ज़मानत के दौरान विचार नहीं करेंगे, वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करेंगे.

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नई दिल्ली. इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कोविड की आशंका को अग्रिम जमानत देने का वैध आधार बताने वाले फैसले को चुनौती देने के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले में नोटिस जारी कर रहा है, इसके साथ ही फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से अग्रिम जमानत पर रोक नहीं लगाई गई है. सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि आरोपी के खिलाफ 133 केस दर्ज हैं और हाईकोर्ट ने सिर्फ कोरोना के आधार पर अग्रिम ज़मानत दे दी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आरोपी 133 मामलों में से 132 मामलों में बेल पर है? सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा आपको 133वें मामले में मिली अग्रिम ज़मानत मिलने पर आपत्ति है, हम समझ रहे हैं आपको कोर्ट की टिप्पणियों पर आपत्ति है.

पीठ ने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि अदालत द्वारा जारी किये गये व्यापक निर्देश से आप परेशान हैं. हम इस मामले में नोटिस जारी करेंगे.’’ न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, ‘‘व्यापक निर्देश जारी किये गये हैं और हम उन पर रोक का निर्देश देते हैं. अदालतें अन्य मामलों में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने के लिए इन निर्देशों पर विचार नहीं करेंगी और वे हर मामले के गुण-दोष पर गौर करेंगी.’’ उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट ने अग्रिम ज़मानत देते हुए मैरिट पर ध्यान नहीं दिया.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज़मानत के दौरान की गई इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणियों पर दूसरे न्यायालय ज़मानत के दौरान विचार नहीं करेंगे, वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करेंगे.

जुलाई में होगी आगे की सुनवाई

शीर्ष अदालत ने जैन से जवाब मांगा और कहा कि यदि वह सुनवाई की अगली तारीख पर पेश नहीं होते हैं तो वह उनकी जमानत रद्द करने पर विचार कर सकती है.



मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले सप्ताह में होगी.


शीर्ष अदालत 18 मई को राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के लिए राजी हो गयी थी.

उच्च न्यायालय ने 10 मई को कहा था, ‘‘ यदि कोई आरोपी नियंत्रण से परे किन्हीं कारणों से मर जाता है जबकि उसे अदालत मौत से बचा सकती थी, तो ऐसे में उसे अग्रिम जमानत से इनकार करना व्यर्थ कवायद होगी. इसलिए कोरोना वायरस की इस वर्तमान महामारी जैसे कारणों से मौत की आशंका निश्चित ही आरोपी को अग्रिम जमानत देने का आधार हो सकती है.’’

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