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    कोरोना वायरस : इलाज से जुड़ी 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' दवा की बिक्री पर सरकार का नियंत्रण

    गीलिड के भारत में तीन पेटेंट हैं. यह पेटेंट भारत के पास 2009 से ही हैं. जब से इबोला के इलाज के लिए रेमडेसिवीर दवा का निर्माण शुरू हुआ था. कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में रेमडेसिवीर एकमात्र ऐसी दवा है जिसे दुनिया के कई देशों ने मंजूरी दी है. कंपनी गीलिड की ओर से कहा गया है कि दवाइयों की पहुंच को बढ़ाने के लिए कंपनी द्वारा भारत और पाकिस्तान में स्थित 5 जेनेरिक दवा निर्माताओं के साथ गैर-विशिष्ट लाइसेंसिंग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. गीलिड की ओर से यह भी कहा गया है कि इससे कंपनी को विश्व के 127 देशों के लिए रेमडेसिवीर बनाने और उन्हें बेचने की इजाजत मिलेगी.
    गीलिड के भारत में तीन पेटेंट हैं. यह पेटेंट भारत के पास 2009 से ही हैं. जब से इबोला के इलाज के लिए रेमडेसिवीर दवा का निर्माण शुरू हुआ था. कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में रेमडेसिवीर एकमात्र ऐसी दवा है जिसे दुनिया के कई देशों ने मंजूरी दी है. कंपनी गीलिड की ओर से कहा गया है कि दवाइयों की पहुंच को बढ़ाने के लिए कंपनी द्वारा भारत और पाकिस्तान में स्थित 5 जेनेरिक दवा निर्माताओं के साथ गैर-विशिष्ट लाइसेंसिंग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. गीलिड की ओर से यह भी कहा गया है कि इससे कंपनी को विश्व के 127 देशों के लिए रेमडेसिवीर बनाने और उन्हें बेचने की इजाजत मिलेगी.

    COVID-19: मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' की बिक्री और वितरण पर कानूनी नियंत्रण गुरुवार को अधिसूचना जारी होने के साथ ही लागू हो गया है.

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    नई दिल्ली. सरकार ने कोरोना के इलाज एवं बचाव में काम आने वाली दवा 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' की  जरूरत को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति में इसकी आपूर्ति को बहाल रखने के लिए इसकी बिक्री और वितरण को कानूनी नियंत्रण में लेकर सीमित कर दिया है.

    'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' को कानूनी नियंत्रण में करना जरूरी
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी अधिसूचना में 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' को कोरोना के इलाज एवं बचाव में अनिवार्य जरूरत मानते हुए कहा गया है कि किसी भी प्रकार की संभावित आपात स्थिति को देखते हुए इसकी बिक्री और वितरण को कानून द्वारा नियंत्रित करना जरूरी हो गया है.

    इसका मकसद दवा की बिक्री और दुरुपयोग रोकना: मंत्रालय
    मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' की बिक्री और वितरण पर कानूनी नियंत्रण गुरुवार को अधिसूचना जारी होने के साथ ही लागू हो गया है. अधिसूचना के अनुसार 'केंद्र सरकार का यह समाधान हो गया है कि 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' औषधि महामारी कोविड-19 के कारण उत्पन्न होने वाली आपातकालीन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक है.' अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि लोकहित में 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' और इससे बनने वाले अन्य औषधीय उत्पादों के विक्रय एवं वितरण को नियंत्रित करने के लिए 'खुदरा बिक्री औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम 1945' के तहत निर्दिष्ट शर्तों के दायरे में लाया गया है. इसका मकसद इस दवा की बिक्री एवं वितरण संबंधी दुरुपयोग को रोकना है.



    उल्लेखनीय है कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोरोना के संदिग्ध एवं संक्रमित मरीजों के इलाज में लगे चिकित्साकर्मियों के लिए भी ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ दवा के इस्तेमाल को बचाव के लिए जरूरी बताया है. सरकार ने आपात स्थिति में इस दवा की आपूर्ति को बरकरार रखने के लिए आईसीएमआर द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत भारत के औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) की अनुशंसा पर इस दवा के वितरण और बिक्री को नियंत्रित करने का फैसला किया है.

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