Covid-19 Update: इस राज्य में लोग वैक्सीन तक नहीं, वैक्सीन खुद लोगों तक पहुंच रही है

कश्मीर में कोरोना का टीका लेकर स्वास्थ्यकर्मी गांवों तक जा रहे हैं.

कश्मीर में कोरोना का टीका लेकर स्वास्थ्यकर्मी गांवों तक जा रहे हैं.

कोरोना वैक्सीनेशन अभियान में सबसे ज्यादा दिक्कत पहाड़ी राज्यों में आ रही है. जहां वैक्सीनेशन के रजिस्ट्रेशन के लिए इंटरनेट की उचित व्यवस्था नहीं है. ऐसे में स्वास्थकर्मी खुद उन गांवों तक पहुंचकर लोगों का वैक्सीनेशन कर रहे हैं. उनका कहना है कि टीका हर किसी तक पहुंचना ज़रूरी है.

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बारामूला. देश के तमाम राज्यों में कोरोना के टीके कम पड़ रहे हैं. वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां टीका तो है लेकिन इंटरनेट कनेक्शन खराब होने की वजह से लोग उनकी बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में टीकाकरण करने वाली टीमें खुद इन इलाकों तक जा रहे हैं और लोगों का वैक्सीनेशन कर रही हैं. उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले की बोनियार तहसील के पहाड़ी गांवों में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई पूरे जोर-शोर से जारी है. चिकित्सा अधिकारियों की अगुवाई में मेडिकल टीम भारत-पाकिस्तान की सीमा पर कैंप लगाकर टीकाकरण की मुहिम चला रही है. खराब इंटरनेट कनेक्शन के चलते वैक्सीन के लिए ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही, ऐसे में स्वास्थ्यकर्मी रोज़ इन पहाड़ी इलाकों पर जाकर 45 साल से ऊपर के लोगों का टीकाकरण कर रहे हैं.

बोनियार ब्लॉक मेडिकल अधिकारी डॉ परवेज़ मसूदी ने न्यूज़ 18 को बताया कि -' एक तरह से यह विपरीत प्रक्रिया है. वो हमें ढूंढे, इसकी जगह हम उन्हें ढूंढ रहे हैं. लेकिन ठीक है, क्योंकि सबसे जरूरी है लोगों को टीका लगना. हर सुबह 4 पुरुष और महिला की टीम, सफेद कोट और मेडिकल किट लिए बोनियार स्वास्थ्य केंद्र की पुरानी इमारत के बाहर जमा होते हैं. हिमालय से सटे गांवों और पीछे दिखती उरी सीमा के बीच ये लोग अपने काम पर निकल पड़ते हैं.

3 महीने से चल रहा है टीकाकरण

पिछले 3 महीनों में यहां के मेडिकल स्टाफ की यही दिनचर्या बन चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि 45 से ऊपर की उम्र के 15 हज़ार लोगों में से 98 फीसदी को उनका पहला डोज़ दिया जा चुका है. बाकी लोगों को इस हफ्ते तक टीका लग जाएगा. लगभग सभी हेल्थ केयर और फ्रंटलाइन वर्कर, पुलिस और पैरामिलिट्री के सैनिकों का पूरी तरह से टीकाकरण किया जा चुका है.

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टीके की सप्लाई बढ़ेगी, तो बढ़ेंगे कैंप भी 



बोनियार अस्पताल में नई सप्लाई आने के बाद डॉ. मसूदी और उनकी टीम ने मंगलवार से 18+ को टीका लगाना शुरू कर दिया है. टीम ने बोनियार के मुख्य बाज़ार में टेंट लगाया है और यहां लोगों से टीका लगाने को लेकर अपील की जा रही है. जैसे ही सप्लाई बढ़ती है, इस तरह के और कैंप लगाए जाएंगे. डॉ मसूदी ने बताया कि उन्हें अभी तक 18+ समूह के लिए कोविशील्ड के 1000 डोज़ मिले हैं. वे ये भी बताते हैं कि पहले उनकी टीम को 18-44 समूह के उन लोगों पर ध्यान देना है जो पहले से बीमार हों, दुकानदार, ट्रांसपोर्टर, पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले, न्यायिक अधिकारी, और पत्रकार हों. इस इलाके में 18+ समूह की आबादी करीब 26000 है.

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लोगों ने उत्साह नहीं दिखाया लेकिन नहीं मानी हार 

जनवरी में जब टीकाकरण शुरू हुआ तो लोग लगवाना नहीं चाहते थे, उस दौरान लोगों के जागने का इंतज़ार करने के बजाय, हमने सोचा कि खुद ही लोगों के पास जाएं. हम लोगों के दरवाजों पर गए, उनकी उम्र की जानकारी ली, उनका काम और बीमारी के बारे में पूछा. इस इलाके के गांव बहुत ऊंची पहाड़ी पर बसे हैं. इनमें से बरनेट जैसे गांव तो मानो नोंक पर ही हैं. जो तेज़ हवा से कभी भी गिर जाएं. ग्रामीणों का कहना है कि इंटरनेट क्या, यहां लोगों के पास बिजली तक नहीं है. लोगों के पढ़े लिखे न होने की वजह से इस काम में सामाजिक कार्यकर्ता, इमाम और प्रभावशाली लोगों की मदद ली जा रही है. डॉ मसूदी खासतौर पर अपने एम्बुलेंस ड्राइवर मोहम्मद सलीम खान का जिक्र करते हैं जो कोविड मरीजों को बारामुला या श्रीनगर ले जाने से पहले एक बार भी संकोच नहीं करते. स्वास्थ्य विभाग में 17 साल काम करने के बाद 7 हज़ार रुपये का वेतन लेने वाले खान, इस मुश्किल वक्त में भी हार मानते नहीं दिख रहे और कहते हैं –'महामारी के बाद से मैंने एक भी छुट्टी नहीं ली. हम कम वक्त में सबका टीकाकरण करेंगे.'

महामारी के बाद से बोनियार में 670 मरीज संक्रमित हुए हैं. 23 की मृत्यु और 580 ठीक हुए हैं. इलाके में 67 सक्रिय मामले हैं. दूसरी लहर में अब तक चार मौत हो चुकी है. कई लोग जो संक्रमित हैं, उन्हें बोनियार अस्पताल स्टाफ की निगरानी में घर पर ही अलग कर दिया गया है.

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