Coronavirus: बच्चों में कोविड-19-क्या होते हैं लक्षण, क्या किया जाए

भारत में वैक्सीन की कमी के बीच भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल को हरी झंडी मिल गई है जिसमें 2-12 साल के बच्चों के टीकाकरण की बात कही गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

भारत में वैक्सीन की कमी के बीच भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल को हरी झंडी मिल गई है जिसमें 2-12 साल के बच्चों के टीकाकरण की बात कही गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

Coronavirus: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कई तरीके और दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया है कि किस तरह समझा जाए कि बच्चे में कोविड के लक्षण हैं या नहीं और उनके हालात को काबू में कैसे किया जाए.

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नई दिल्ली. एक तरफ जहां वयस्क और बुजुर्गों में कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) के लिए होड़ मची हुई है, वहीं फिलहाल एक वर्ग ऐसा भी है जिसके लिए वैक्सीन लगने पर बात होना भी शुरू नहीं हुई है, वो हैं बच्चे. दूसरी लहर के कहर के बीच बताया जा रहा है कि अगर तीसरी लहर आती है तो बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा खतरा है.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कई तरीके और दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया है कि किस तरह समझा जाए कि बच्चे में कोविड के लक्षण हैं या नहीं और उनके हालात को काबू में कैसे किया जाए. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने ट्वीट में कहा कि कोविड से संक्रमित ज्यादातर बच्चे या तो लक्षणहीन होंगे या उनमें हल्के लक्षण होंगे.

लक्षणहीन होना क्या है?

लक्षणहीन या Asymptomatic का मतलब है जब व्यक्ति को कोविड 19 है लेकिन उसमें बीमारी के लक्षण नहीं हैं. यह हालत 14 दिन तक बनी रह सकती है जिसकी वजह से मामला ज्यादा बिगड़ सकता है क्योंकि लक्षणहीन व्यक्ति से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा रहता है. इसी तरह ऐसा भी होता है कि टेस्ट पॉज़िटिव आने के बावजूद पहले पहल लक्षण नहीं पाए जाते जिसके बाद बुखार, कफ और सांस लेने में दिक्कत पेश आती है.
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि बुखार, कफ, सांस में कमी, थकावट, जोड़ों में दर्द, गले में दर्द, नाक से ज्यादा बलग़म निकलना, स्वाद और गंध का जाना – कुछ लक्षण हैं जो बच्चों में पाए जाते हैं. वहीं कुछ बच्चों में पाचनतंत्र की समस्या भी पाई जाती है. वहीं एक नया लक्षण भी देखा जा रहा है जिसमें शरीर के अलग-अलग अंगों में जलन की शिकायत पाई जाती है. ऐसे में लगातार बुखार बना रहता है.

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लक्षणहीन कोविड 19 से पीड़ित बच्चों की देखरेख

ऐसे बच्चों को घर पर ही संभाला जा सकता है. अगर परिवार के सदस्य कोविड पॉज़िटिव हैं तो स्क्रीनिंग के जरिए इन बच्चों की पहचान की जा सकती है. आगे के लक्षणों और इलाज के लिए इन पर लगातार निगरानी जरूरी है. वहीं बुखार, सांस की परेशानी, खराब गले से जूझ रहे बच्चों को जांच की जरूरत नहीं है और ऐसे बच्चों को घर में ही अलग कमरे में रखकर इलाज दिया जा सकता है. मंत्रालय ने कहा है कि अगर बच्चे दिल या फेफड़ों से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी से पहले से ही जूझ रहे हैं तब भी बेहतर होगा कि घर पर ही उनका इलाज किया जाए.


बच्चों का टीकाकरण

भारत में वैक्सीन की कमी के बीच भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल को हरी झंडी मिल गई है जिसमें 2-12 साल के बच्चों के टीकाकरण की बात कही गई है. बताया जा रहा है कि बच्चों की वैक्सीन जल्द ही बाज़ार में उपलब्ध होगी. इस ट्रायल में 18 साल के कम के 525 सेहतमंद स्वयंसेवी शामिल होंगे. इसके अलावा अमेरिका में ज़ायडस कैडिला की ZyCoV-D को 12 साल से कम के बच्चों पर टेस्ट किया गया है, वहीं अमेरिका में फाइज़र की वैक्सीन को बच्चों के लिए पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है.

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