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पीएम मोदी ने लगवायी कोरोना वैक्सीन, साथ ही कई अहम संदेश भी दे गए

वैक्सीन लगवाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गले में असमिया गमछा डाल रखा था, जबकि उन्हें वैक्सीन का टीका लगाने वाली दो नर्सों का ताल्लुक केरल और पुडुचेरी से है. (फोटो सभार- ANI twitter)

वैक्सीन लगवाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गले में असमिया गमछा डाल रखा था, जबकि उन्हें वैक्सीन का टीका लगाने वाली दो नर्सों का ताल्लुक केरल और पुडुचेरी से है. (फोटो सभार- ANI twitter)

Covid-19 Vaccination Drive Phase-2: पीएम मोदी जब एम्स पहुंचे तो उन्हें देख कर वहां की नर्सों, कर्मचारियों के होश फाख्ता हो गए. पीएम ने उन डरे सहमें चेहरों की भावों को उन्‍होंने आनन-फानन में पढ़ लिया. फिर पीएम लग गए स्थिति को नार्मल बनाने में.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 2, 2021, 12:26 PM IST
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सोमवार के तड़के अपने निवास 7-एलकेएम से पीएम मोदी का काफिला निकला तो बाहर के लोगों को अंदाजा तक नहीं था कि ये कहां जाकर रुकेगा. पूरा सुरक्षा तंत्र साथ तो था लेकिन वो ताम झाम जो पीएम के काफिले में लगता है वो नदारद था. सोमवार की सुबह थी, थोड़ा ट्रैफिक भी सड़क पर नजर आने लगा था. पीएम का ये काफिला धीरे-धीरे एम्स तक जा पहुंचा. कोरोना वैक्‍सीनेशन का दूसरा चरण. यानी आम आदमी तक पहुंचाने की शुरुआत हो रही थी. ऐसे में पीएम का वहां पहुंचना जता गया कि कोरोना से जंग हो, या फिर कोरोना वैक्‍सीनेशन का मामला पीएम मोदी फ्रेंट से लीड करना चाहते हैं. जी हां, पीएम मोदी एम्स पहुंचे थे कोरोना की वैक्‍सीन लगवाने. पीएम मोदी ने देश की जनता को कहा कि इस दवा को लेकर आशंकित होने की जरुरत नहीं, सभी देशवासी बैखौफ होकर ये टीका लगवाएं. दवा और इतनी जल्दी दवा विकसित करने वाले वैज्ञानिकों पर सवाल उठाने वालों को भी संदेश चला गया कि डर के आगे जीत भी है. यानी पीएम मोदी का पहला सीधा संदेश यही था कि महामारी से जंग या फिर वैक्‍सीन वो फ्रंट से लीड करेंगे.

पीएम मोदी जब एम्स पहुंचे तो उन्हें देख कर वहां की नर्सों, कर्मचारियों के होश फाख्ता हो गए. पीएम ने उन डरे सहमें चेहरों की भावों को उन्‍होंने आनन-फानन में पढ़ लिया. फिर पीएम लग गए स्थिति को नार्मल बनाने में. पहले वहां मौजूद नर्सों से उनका नाम और उनके घर के बारे में पूछा. फिर जब बारी इंजेक्शन लगाने की आयी तो पीएम मोदी ने नर्सों को कहा कि क्य़ा वो जानवरों पर इस्तेमाल किया जाने वाला सीरिंज इस्‍तेमाल करेंगी. नर्सों को पीएम मोदी का ये सवाल समझ में नहीं आया तो उन्‍होंने झट से जवाब दिया नहीं. लेकिन पीएम ने जब इस हास्य से भरे सवाल को फिर से पूछा तो कमरे में मौजूद सभी लोगों की हंसी नहीं रुकी. पीएम ने कहा कि नेता आम तौर पर मोटी चमड़ी के होते हैं इसलिए क्या वे उनके लिए विशेष मोटी सीरिंज का इस्तेमाल करने वाली हैं. इंजेक्शन लगने के बाद पीएम मोदी ने नर्सों को भी कहा कि उन्हें तो दवा मिलने के पता ही नहीं चला. यही था पीएम मोदी का दूसरा संदेश कि वो तनावपूर्ण माहौल को हल्का फुल्का बनाने का नुस्खा जानते हैं.

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भारत में एक वीआईपी कल्चर की सस्कृति ऐसी पनपी कि हर किसी को लगने लगा कि पहुंच हो तो काम आसानी से हो ही जाएगा. ये सिलसिला आजादी के बाद भी बदस्तूर जारी रहा. लेकिन नरेन्द्र मोदी के पीएम बनते ही स्थितियां बदलने लगीं. सबसे पहले पीएम मोदी ने बंद की वीआईपी संस्कृति जब उन्‍होंने वीआईपी कल्चर के प्रतीक माने जाने वाले लाल बत्ती पर ही बैन लगा दिया. कानून ये बना कि एंबुलेंस को छोड़ कर किसी भी वाहन में लाल बत्ती लगाना गैरकानूनी हो गया. यहीं से शुरुआत हुई वीआईपी कल्चर के धीरे-धीरे खत्म होने की. जब कोरोना की दवा तैयार हो गयी तो पहले वीआईपीयों का नंबर नहीं आया बल्कि कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले लोगों को प्राथमिकता मिली. लेकिन जब आम आदमी के वैक्‍सीनेशन की शुरुआत होने लगी तो सबसे पहले टीका लगवाने वाले पीएम मोदी ही रहे. मार्च 1 की सुबह जब दिल्ली की जनता सोमवार की सुबह अपने काम पर निकलने की तैयारी कर रही थी तब पीएम मोदी बिना किसी सुरक्षा के ताम झाम के अपने काफिले के साथ एम्स पहुंच गए. न कहीं ट्रैफिक रोकना पड़ा और ना ही कहीं किसी को असुविधा हुई. अब तमाम मंत्रियों और सांसदों को निर्देश है कि वो टीका अपने-अपने इलाकों में जा कर लगवाएं ताकि लोगों का भरोसा बना रहे. तीसरा संदेश भी साफ है कि दवा हो या रोजमर्रा की जिंदगी वीआईपी संस्कृति उनको रास नहीं आती है.
पीएम मोदी जब कोरोना की पहली डोज लेने पहुंचे तो उनके गले में असम का बिहू टॉवेल यानी गमछा था. असम में महिलाएं उसे सम्मान और आशीर्वाद के रुप में इसे भेंट करतीं हैं. पीएम वैसे भी इस गमछे का असल इस्तेमाल करते रहे हैं. नर्स सिस्टर निवेदिता ने उन्हें सिरिंज लगाया जो खुद पुडुचेरी की थीं जिन्‍होंने पीएम को कोवैक्सिन ( भारत बायोटेक) का डोज लगाया. उनके साथ दूसरी नर्स रोसम्मा अनिल केरल की थीं. चुनावी मौसम में पीएम मोदी को इन तीनों राज्यों की महिला शक्ति का आशीर्वाद मिला. ये चौथा संदेश भी केरल, पुडुचेरी और असम के लोगों के लिए था.

पांचवा संदेश उन लोगों के लिए था जो इस दवा पर सवाल उठा रहे थे. जाहिर है उनकी बातों से आम आदमी के मन में आशंकाएं बढ़ रहीं थीं. लेकिन जब बारी आम आदमी की आयी तो पीएम मोदी ने खुद सबसे पहले कोरोना वैक्‍सीन की पहली डोज ले ली. हंसते और मुस्कुराते दवा का डोज लेते पीएम को पूरे देश ने देखा है. जाहिर है ये उनके चेहरे पर तमाचा था जो भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा इतनी जल्दी दवा के इजाद करने पर ही सवाल उठाने में लगे थे. साथ ही संदेश उन बुजुर्गों के लिए भी था जिन्हें अब टीका लगाने के लिए आगे आना है. संदेश साफ है कि जिस पीएम मोदी की एक आवाज पर पूरा देश लॉकडाउन हो गया, जिस पीएम की बात पर पूरे देश ने थाली बजायी, जिस पीएम ने दवा के इजाद से लेकर इसे जनता तक पहुंचाने का हर कदम मॉनिटर किया, उसके इस कदम के बाद वैक्‍सीनेशन करवाने वालों की संख्या बढ़ती ही जाएगी. पीएम मोदी की सरकार ने ये भी सुनिश्चित किया है कि गरीबों को ये वैक्‍सीन मुफ्त मिले और आम आदमी को भी इसकी कीमतें नहीं चुभें चाहे वो सरकारी अस्पताल में जाए या फिर निजी अस्पताल में.

सबसे बड़ा संदेश तो विश्व भर में गया. ये आत्मनिर्भर भारत का संदेश था. जिस देश में कोरोना काल शुरु होने के वक्त मास्क तक नहीं थे, वो मास्क सैनिटाइजर में आत्मनिर्भर तो हो ही गया लेकिन यहां के वैज्ञानिकों ने इतनी जल्दी अपनी दवा इजाद कर ली की पूरी दुनिया में भारत और पीएम मोदी की तारीफों के पुल बांधे जाने लगे. आखिर भारत अब सिर्फ अपनी जनता को नहीं बल्कि हर उस देश को कोरोना की दवा भेज रहा है जहां से उनकी मांग आ रही है.

पीएम मोदी को चिंता जरुर है कि देश का हर आदमी ये वैक्‍सीन जल्दी से जल्दी लगवाए. लेकिन उनकी वैक्‍सीनेशन करवाने की पहल ने आम आदमी को एक बार फिर टीकाकरण करवाने के लिए अस्पतालों तक आने का जोश जरुर भर दिया है. (यह लेखक के निजी विचार हैं.)
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