कोविड 19: दुनिया के 700 करोड़ लोगों तक वैक्सीन पहुंचाना बड़ी चुनौती

कोविड 19: दुनिया के 700 करोड़ लोगों तक वैक्सीन पहुंचाना बड़ी चुनौती
.कोरोना की वैक्सीन मिल जाने के बाद दुनिया के सामने 7 अरब लोगों के वैक्सिनेशन की चुनौती भी होगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनियाभर में वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) पहुंचाना भी बहुत बड़ी चुनौती है. इंटरनेशल वैक्सीन अलायंस Gavi के सीईओ सेथ बर्कले का कहना है कि सबसे बड़ा चैलेंज तथाकथित वैक्सीन राष्ट्रवाद (Vaccine Nationalism) है. इस वक्त देशों को वैश्विक रूप से सोचने की आवश्यकता है क्योंकि यही सबसे बड़ी मांग है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 6:16 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. रूस (Russia) दुनिया का पहला मुल्क है जिसने कोरोना वायरस की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) बनाने का दावा किया है. वैक्सीन बनाने के साथ रूस की तरफ से दावा किया गया कि दुनिया के 20 देशों ने उसकी वैक्सीन में दिलचस्पी दिखाई है. हालांकि रूस की वैक्सीन को लेकर कई सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं. रूस से इतर बात करें तो इस वक्त ब्रिटेन और अमेरिका के एक-एक वैक्सीन प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिनपर दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं. लेकिन यह सवाल भी उठ रहे हैं कि अगर वैक्सीन तलाश भी ली गई तो तो दुनियाभर के 700 करोड़ लोगों तक इसे पहुंचाना कितना कठिन काम होगा?

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
एक्सपर्ट्स का मानना है कि दुनियाभर में वैक्सीन पहुंचाना भी बहुत बड़ी चुनौती है. इंटरनेशल वैक्सीन अलायंस Gavi के सीईओ सेथ बर्कले का कहना है कि इस वक्त सबसे बड़ा चैलेंज तथाकथित 'वैक्सीन राष्ट्रवाद' है. बीबीसी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक सेथ बर्कले ने कहा है-इस वक्त देशों को वैश्विक रूप से सोचने की आवश्यकता है क्योंकि यही सबसे बड़ी मांग है. इस वक्त सिर्फ अपने बारे में फिक्र करने की सोच से बाहर आना होगा. जब तक सब सेफ न हो जाएं, तब तक कोई भी सेफ नहीं है.'

किसे दी जाए वैक्सीन?
ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट के हेड डॉ. चार्ली वेलर का कहना है कि देशों के सामने यह भी चुनौती होगी कि किसे सबसे पहले वैक्सीन का डोज दिया जाए. इसके लिए हाई रिस्क ग्रुप को सबसे पहले ध्यान में रखा जा सकता है. रूस में वैक्सीन बनाने के साथ ही कहा गया है कि सबसे पहले चिकित्साकर्मियों और बुजुर्गों को इसका डोज दिया जा सकता है. दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर वैक्सीन का प्रोडक्शन भी एक चुनौती होगी.



भारत की कंपनी के पास 100 करोड़ वैक्सीन बनाने का प्रोजेक्ट
पुणे की सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने पहले ही ऑक्सफोर्ड के प्रोजेक्ट के साथ कौलैबरेशन कर रखा है. अगर ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कामयाब हो जाती है तो भारत में इसकी उपलब्धता में कोई दिक्कत नहीं आने वाली है. इस कंपनी ने AstraZeneca नाम की उस कंपनी के साथ टाई-अप कर रखा है जो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार कर रही है. ऑक्सफोर्ड का प्रोजेक्ट सफल होने के साथ सीरम इंस्टिट्यट ऑफ इंडिया वैक्सीन 100 करोड़ डोज तैयार करेगी. इनमें से 50 प्रतिशत हिस्सा भारत के लिए होगा और 50 प्रतिशत गरीब और मध्यम आय वाले देशों के लिए.

वैश्विक रूप से एक होकर करना होगा काम
सीरम इंस्टिट्यूट की तरह ही दुनिया के अन्य देशों में वैक्सीन निर्माण के बाद इसे पहुंचाने के लिए बड़ी फार्मा कंपनियों की मदद की आवश्यकता होगी. इतनी बड़ी संख्या में लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए देशों को ग्लोबली सोचना होगा. हालांकि बीते महीने के दौरान जिस तरीके से वैक्सीन की तलाश तेज हुई है, ये दौड़ प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज