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कोरोनाः संक्रमण से ठीक होने के बाद भी घातक हो रहा डेड वायरस, बढ़ रही मरीजों की संख्या

अगर शरीर में लक्षण पनपता रहता तो इसका मतलब है कि वायरस जिंदा है. अगर ऐसा नहीं होता है तो शरीर में मौजूद वायरस मरा हुआ होता है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

अगर शरीर में लक्षण पनपता रहता तो इसका मतलब है कि वायरस जिंदा है. अगर ऐसा नहीं होता है तो शरीर में मौजूद वायरस मरा हुआ होता है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Covid-19 dead virus: कोरोना से ठीक होने के बाद आंतों में अल्सर, लगातार दस्त, लीवर से जुड़ी परेशानियां, अग्नाशय में समस्या और पेट संबंधी अन्य बीमारियां पाई गई हैं.

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    नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण (Coronavirus) से ठीक होने के बाद भी लोगों को सांस लेने, थकान और हृदय संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. ऐसे कई मरीज भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें वायरस के प्रभाव के कारण पेट, आंत और लीवर में गंभीर समस्याएं हो रही हैं. इनमें से कुछ की कोरोना रिपोर्ट एक महीने बाद भी पॉजिटिव आई है. डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में मौजूद डेड वायरस (Dead Virus) के कारण ऐसा हो रहा है. अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक द्वारका के आकाश अस्पताल में पिछले तीन सप्ताह से ऐसे 20 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिन्हें कोरोना से ठीक होने के बाद आंतों में अल्सर, लगातार दस्त, लीवर से जुड़ी परेशानियां, अग्नाशय (पेट में पायी जाने वाली पाचन तंत्र की प्रमुख ग्रंथि) में समस्या और पेट संबंधी अन्य बीमारियां पाई गई हैं. इन मरीजों में छोटे बच्चे भी शामिल हैं.

    आकाश अस्पताल के गेस्ट्रोलॉजी विभाग के डॉक्टर शरद मल्होत्रा ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लीवर और आंतों की समस्या वाले कई मरीज इलाज के लिए आए हैं. सभी मरीज कोरोना संक्रमण के शिकार हुए थे. इससे पता चलता है कि कोरोना फेफड़ों और हृदय के अलावा अन्य अंगों को भी काफी प्रभावित कर रहा है. उन्होंने कहा कि जो मरीज भर्ती हुए हैं. डॉक्टर शरद के मुताबिक कोरोना से ठीक होने के बाद अगर शरीर के किसी अंग में परेशानी हो रही है तो उसे हल्के में ना लें, क्योंकि वायरस सभी अंगों को प्रभावित कर रहा है. अगर कोई परेशानी महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टरों से सलाह लें.

    ठीक होने पर भी पॉजिटिव रिपोर्ट क्यों?
    एम्स के पूर्व डॉक्टर प्रवीण कुमार बताते हैं कि जब किसी रोगी कि आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है और उसके शरीर में कोई लक्षण नहीं होते हैं तो उसे छुट्टी दे दी जाती है, लेकिन कई बार मरीज के ठीक होने पर भी रिपोर्ट निगेटिव नहीं आती और मरीज अस्पताल में भर्ती रहते हैं. उन्होंने कहा कि टेस्ट निगेटिव नहीं आने का एक कारण यह भी हो सकता है कि गले की जिन पेशियों में विषाणु रहता है, उन पेशियों की जिंदगी तीन महीनों की होती है. वायरस मरने के बाद भी इन पेशियों में पड़ा रहता है. मरे हुए वायरस के शरीर में रह जाने से भी टेस्ट पॉजिटिव आता है.

    कैसे पता चलता है कि शरीर में वायरस जिंदा है या नहीं?
    डॉक्टरों के मुताबिक ठीक हुए मरीज में अगर तीन दिन तक कोई लक्षण नहीं दिखता है तो उसके गले से सैंपल लेकर जांच होती है. अगर शरीर में लक्षण पनपता रहता तो इसका मतलब है कि वायरस जिंदा है. अगर ऐसा नहीं होता है तो शरीर में मौजूद वायरस मरा हुआ होता है.

    ऐसी स्थिति में भले ही मरीज कि रिपोर्ट पॉजिटिव आए लेकिन उससे संक्रमण किसी अन्य व्यक्ति में नहीं फैलता है.

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