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  • COVID 19 INFECTION PETITION IN SUPREME COURT DEMANDING FREE MEDICAL FACILITY VACCINE AND COMPENSATION TO JOURNALISTS

कोरोना में काम करने वाले पत्रकारों को मिले मेडिकल सुविधाएं और मुआवजा, SC में दायर की गई याचिका

सुप्रीम कोर्ट का फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर कोविड-19 संक्रमण के दौरान काम करने वाले मीडिया कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा देने के साथ ही उन्हें फ्री मेडिकल सुविधा और मुआवजा देने की मांग की गई है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के कहर से पिछले साल बड़ी संख्या में फ्रंटलाइन वर्कर जैसे डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मियों को जान गंवानी पड़ी थी. यही वजह रही कि देश में जब वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई तो सबसे पहले इन्हें ही प्राथमिकता दी गई. इसका अच्छा असर भी हुआ. कोरोना की दूसरी लहर में जान गंवाने वालों में इन फ्रंटलाइन वर्कर्स की संख्या अपेक्षाकृत कम रही. हालांकि मीडियाकर्मी इतने भाग्यशाली नहीं रहे.

वहीं सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर कोविड-19 संक्रमण के दौरान काम करने वाले मीडिया कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा देने के साथ ही उन्हें फ्री मेडिकल सुविधा और मुआवजा देने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर यह मांग की गई है कि कोविड-19 संक्रमण के दौरान कई ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर अस्पतालों और सरकार की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहे हैं, ऐसे में उनको केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सुविधा दी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट में यह अर्जी डॉक्टर कोटा नीलमा के द्वारा दाखिल की गई है. उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस अर्जी पर जल्द सुनवाई करेगी.

कोरोना से अब तक 238 पत्रकारों की मौत
कोरोना की दूसरी लहर में देश ने कई वरिष्ठ पत्रकारों को खो दिया. जिले, कस्बे, गांवों में काम कर रहे तमाम पत्रकार भी इस जानलेवा वायरस के सामने हार गए. दिल्ली आधारित इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2020 से 16 मई 2021 तक कोरोना संक्रमण से कुल 238 पत्रकारों की मौत हो चुकी है.

मई के महीने में हर रोज 4 पत्रकारों ने दम तोड़ा 
रिपोर्ट बताती है कि कोरोना की पहली लहर में अप्रैल 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक 56 पत्रकारों की मौत हुई लेकिन दूसरी लहर ज्यादा भयावह साबित हुई. 1 अप्रैल 2021 से 16 मई की बीच 171 पत्रकारों ने दम तोड़ दिया. शेष 11 पत्रकारों का निधन जनवरी से अप्रैल के बीच हुआ है. कोरोना से 300 से ज्यादा पत्रकारों का निधन हुआ है. इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की रिपोर्ट में उन सभी पत्रकारों को शामिल किया गया है जो फील्ड में खबर एकत्रित करते हैं अथवा दफ्तरों में काम करते हुए कोरोना संक्रमित हुए हैं. और उनकी जान चली गई है. इनमें मीडिया संस्थानों के रिपोर्टर से लेकर स्ट्रिंगर फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट  तक शामिल हैं.

किस राज्य में कितने पत्रकारों का निधन हुआ
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में जिस रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. उस रिपोर्ट के मुताबिक 41 से 50 साल के बीच के पत्रकार सबसे ज्यादा कोरोना के शिकार बने. कुल मौतों में इनका आंकड़ा करीब 31 फ़ीसदी है, 31 से 40 साल के बीच के उम्र के 15 फ़ीसदी, 51 से 60 साल के बीच 19 फीसदी, 61 से 70 साल के 24 फ़ीसदी और 71 साल से ऊपर वाले 9 फ़ीसदी पत्रकारों का कोरोना से निधन हुआ है.

कोरोना संक्रमण से मरने वाले पत्रकारों में करीब 55 फीसदी प्रिंट मीडिया से, 25 फ़ीसदी टीवी और डिजिटल मीडिया से और 19 फीसदी फ्रीलांस  पत्रकारिता से जुड़े थे. डॉ नीलिमा खुद एक पत्रकार रही हैं, और उन्होंने यह आंकड़े अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खबरों से इकट्ठा कर वेरीफाई किए हैं.