कोरोना वायरस पर बोले भारत के मुख्य न्यायाधीश, महामारी कुछ ऐसी थी मानो आकाश गिर गया हो

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, महमारी के दौर में वर्चुअल सोर्स के जरिए सुनवाई करना एक सही समाधान नहीं बन सका.(फोटो साभारः ANI)
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, महमारी के दौर में वर्चुअल सोर्स के जरिए सुनवाई करना एक सही समाधान नहीं बन सका.(फोटो साभारः ANI)

Chief Justice of India Sharad Arvind Bobde: जुडिशियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित उद्घाटन समारोह में चीफ जस्टिस ने कहा, कोरोना वायरस महामारी ने हमें नए पुराने के संयोजन के साथ एक नए काम के माहौल के लिए प्रशिक्षण दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2020, 5:32 PM IST
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नागपुर. भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे (Chief Justice of India Sharad Arvind Bobde) ने शनिवार को नागपुर में न्यायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान में भारत के पहले ई-रिसोर्स सेंटर 'न्याय कौशल' (Nyay Kaushal) का उद्घाटन किया. यह रिसोर्स सेंटर 'न्याय कौशल' देश की सभी जिला अदालतों, उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में मामलों की ई-फाइलिंग की सुविधा प्रदान करेगा. ई-रिसोर्स का उद्घाटन करते हुए पहली बार मुख्य न्यायाधीश ने कोविड-19 महमारी पर बातचीत की. इस दौरान मुख्य न्यायाधीश बोबडे ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने हमें नई और पुरानी व्यवस्थाओं के संयोजन के साथ काम के एक नए माहौल के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया है.

उन्होंने कहा, कोविड-19 महामारी ने भौतिक सुनवाई के लिए एक बड़ी चुनौती बनाई. उन्होंने कहा, महमारी के दौर में वर्चुअल सोर्स के जरिए सुनवाई करना एक सही समाधान नहीं बन सका. क्योंकि जो लोग तकनीक का खर्च नहीं उठा सकते वो कोर्ट केस में वर्चुअल तरीके से शामिल नहीं हो पाए.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमने अनुसूचित जाति के कार्य को प्रतिबंधित तरीके से करने की कोशिश की, लेकिन यह महसूस किया कि इस तरह से सुरक्षित रूप से अदालत जारी रखना संभव नहीं था. उन्होंने कहा कोरोना वायरस महामारी कुछ ऐसी थी कि मानो आकाश जमीन पर गिर गया हो.



सहयोगियों ने बनाए रखा कानून का शासन
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'कोर्ट के चक्कर लगाने से पता चलता है कि सोशल डिस्टेसिंग को बनाए नहीं रखा जा सकता है. मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि अपने सहयोगियों के साथ, हम यह सुनिश्चित करने में कामयाब रहे हैं कि कानून का शासन बनाए रखा जाए.'

ई-रिसोर्स सेंटर 'न्याय कौशल' के बारे में कही ये बात
उन्होंने कहा कि किसी को भी विश्वास नहीं था कि चार सप्ताह में एक विशाल कार्य पूरा किया जा सकता है. न्याय कौशल के जरिए अब लोग कहीं से भी याचिका ऑनलाइन डाल सकते हैं. कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, भूषण गवई, और बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता आदि भी मौजूद थे.
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