वायु प्रदूषण के कारण कोविड-19 से मृत्यु का खतरा बढ़ा, NGT को किया सूचित

अध्ययन का आंकलन है कि पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण पूरी दुनिया में कोविड-19 के कारण मृत्यु में 15 फीसदी का योगदान करता है.

Air pollution: वायु प्रदूषण और कोविड-19 संक्रमण से मौत के खतरे को लेकर हालिया शोध से पता चलता है कि कोविड-19 से मृत्यु के बढ़े खतरे में वायु प्रदूषण एक महत्वपूर्ण कारक है.

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    नई दिल्ली. हालिया अनुसंधान के मुताबिक वायु प्रदूषण (Air Pollution) के कारण कोविड-19 (Covid-19) से होने वाली मृत्यु का खतरा बढ़ गया है. इस बारे में गुरुवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) को सूचित किया गया.वरिष्ठ अधिवक्ता राज पंजवानी और वकील शिबानी घोष ने एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. के. गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण के कारण पूरी दुनिया में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 15 फीसदी है.

    पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़े एक मामले में पंजवानी और घोष को अधिकरण का सहयोग करने के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया गया है. उन्होंने कहा, वायु प्रदूषण और कोविड-19 संक्रमण से मौत के खतरे को लेकर हालिया शोध से पता चलता है कि कोविड-19 से मृत्यु के बढ़े खतरे में वायु प्रदूषण एक महत्वपूर्ण कारक है.

    वायु प्रदूषण से कोविड मृत्यु का आंकड़ा बढ़ सकता है
    उन्होंने कहा, ‘‘अध्ययन में यह भी कहा गया है कि ‘कोविड-19 के प्रसार पर नियंत्रण के लिए वायु प्रदूषण घटाने की खातिर निष्कर्ष को समन्वित महत्वाकांक्षी नीतियां बनाने में ज्यादा प्रेरणा’ देने वाला होना चाहिए. अध्ययन का आंकलन है कि पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण पूरी दुनिया में कोविड-19 के कारण मृत्यु में 15 फीसदी का योगदान करता है.’’



    दोनों वकीलों ने आंद्रे पोजर और अन्य के अध्ययन ‘रिजनल एंड ग्लोबल कंट्रीब्यूशंस ऑफ एयर पॉल्यूशन टू रिस्क ऑफ डेथ फ्रॉम कोविड-19’ का हवाला दिया. उन्होंने सभी तरह के पटाखा की बिक्री पर किसी भी प्राधिकार द्वारा किसी भी तरह का लाइसेंस देने पर रोक लगाने की मांग की. ‘इंडियन फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन’ की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का विरोध किया और कहा कि इस पर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं है और मामला पहले ही उच्चतम न्यायालय में है.


    पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से पेश हुए वकील बालेंदु शेखर ने एनजीटी से कहा कि कोविड-19 के कारण मृत्यु दर में वायु प्रदूषण की भागीदार पर कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं है और इस मुद्दे पर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को पत्र लिखकर उनके विचार मांगे हैं. एनजीटी ने फैसला सुरक्षित रख लिया और कहा कि नौ नवम्बर को इसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा.

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