Covid-19: देश में चौथे सीरो सर्वे की चल रही है तैयारी, दूसरी लहर के चलते आ सकते हैं हैरान कर देने वाले आंकड़े

पंजाब के एक गांव में लोगों की कोरोना जांच करते स्वास्थ्यकर्मी.

पंजाब के एक गांव में लोगों की कोरोना जांच करते स्वास्थ्यकर्मी.

Sero Survey: विशेषज्ञों का कहना है कि सीरो सर्वेक्षण बीमारी की व्यापकता को जानने और बचाव का तरीका है. सीरो सर्वेक्षण सरकार को यह तय करने में मदद कर सकता है कि कब प्रतिबंधों में ढील दी जाए.

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नई दिल्ली. देशभर में अब कोरोना की दूसरी लहर थमती नज़र आ रही है. इस बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) पूरे देश में चौथे सीरो सर्वे (Sero Survey) की तैयारी कर रही है. सर्वे से ये पता लगाया जाएगा कि अब तक देश की कितनी आबादी कोरोना से संक्रमित हुई है. देशभर में अब तक 3 सीरो सर्वे हो चुके हैं. आमतौर पर ऐसे सर्वे से सरकार को कोरोना के संक्रमण के रोकथाम में मदद मिलती है.

इस बार का सीरो सर्वे पिछली बार के मुकाबले कुछ अलग होगा. इस बार छह साल के बच्चे से भी सैंपल लिया जाएगा. कोरोना की तीसरी लहर,बच्चों पर असर और ग्रामीण इलाकों में उसके प्रभाव के आकलन के लिए देशभर में इस महीने सीरो सर्वे होगा. करीब महीने भर चलने वाले इस सर्वे को आईसीएमआर लीड करेगा.

- कुल 28 हजार सैंपल लिए जाएंगे

- 14 हजार बच्चे और 14 हजार व्यस्क होंगे
- पहले 10 साल या उससे ऊपर के बच्चों को शामिल किया गया था लेकिन इस बार 6 साल और इसके ऊपर की उम्र के बीच सर्वे के हिस्सा होंगे

- ग्रामीण इलाकों से ज़्यादा सैंपल लेने पर ज़ोर होगा

इस बार का सर्वे अलग



इस बार के सीरो सर्वे के पहले के मुकाबले थोड़ा अलग तरीके से होने की एक वजह है कोरोना वैक्सीनेशन भी है. दरअसल इन दिनों लोगों में वैक्सीन और वायरस के संक्रमण दोनों से एंटीबॉडी बन रही है. बता दें कि सीरो सर्वे में किसी क्षेत्र में रहने वाले कई लोगों के खून के सीरम की जांच की जाती है.

सफदरजंग अस्पताल के एपिडिमियोलॉजिस्ट डॉ जुगल किशोर ने बताया कि नेशनल लेवल की बात करते हैं तो आईसीएमआर ने तीन सीरो सर्वे किए हैं अब तक. सबसे पहला 0.7%. बाद में वो धीरे-धीरे बढ़ता चला गया. सेकंड वेव आई तो हम अनुमान लगाते हैं कि काफी लोगों को इन्फेक्शन हो गया होगा. ये इसलिए भी पता लगाना जरूरी है कि क्या ऐसे लोग भी हैं जिनके अंदर इम्यूनिटी बनी नहीं है.

- पिछले साल मई- जून में किए गए पहले सीरो सर्वे में 0.7%

- अगस्त सितंबर महीने के दूसरे सीरो सर्वे में 7% और

- दिसंबर से इस साल जनवरी में किए गए तीसरे सीरो सर्वे में 21 % से ज्यादा लोगों में एक्सपोजर पाया गया था.

क्या होता है सीरो सर्वे?

इस सर्वे के तहत ब्लड सैंपल लेकर शरीर में एंटीबॉडी की मौजूदगी का पता लगाया जाता है.संक्रामक बीमारियों के संक्रमण की निगरानी के लिए सीरो सर्वे कराया जाता है.इसमें बीमारी के खिलाफ शरीर मे पैदा हुए एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है. सीरो सर्वे में जांचा जाता है कि कितनी आबादी में किसी संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन चुकी है.एंटीबॉडी का मतलब संक्रमण का खतरा कम माना जाता है.


पहले के नतीजे

इस साल फरवरी में तीसरे सीरो सर्वे के नतीजे आए थे. इसमें ये पता चला था कि जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा कोरोना की चपेट में है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने कहा था कि 17 दिसंबर से 8 जनवरी तक किए गए सर्वेक्षण में शामिल हुए कुल लोगों में से 21.5 प्रतिशत में पहले हुए कोविड-19 वायरस के संक्रमण के लक्षण मिले. दिल्ली में सीरो सर्वे में शामिल 56.13 फीसदी लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी मिली हैं थी.

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