COVID-19: झुग्गियों से ज्यादा बड़ी बिल्डिंग्स में कोरोना, पहली लहर में बचे लोगों पर भी मार! समझें कारण

Indias urban hit by new Coronavirus wave: 2020 के मध्य में हुए सीरो सर्वे की माने तो मुंबई के स्लम इलाकों में आधी आबादी में एंटी बॉडीज मिले. हो सकता है कि ये एंटीबॉडीज लोगों को दूसरी लहर में सुरक्षा प्रदान कर रहे हों.

Indias urban hit by new Coronavirus wave: 2020 के मध्य में हुए सीरो सर्वे की माने तो मुंबई के स्लम इलाकों में आधी आबादी में एंटी बॉडीज मिले. हो सकता है कि ये एंटीबॉडीज लोगों को दूसरी लहर में सुरक्षा प्रदान कर रहे हों.

Indias urban hit by new Coronavirus wave: 2020 के मध्य में हुए सीरो सर्वे की माने तो मुंबई के स्लम इलाकों में आधी आबादी में एंटी बॉडीज मिले. हो सकता है कि ये एंटीबॉडीज लोगों को दूसरी लहर में सुरक्षा प्रदान कर रहे हों.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:30 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) की मार दूसरी लहर में देश के मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग पर पड़ी है. मुंबई की बिल्डिंगों में 1,70,000 हजार घर सील हैं, तो झुग्गियों में बनाए गए कंटेनमेंट जोन में 1,20,000 घर कैद है. ये वही मिडिल क्लास (Middle Class) है, जो देश की आर्थिक कुव्यवस्था और सामाजिक संकट से अब तक बचा रहा है, लेकिन महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप इस वर्ग पर सबसे ज्यादा है. मुंबई के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर सुरेश काकानी (Suresh Kakani) के मुताबिक ज्यादातर मामले बिल्डिंगों से आ रहे हैं, झुग्गियों से नहीं.

कोरोना की दूसरी लहर में देश का कथित उपभोक्ता वर्ग त्राहि-त्राहि कर रहा है. ऐसे में देश की विकास की रफ्तार पर लगाम लगती दिख रही है, क्योंकि यही वर्ग है कि जो देश की अर्थव्यवस्था में 60 फीसदी की खपत करता है. केंद्रीय बैंक का उपभोक्ता कॉन्फिडेंस सर्वे भी इसी ओर इशारा कर रहा है कि जॉब के मोर्चे पर निराशा का माहौल बन रहा है. दूसरी ओर नीति-निर्माताओं का कहना है कि वे ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं, जहां कि महामारी काल बन गई है.

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मुंबई और पुणे जैसे शहरों की बात करें तो महाराष्ट्र में कुल एक्टिव केस के 30 प्रतिशत मामले इन दोनों शहरों में हैं. महाराष्ट्र की आबादी का 14 प्रतिशत मुंबई और पुणे में रहता है. इस सप्ताह आए 90 प्रतिशत मामले अट्टालिकाओं (ऊंची इमारतों) से जुड़े हैं, जबकि झुग्गियों से सिर्फ 10 प्रतिशत मामले हैं. तुलना के लिए दूसरों शहरों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कहानियां एक जैसी हैं. कोरोना की पहली लहर में मिडिल क्लास क्यों बच गया, तो इसकी पहली वजह ये हो सकती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन की घोषणा करते ही सबने अपने दरवाजे बंद कर लिए और घरों में कैद हो गए. यही वजह है कि दूसरी लहर का प्रकोप उन पर ज्यादा है.
वायरस संक्रमण की पहली लहर को देखें तो यह स्लम इलाकों में तेजी से फैली और निकल गई. 2020 के मध्य में हुए सीरो सर्वे की माने तो मुंबई के स्लम इलाकों में आधी आबादी में एंटी बॉडीज मिले हैं. हो सकता है कि ये एंटीबॉडीज लोगों को दूसरी लहर में सुरक्षा प्रदान कर रहे हों, जबकि पहली लहर में बचे लोगों के लिए यह खतरनाक साबित हो रही है.



संक्रमण को देखते हुए कई सारे देशों ने भारत से फ्लाइट सर्विस को कैंसिल कर दिया है और यात्राओं पर प्रतिबंध लगाया है. कनाडा, सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देशों ने इस तरह के फैसले लिए हैं. अमेरिका, भारत के साथ दूसरी लहर को चर्चा तो कर रहा है, लेकिन अभी तक वैक्सीन देने को लेकर तैयार नहीं हुआ है.
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