Covid-19: अनलॉक-2.0 में केंद्र ने वापस ले लिया ये अधिकार, क्या राज्यों को होगी परेशानी?

Covid-19: अनलॉक-2.0 में केंद्र ने वापस ले लिया ये अधिकार, क्या राज्यों को होगी परेशानी?
नई गाइडलाइंस में केंद्र सरकार ने लोगों और मालों की आवाजाही पूरी तरह से खोल दी है.

अनलॉक-2 (Unlock-2.0) में केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया है कि कोरोना वायरस (COVID-19) के संक्रमण को रोकने के लिए वह चाहे तो वह अपनी ओर से कुछ और पाबंदियां लागू कर सकते हैं. लेकिन, इसमें सबसे बड़ी बात ये कही गई है कि राज्यों को अपनी सीमाएं सील करने की अनुमति नहीं है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) के कारण थम सी गई जिंदगी को अब फिर से पटरी पर लाने की प्रक्रिया जारी है. केंद्र सरकार ने सोमवार रात अनलॉक-2 (Unlock-2.0) के लिए गाइडलाइंस जारी किए थे, जो आज यानी एक जुलाई से प्रभावी हो रहा है. इस बार की गाइडलाइंस उन राज्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, जहां कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. नई गाइडलाइंस में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जो ऐसे राज्यों को खटक सकते हैं.

मसलन, नई गाइडलाइंस में केंद्र सरकार ने लोगों और मालों की आवाजाही पूरी तरह से खोल दी है. अब इसके लिए किसी पास की जरूरत नहीं है. कंटेंमेंट जोन छोड़कर लोग कहीं भी आ जा सकेंगे. ऐसे में राज्यों के लिए अपनी सीमाएं सील करना मुमकिन नहीं होगा, जो हाल में विवादों की वजह भी बन गया था.

देश की अर्थव्‍यवस्‍था को फिर से पटरी पर लाने के लिए चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन का खोलने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, ताकि कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सके. वैसे अनलॉक 2 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वह चाहे तो वह अपनी ओर से कुछ और पाबंदियां लागू कर सकते हैं. लेकिन, इसमें सबसे बड़ी बात ये कही गई है कि राज्यों को अपनी सीमाएं सील करने की अनुमति नहीं है. गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइंस में राज्यों से कहा गया है कि वह पब्लिक या सामानों की आवाजाही को नहीं रोक सकते.



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नई गाइडलाइंस में क्या है?
नई गाइडलाइंस में कहा गया है- 'अंतरराज्यीय और राज्यों के अंदर व्यक्तियों और सामानों के पड़ोसी देशों की जमीनी-सीमाओं समेत जिनके साथ व्यापारिक समझौते हैं, आवाजाही पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं रहेगी. इस तरह की आवाजाही के लिए अलग से कोई इजाजत/मंजूरी/ई-परमिट की आवश्यकता नहीं होगी.'

अगर नई गाइडलाइंस की तुलना 30 मई के अनलॉक-1.0 से करें तो फर्क साफ महसूस हो जाता है. उस गाइडलाइंस में आवाजाही नियंत्रित करने को लेकर राज्यों को इस तरह के अधिकार मिले हुए थे- 'अगर राज्य/संघ शासित प्रदेश जन स्वास्थ्य और हालातों की समीक्षा के आधार पर व्यक्तियों की आवाजाही नियंत्रित करता है तो मूवमेंट को लेकर इन पाबंदियों का पहले से व्यापक प्रचार किया जाएगा....और संबंधित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा.'


इसमें दिक्कत क्या है?
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा है कि अभी जो आदेश दिया गया है, उसका मतलब यही है कि कोई राज्य लोगों की आवाजाही किसी भी कारण से प्रतिबंधित नहीं कर सकते. डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत इस तरह के फैसले लेने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. राज्यों को इसका पालन करना होता है, जबतक कि खुद केंद्र सरकार उसे कुछ खास अधिकार न दे. ऐसे में जिन राज्यों को सीमाएं खुली रहने से संक्रमण को नियंत्रित रखने में दिक्कत होगी, उन्हें केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगानी पड़ सकती है.

अभी तक किन राज्यों में आई है मुश्किलें?
अभी तक दिल्ली-एनसीआर में नोएडा-गाजियाबाद और गुरुग्राम की ओर से बॉर्डर सील करने को लेकर खूब विवाद हो चुका है. अदालतों तक में मामले जा चुके हैं. राजस्थान, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी ऐसी पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं, जिन्हें लेकर विवाद हुआ है.

यूपी और हरियाणा जैसे राज्यों ने पिछले कुछ महीनों में कई बार दिल्ली के साथ अपनी सीमाओं को सील कर दिया था. राजस्थान समेत कई अन्य राज्यों ने अपने पड़ोसी राज्यों या इंटर स्टेट मूवमेंट पर पास अनिवार्य कर दिया था. विवाद होने पर उन्हें अपना आदेश वापस भी लेना पड़ा.


उदाहरण के लिए, 29 जून को मुंबई ने अपने उपनगरों के साथ अपनी सीमाओं को सील कर दिया. 27 जून को तमिलनाडु ने कर्नाटक के साथ अपनी सीमाओं को सील कर दिया. राजस्थान ने 10 जून को अपनी सीमाओं को सील करने की घोषणा की. ववजिसके बाद राज्य में प्रशासन द्वारा जारी पास के आधार पर इंटर स्टेट मूवमेंट की अनुमति दी गई. गुजरात में बढ़ते कोरोना मामलों के कारण दमन ने भी राज्य के साथ अपनी सीमाओं को सील कर दिया था.

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फिर गृह मंत्रालय ने ऐसा आदेश क्यों दिया?
जानकारों की मानें तो केंद्र सरकार ने नया प्रावधान इसलिए लागू किया है, ताकि अर्थव्यस्था में थोड़ी और तेजी लायी जा सके. इसमें कोई दो राय नहीं कि लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था की कमर टूट चुकी है. केंद्र सरकार मान रही है कि जबतक बेरोक-टोक आवाजाही शुरू नहीं होगी, तबतक इसमें गति नहीं आ सकती है. जाहिर है कि ऐसे में जिन राज्यों को इससे परेशानियां होंगी, उन्हें केंद्र के साथ मिलकर ही कोई हल ढूंढ़ना होगा.
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