Covid-19: जुर्माने से बनती नहीं दिख रही बात, समझाइश से होगा बड़ा फायदा!

दिल्ली की बात करें तो लॉकडाउन से पहले ही मास्क न पहनने वालों पर दो हज़ार रु का जुर्माना लगाया जा रहा था. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली की बात करें तो लॉकडाउन से पहले ही मास्क न पहनने वालों पर दो हज़ार रु का जुर्माना लगाया जा रहा था. (सांकेतिक तस्वीर)

Lockdown in India: येल में किए गए शोध से पता चलता है कि संक्रमण कम करने में मास्क की अपेक्षा लॉकडाउन चार गुना ज्यादा असरदार है, लेकिन आर्थिक तौर पर सर्जिकल मास्क (Surgical Mask) का वितरण, लॉकडाउन की अपेक्षा ज्यादा कारगर है.

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नई दिल्ली. हफ्तों के लॉकडाउन के बाद दिल्ली (Delhi) और अन्य शहर अनलॉक (Unlock) की प्रक्रिया पर विचार कर रहे हैं, लेकिन इस बीच बेहद सतर्कता बरती जा रहा है क्योंकि एक और लहर (New Wave) का खतरा सिर पर मंडरा रहा है. ऐसे में गंभीर रूप से विचार चल रहा है कि अनलॉक के बाद किस तरह की रणनीति के जरिए संक्रमण पर काबू किया जाए. जानकारों का कहना है कि मास्क की अनिवार्यता के साथ लोगों के रवैये में बड़े बदलाव की आवश्यकता है. दिल्ली की बात करें तो लॉकडाउन से पहले ही मास्क न पहनने वालों पर दो हज़ार रु का जुर्माना लगाया जा रहा था. लेकिन ताज़ा हालात में इससे बात बनती नज़र नहीं आ रही है. सोच में बदलाव की जरूरत है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में येल रिसर्चर मुशफिक़ मुबारक ने बताया कि किस तरह बांग्लादेश में उन्होंने मास्क के चलन को बढ़ाने के लिए 20 अलग अलग रणनीतियों पर काम किया. मुबारक ने इसे NORM नाम दिया है - No-cost mask distribution (मुफ्त मास्क वितरण), Offering information and spreading awareness (जानकारी और जागरूकता बढ़ाना), Reinforcement and Modelling information through community leaders (सामुदायिक नेतृत्व के जरिए जानकारी का प्रतिरूपण और सुदृढ़ीकरण).

मुबारक कहते हैं कि दिल्ली भी अलग-अलग रणनीति के मिश्रण पर काम कर सकता है. वैसे भी कहां, कैसी रणनीति काम करेगी, यह जगह की आबादी की तादाद पर निर्भर करता है. लाहौर, ढाका और तेलंगाना में की गई रिसर्च के आधार पर मुबारक कहते हैं कि इस मामले में जुर्माना लगाना असरदार साबित नहीं होता.

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येल में किए गए शोध से पता चलता है कि संक्रमण कम करने में मास्क की अपेक्षा लॉकडाउन चार गुना ज्यादा असरदार है, लेकिन आर्थिक तौर पर सर्जिकल मास्क का वितरण, लॉकडाउन की अपेक्षा ज्यादा कारगर है. वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के परविंदर सिंह भी मानते हैं कि सामाजिक रवैये में बदलाव से बात बनेगी, न कि मास्क न पहनने को अपराध करार देकर कुछ हासिल होगा. लोगों को जागरूक करने की जरूरत है.

दिल्ली के पूर्व नगर निगम आयुक्त राकेश मेहता का कहना है कि जरूरी है कि जब तक वैक्सीन सहज रूप से उपलब्ध न हो जाए, तब तक जरूरी है कि बड़े स्तर पर डबल मास्क के असर के प्रति जागरुकता को बढ़ाया जाए. जब तक लोगों को यह एहसास नहीं होता कि कोरोना से पहला बचाव वह खुद हैं, तब तक इस मामले में आगे बढ़ा नहीं जा सकता.




दिल्ली के एक और पूर्व आयुक्त के एस मेहरा कहते हैं कि सोशल मीडिया और टीवी के जरिए लोगों तक पहुंचने की जरूरत है. अपने आसपास इतनी त्रासदियों को होते देखने के बाद हो सकता है कि लोग ज्यादा ध्यान दें. दिल्ली को नए तरीके ढूंढने की जरूरत है. दोनों ही आयुक्तों को लगता है कि इस मामले में दिल्ली के आरडब्लूए का बड़ा रोल हो सकता है. जरूरी है कि नगर निगम में जन स्वास्थ्य संचार से जुड़े खाली पड़े पदों को भरा जाए और लोगों तक काम की बात पहुंचाई जाए.

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