कोरोना की महामारी के बीच गायब होते मरीजों का रहस्य!

कोरोना की महामारी के बीच गायब होते मरीजों का रहस्य!
मुंबई में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए एक मेकशिफ्ट हॉस्पिटल की फाइल फोटो (फोटो- MMDRA)

अगर पूरे महाराष्ट्र (Maharashtra) भर की बात करें तो करीब एक दर्जन से अधिक मरीज कोरोना केयर सेंटर (Corona Care Center) से गायब हो गए जिनमें अधिकतर बाद में मृत अवस्था में पाए गए.

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(अभिषेक पांडेय)

मुंबई. मुंबई (Mumbai) सहित महाराष्ट्र (Maharashtra) में कोविड-19 (Covid-19) के मरीजों की संख्या में दिन-ब-दिन इजाफा हो रहा है. कम समय में मरीजों की संख्या दो गुना हो रही है. हर दिन सात हजार से ज्यादा मरीज पूरे महाराष्ट्र भर में नए संक्रमित हो रहे हैं. सरकार तमाम दावे कर रही है कि हजारों की संख्या में बेड बढ़ाए गए हैं, कई कोविड सेंटर (Covid Center) बनाए गए हैं और सब कुछ नियंत्रण में है. लेकिन जिस तरह से मुंबई सहित महाराष्ट्र भर में मरीजों के गायब होने की संख्या बढ़ रही है सरकारी व्यवस्था के दावों की पोल खुल रही है.

अगर पूरे महाराष्ट्र (Maharashtra) भर की बात करें तो करीब एक दर्जन से अधिक मरीज कोरोना केयर सेंटर (Corona Care Center) से गायब हो गए जिनमें अधिकतर बाद में मृत अवस्था में पाए गए. कई लोग तो खुशनसीब रहे कि उनके परिवार के सदस्य की कम से कम लाश मिल गई लेकिन अभी भी कई ऐसे लोग हैं जो अपने परिवार के सदस्यों (Family Members) को खोज रहे हैं लेकिन उन्हें यह तक नहीं पता है की उनका मरीज (Patient) जिंदा है या मर चुका है.



महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने ऐसा होने पर गंभीर कार्रवाई करने को कहा
बीएमसी में बीजेपी के ग्रुप लीडर विनोद मिश्रा बताते हैं कि "सरकार का ध्यान सिर्फ करप्शन की तरफ है, लोगों की जान भगवान भरोसे छोड़ दी है यह पूरी लापरवाही प्रशासन की है जो मरीजों की सही तरीके से देखभाल नहीं कर पा रही हैं "

कई मरीजों को लेकर बीजेपी के नेताओं का दल राज्यपाल के पास भी गुहार लगा चुका है. राज्य सरकार हर बार जांच कमेटी बिठा देती है लेकिन जांच कमेटी का रिजल्ट अब तक नहीं आया है. बीजेपी के इस मुद्दे को लेकर आक्रामक होने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि "अगर किसी मरीज के गायब होने की बात सामने आती है या प्रशासन की लापरवाही की वजह से लाशे बदलने की घटनाएं होती हैं तो गंभीर है सरकार उसके ऊपर कार्रवाई करेगी."

महामारी के दौरान भी कई लोगों को रहा करोड़ों का फायदा
लेकिन प्रशासन के दावों की पोल कोरोना पर काम कर रही संस्था संघर्ष एनजीओ के अध्यक्ष पृथ्वीराज मस्के ने खोली. मस्के बताते हैं, "सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ टेंडर और टेंडर के जरिए पैसा कमाना है. मरीज को रास्ते पर मरता हुआ छोड़ दिया गया है अकेले बीकेसी के पंडाल का भाड़ा 3 महीने के लिए 8 करोड़ से ज्यादा रुपए सरकार की तरफ से दिए जा रहे हैं ऐसे सैकड़ों टेंडर पूरे महाराष्ट्र भर में दिए गए हैं जिससे सरकार के कुछ गिने हुए लोगों को इस महामारी के समय में भी करोड़ों का फायदा हो रहा है."

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इन सब आरोप-प्रत्यारोप के बीच मरीजों और उनके परिवार के दर्द पर मरहम अब तक नहीं लगाया जा सका है और सरकार इस तरीके की घटनाओं को नहीं रोक पा रही है कि आखिर इतनी गंभीर बीमारी के बीच इस तरह की लापरवाही कैसे हो रही है.
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