Covid-19 के सबक: वसीयत बनाएं, ताकि आपके बाद अपनों को हक पाने में ना हो कोई परेशानी

वसीहत बनाएं , नई पीढ़ी को विवाद से बचाएं

Covid-19 ने हमसे बहुत कुछ छीना है, तो बहुत से सबक भी दिए हैं. इसमें एक सबक ये भी है कि मौत बताकर नहीं आती है. हमने कई परिवारों के मुखिया की असामयिक मौत से बेसहारा परिजनों को संपत्ति पर हक के लिए परेशान होते देखा है.

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    Covid-19 ने हमसे बहुत कुछ छीना है, तो बहुत से सबक भी दिए हैं. इसमें एक सबक ये भी है कि मौत बताकर नहीं आती है. हमने कई परिवारों के मुखिया की असामयिक मौत से बेसहारा परिजनों को संपत्ति पर हक के लिए परेशान होते देखा है.

    आपके बाद आश्रित परिजनों को वित्तीय सुरक्षा के लिए बीमा और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी है कि आपके बाद उन्हें आपकी संपत्ति एवं निवेश पर हक बिना किसी परेशानी के मिल सके. वसीयत इसका सबसे आसान और कारगर जरिया है. आइए समझते हैं विशेषज्ञों के माध्यम से वसीयत के पूरे गणित को...
    इन वजहों से जरूरी है वसीयत बनाना
    संपत्ति का शांतिपूर्ण और विधिक बंटवारा:
    वसीयत के अभाव में संपत्ति का बंटवारा भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार किया जाता है तथा कई मामलों में वर्षों तक केस कोर्ट में लंबित रहते हैं. वसीयत से विधिक रूप से संपत्ति का बंटवारा संभव हो सकता है l

    वारिसों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना:
    हो सकता है किसी उत्तराधिकारी को ज्यादा आर्थिक आवश्यकताएं हों और किसी को कम. वसीयत के द्वारा उत्तराधिकारियों को संपत्ति का वितरण उनकी जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है.

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    नाबालिगों के लिए अभिभावक नियुक्त करना:
    माता-पिता दोनों की मृत्यु की दशा में नाबालिग बच्चों की देखभाल के लिए अभिभावक कौन होंगे, इसका चयन वसीयत के माध्यम से किया जा सकता है. बच्चों के बालिग होने तक अभिभावक ही संपत्ति का रखरखाव तथा नाबालिगों का भरण पोषण करते हैं.
    पूरी संपत्ति का सूचीबद्ध होना:
    भारतीय बैंकों के लाखों खातों में और बीमा कंपनियों में करोड़ों की राशि अनक्लेम्ड पड़ी हैl कारण मृतक के वारिसों को उसकी जानकारी ही नहीं होती. वसीयत में सभी संपत्तियों का ब्योरा होने से मृतक की सभी संपत्तियों का पता लग जाता है.
    ऐसे बनाएं वसीयत
    अपनी भूमि, अचल संपत्ति, बैंक जमा, शेयर, जीवन बीमा, सोना, व्यक्तिगत विरासत और अन्य निवेश सहित अपनी सभी परिसंपत्तियों को सूचीबद्ध करके इसकी शुरुआत करें, क्रॉस चेक करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी संपत्ति छूटी तो नहीं है. इसके अतिरिक्त अपनी बकाया देनदारियों पर भी ध्यान दें.
    लाभार्थियों के बारे में फैसला करें. आपकी किस संपत्ति के लाभार्थी कौन रहेंगे, किसे क्या-कितना देना है. यह अच्छी तरह सोचकर तय कर लें.

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    नाबालिग बच्चों के लिए केयर टेकर या अभिभावक तय करें कि माता-पिता दोनों की गैरमौजूदगी में नाबालिग बच्चों की देखभाल और परवरिश के लिए केयर टेकर या अभिभावक कौन होंगे, इसका चयन भी सावधानी से करना चाहिए.
    दो गवाहों का चयन करें. गवाह स्वतंत्र होने चाहिए और किसी भी दशा में लाभार्थी नहीं होने चाहिए. अन्यथा यह वसीयत को अमान्य बना सकता है. अपने फैमिली डॉक्टर और एक वकील को गवाह बनाना बेहतर रहता है.
    एक निष्पादक नियुक्त करें. निष्पादक वसीयत में महत्वपूर्ण हिस्सा होता हैl वसीयतकर्ता की संपत्तियों और उधारों से संबंधित जानकारी जुटाना, उसके सारे कर्ज का भुगतान और अंत में वसीयत के अनुसार संपत्तियों का वितरण करना निष्पादक का मुख्य काम होता है. निष्पादक व्यस्क, वसीयतकर्ता से छोटी उम्र का और अच्छी साख वाला होना चाहिए.
    वसीयत अच्छी गुणवत्ता वाले ए4 पेपर, बांड पेपर या हरे रंग के बहीखाता पत्र पर लिखें या प्रिंट करें. ऐसे पेपर समय के साथ खराब नहीं होते हैं. वसीयत को बगैर मोड़े एक बड़े लिफाफे या प्लास्टिक फोल्डर में स्टोर करेंl वसीयत को आपके बैंक के लॉकर में सुरक्षित रूप से रखा जा सकता है. निष्पादक को इस बाबत सूचित भी किया जाना चाहिए.
    वसीयत की समय-समय पर समीक्षा भी की जानी चाहिए. जैसे ही आपकी परिस्थितियां और संपत्ति बढ़ती या बदलती है, आपको अपनी वसीयत भी अपडेट कर देनी चाहिए. अगर आप दूसरी, तीसरी या चौथी वसीयत बनाते हैं तो पिछली वसीयतों को रद्द करना न भूलें .

    क्या वसीयत का रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
    भारतीय कानूनों के अनुसार इसे पंजीकृत कराना जरूरी नहीं हैl लेकिन वसीयत को रजिस्टर्ड करवा लेना बेहतर होता है. विवाद की दशा में उत्तराधिकारी के पास यह उचित तर्क होता है कि सरकारी अधिकारी या रजिस्ट्रार के समक्ष उक्त वसीयत का निष्पादन किया गया है, तयशुदा सरकारी शुल्क अदा किया गया है तथा वसीयत फर्जी नहीं हैl जरूरत पड़ने पर वसीयत की सर्टिफाईड कॉपी भी पंजीयक के यहाँ से प्राप्त की जा सकती है

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