उप चुनावों के प्रचार में कोविड नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां, बढ़ न जाएं केस

उप चुनावों के प्रचार में कोविड नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां. (प्रतीकात्मक तस्वीर pixabay से साभार)

उप चुनावों के प्रचार में कोविड नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां. (प्रतीकात्मक तस्वीर pixabay से साभार)

उप चुनावों (By-Election) के लिए हो रहे चुनाव प्रचारों में कोविड (Covid-19) के नियमों का उल्लंघन आम है. यहां पर कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए किसी भी तरह के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 16, 2021, 6:04 PM IST
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नई दिल्‍ली. पूरे देश में कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. सरकार कोरोना (Corona) के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है लेकिन महामारी का प्रकोप इतना ज्‍यादा है कि सरकार की कोशिश छोटी पड़ती जा रही है. हालांकि, उप चुनावों (By-Election) के लिए हो रहे चुनाव प्रचारों में कोविड के नियमों का उल्लंघन आम है. यहां पर कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए किसी भी तरह के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं.

आइए देखते हैं कि जिन राज्यों में उप चुनाव हो रहे हैं वहाँ की स्थिति क्या है :

कर्नाटक : राज्य में तीन सीटों के लिए उप चुनाव हो रहे हैं और सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव प्रचार के दौरान कोविड के नियमों के उल्लंघन का आरोप लागाया है. कुछ दिन पहले बेलगवी लोकसभा क्षेत्र के रामदुर्गा में हुई कांग्रेस की चुनाव रैली में 2000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. इस रैली में कांग्रेस के नेता सतीश जरकिहोली, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, पूर्व केंद्रीय मंत्री केएच मुनियप्पा और दूसरे कांग्रेस नेताओं ने हिस्सा लिया. रायचूर के मस्की विधानसभा क्षेत्र में चुनाव रैली के दौरान कोविड के नियमों का उल्लंघन हुआ. मस्की उपचुनाव के चुनाव अधिकारी राजशेखर डंबला ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान नियमों के इस उल्लंघन के कारण 14 मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं बासवाकल्याण विधानसभा क्षेत्र में भी चुनाव रैलियों में राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने कोविड के नियमों की अनदेखी की लेकिन यहां भी उनके ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ.


महाराष्ट्र : पंढरपुर-मंगलवेधा विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार अब अंतिम दौर में है. यहां बीजेपी उम्मीदवार समाधान अवताड़े और एनसीपी उम्मीदवार भगीरथ भलके के बीच सीधी टक्कर है. दोनों ही पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने पंढरपुर और मंगलवेधा में चुनाव प्रचार किए हैं. चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी नेता ने कोविड के नियमों का पालन नहीं किया जबकि उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जा रहा था. बीजेपी और एनसीपी के उम्मीदवारों की रैलियों में काफ़ी संख्या में लोग आ रहे हैं पर इन सभाओं में किसी भी तरह की सोशल डिस्टेंसिंग या कोविड के किसी अन्य नियमों का पालन नहीं हो रहा है. कोई भी व्यक्ति इन रैलियों में मास्क नहीं लगाता है.

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आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: पिछले कुछ सप्ताहों से इन दोनों ही राज्यों में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं और इन राज्यों में उप चुनावों के लिए चुनाव प्रचार अंतिम दौर में है. राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार रैलियों में भारी भीड़ जमा हो रही है और इन रैलियों में कोविड के नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है. पिछले एक सप्ताह में आंध्र प्रदेश के तिरुपति में कोविड के मामलों में भारी वृद्धि हुई है. यहां उपचुनाव 17 अप्रैल को होना है. राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान कोविड के 4,157 मामले दर्ज हुए हैं. यहां सभी दलों के नेताओं ने चुनाव प्रचार किया और इनमें कोविड के नियमों की भारी अनदेखी हुई.

पड़ोसी राज्य तेलंगाना में भी कोविड के मामलों में भारी तेज़ी आ रही है. पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कोविड के कुल 3,303 मामले हुए. कोविड के इस बढ़ते मामलों के बीच राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने सागर उपचुनाव के लिए चुनाव अभियान में हिस्सा लिया और भारी रैलियां कीं. इस उपचुनाव के लिए मतदान 17 अप्रैल को होना है. मुख्यमंत्री के राजनीतिक बैठकों में भारी भीड़ जमा होती रही है और दूसरी ओर राज्य में कोविड के मामले में भी वृद्धि हो रही है. सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव रैलियां कर रही हैं पर किसी भी रैली में कोविड के नियमों को ध्यान में नहीं रखा जा रहा है.

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गुजरात : गुजरात में कोविड के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है जबकि राज्य में मोरवा हदफ उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार ज़ोरों पर है. गांधीनगर में स्थानीय निकाय के चुनावों को टाल दिया गया लेकिन मोरवा हदफ के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया. चुनाव प्रचार के लिए मोरवा हदफ गए प्रशांत कोरट अब कोरोना से संक्रमित हो गया है. लेकिन ऐसा लग रहा है कि बीजेपी को इसकी कोई चिंता नहीं है और पार्टी ने इस क्षेत्र में बहुत बड़ी बाइक रैली की है. मोरवा हदफ विधानसभा क्षेत्र के लिए मतदान 17 अप्रैल को होना है और बीजेपी इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चुनाव प्रचार कर रही है. मंत्री कुंवरजी बावलिया भी इस प्रचार अभियान में हिस्सा ले रहे हैं. इस क्षेत्र में धारा 144 लगा हुआ है जिसके तहत चार से अधिक लोगों के एक जगह जमा होने की मनाही है. इसके बावजूद इस क्षेत्र में चुनाव रैलियां हुईं और बीजेपी ने इनके लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली.

इस बारे में कुंवरजी बावलिया ने एक बातचीत में कहा कि अगर कोई ऐसी भीड़ है जिसमें 50 से कम लोग मौजूद हैं तो इसके लिए किसी तरह की पूर्व अनुमति की ज़रूरत नहीं है. हमारी रैलियों में सिर्फ 45 लोग ही मौजूद थे और ये लोग भी अपनी इच्छा से इन रैलियों में शामिल हुए. तो अब सवाल उठता है कि क्या कोविड के नियम और दिशानिर्देश सिर्फ आम लोगों के लिए है और राजनीतिक लोगों पर ये लागू नहीं होते?

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केरल: केरल में 5 अप्रैल को कोरोना के कुल 2357 मामले हुए थे और इसके एक दिन बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने थे. हालाँकि, राज्य में 5.93% की वृद्धि दर के साथ कोरोना पॉज़िटिव की संख्या बढ़कर 24 घंटे के बाद 6 अप्रैल को 3502 हो गया. और 14 अप्रैल को ये मामले बढ़कर 8778 हो गए और टेस्ट पॉज़िटिव दर बढ़कर 13.45 हो गया. अब राज्य में जिस तरह से कोविड का दूसरा दौर उफान पर है, उससे लगता है कि आनेवाले दिनों में राज्य में ज़्यादा प्रतिबंध लग सकते हैं और जनता को इसके लिए तैयार रहना चाहिए. बेटी वीणा के कोरोना से ग्रस्त होने के बावजूद चुनाव के दिन बाहर निकलने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री पिनराय विजयन की काफ़ी आलोचना हुई. राज्य में अब 16 और 17 अप्रैल को दो लाख लोगों की कोविड जांच होनी है. ऐसी उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में राज्य में कोविड को लेकर सख़्ती की जा सकती है.
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