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कोविड : बुजुर्गों ने सामाजिक और मनोवैज्ञानिक मुद्दों को माना ज्यादा महत्वपूर्ण

सर्वे से पता चला है कि कोरोना के बढ़ते मामलों से लोग काफी तनाव महसूस कर रहे हैं.

सर्वे से पता चला है कि कोरोना के बढ़ते मामलों से लोग काफी तनाव महसूस कर रहे हैं.

21.7 प्रतिशत बुजुर्गों ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान वित्तीय समस्याएं अधिक महत्वपूर्ण थीं. सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक 42 प्रतिशत से ज्यादा बुजुर्गों ने अकेलेपन को प्रमुक मनोवैज्ञानिक मुद्दा माना.

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    नयी दिल्ली. दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हुए एक सर्वेक्षण में लगभग 29 प्रतिशत बुजुर्ग लोगों ने कहा कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण थे जबकि उनमें से 24.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक अवस्था अधिक महत्वपूर्ण थी. गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘एजवेल फाउंडेशन’ ने बताया कि उसने दिल्ली-एनसीआर में बुजुर्गों के बीच एक सर्वेक्षण कराया जिसका लक्ष्य उनकी वर्तमान दशा की समीक्षा करना और कोविड-19 का उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करना था.

    संगठन ने कहा कि इस सर्वेक्षण में एजवेल के स्वयंसेवकों ने जुलाई में 1,500 बुजुर्गों से बातचीत की. उनमें से 28.9 प्रतिशत लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को सबसे महत्वपूर्ण बताया जबकि 24.2 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें मनोवैज्ञानिक और सामाजिक मुद्दे ज्यादा अहम लगे.

    इसके साथ ही 21.7 प्रतिशत बुजुर्गों ने कहा कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान वित्तीय समस्याएं अधिक महत्वपूर्ण थीं. सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक 42 प्रतिशत से ज्यादा बुजुर्गों ने अकेलेपन को प्रमुक मनोवैज्ञानिक मुद्दा माना.

    तनाव में है ज्यादातर भारतीय
    पिछले दिनों सामने आई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि अधिकांश भारतीय देश में मामलों की स्थिति को लेकर चिंतित, उदास और गुस्से में हैं. सर्वे से पता चला है कि कोरोना के बढ़ते मामलों से लोग काफी तनाव महसूस कर रहे हैं. यहां तक कि लॉकडाउन की वजह से घर में रहने से मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है.

    सिटीजन इंगेजमेंट प्लेटफार्म लोकल सर्किल्स द्वारा किए गए इस सर्वे से पता चला कि 61 फीसदी भारतीय मानसिक रूप से तनाव महसूस कर रहे हैं. यहां तक कि गुस्सा आना, नींद ना आना, चिंतित रहना जैसी कई बीमारियां भी हो रही हैं. जब लोगों से कोरोना के बढ़ते मामलों से जुड़े सवाल पूछे गए तो उन्होंने बताया कि इस समय स्थिति बहुत नाजुक है. कोरोना के बढ़ते केस और मौतों से कई लोग डिप्रेशन के शिकार भी बन रहे हैं.

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