दुनिया के तीन उम्मीदवार कोविड-19 वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण में पहुंचे

दुनिया के तीन उम्मीदवार कोविड-19 वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण में पहुंचे
भारत में दो स्वदेशी वैक्सीन बनाई गई हैं, इन दोनों ने ही पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल करने शुरू कर दिये हैं.

कोविड-19 की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) को लेकर प्रयासों को लेकर हो रहे विकास को लेकर कहा कि पूरी दुनिया में सिर्फ तीन वैक्सीन उम्मीदवार ट्रायल के तीसरे चरण में पहुंचे हैं. इन तीन उम्मीदवारों में एक अमेरिका (America) का है, दूसरी ब्रिटेन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University Britain) की वैक्सीन है और तीसरी चीन (China) की वैक्सीन है.

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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने गुरुवार को कोविड-19 की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) को लेकर प्रयासों को लेकर हो रहे विकास को लेकर कहा कि पूरी दुनिया में सिर्फ तीन वैक्सीन उम्मीदवार ट्रायल के तीसरे चरण में पहुंचे हैं. इन तीन उम्मीदवारों में एक अमेरिका (America) का है, दूसरी ब्रिटेन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (Oxford University Britain) की वैक्सीन है और तीसरी चीन (China) की वैक्सीन है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विश्व में 24 वैक्सीन उम्मीदवार क्लीनिकल इवैल्यूएशन में हैं. यानी कि ह्यूमन ट्रायल के विभिन्न चरणों में हैं. भारत में 2 वैक्सीन कैंडिडेट ह्यूमन ट्रायल कर रहे हैं. जबकि 141 वैक्सीन कैंडिडेट ऐसे हैं जो कि अभी ह्यूमन ट्रायल के चरण में नहीं पहुंचे हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि एक बार तीसरा चरण पूरा होने के बाद ही ये उम्मीदवार के थोक में वैक्सीन बनाने के लिए मंजूरी ले सकते हैं और इसे बनाना शुरू कर सकते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 24 जुलाई को जारी किये गए अपने बुलेटिन में बताया था कि दुनिया भर में 24 वैक्सीन उम्मीदवार क्लीनिकल इवैल्यूशन की प्रक्रिया में हैं और 141 प्री क्लीनिकल इवैल्यूएशन की प्रक्रिया में हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के ओएसडी राजेश भूषण ने कहा कि इसका मतलब है कि 24 वैक्सीन उम्मीदवार ऐसे हैं जो कि विभिन्न जगहों पर पहले, दूसरे और तीसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल कर रहे हैं. जबकि 141 उम्मीदवार अभी शोध कर रहे हैं या फिर जानवरों पर अध्ययन कर रहे हैं.

भारत में दो उम्मीदवार कर रहे हैं ट्रायल
राजेश भूषण ने आगे कहा कि इसे भारत के परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत में दो स्वदेशी वैक्सीन बनाई गई हैं, इन दोनों ने ही पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल करने शुरू कर दिये हैं. इनमें से एक उम्मीदवार आठ साइटों पर 1150 लोगों पर ये ट्रायल कर रहा है. जबकि दूसरी स्वदेशी वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के लिए 1000 लोगों पर ट्रायल किया जा रहा है.
भूषण ने कहा कि क्योंकि भारत वैक्सीन बनाने का हब है इसलिए कोविड वैक्सीन को लेकर भी भारत की अहम भूमिका होगी. इसके वितरण की बात की जाए तो ये बड़े स्तर पर दो तरह से हो सकता है. पहला तो अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां इसके निर्माण और वितरण का कोई तंत्र बनाएं और दूसरा, कि जिन उम्मीदवारों की वैक्सीन सफल हो अलग-अलग देश इस पर उनके साथ बातचीत करें.



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हर्ड इम्युनिटी की स्थिति अभी दूर
वहीं भूषण ने हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) के एक सवाल पर कहा कि यह तभी विकसित होती है जब आबादी के किसी हिस्से में या तो टीकाकरण से या पहले ही हो चुके संक्रमण से रोग प्रतिरक्षा शक्ति विकसित होती है. भूषण ने कहा, ‘‘भारत जैसी जनसंख्या वाले किसी देश में हर्ड इम्युनिटी रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकता. यह केवल एक परिणाम हो सकता है और वह भी बड़ी भारी कीमत पर यानी लाखों लोग संक्रमित हों, अस्पताल में भर्ती हों और जब इस प्रक्रिया में कई लोगों की मृत्यु हो जाए.’’ उन्होंने कहा कि हर्ड इम्युनिटी टीकाकरण के माध्यम से हासिल हो सकती है लेकिन यह भविष्य की बात है.

ओएसडी ने कहा, ‘‘क्या हम हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रहे हैं? स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि यह स्थिति अभी दूर है और भविष्य की बात है. फिलहाल हमें मास्क पहनने, एक जगह अधिक संख्या में जमा होने से बचने, हाथ साफ करने और दो गज की दूरी बनाकर रखने जैसे उचित तौर-तरीकों का पालन करना होगा.’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब तक टीका नहीं बन जाता, कोविड-19 से बचने के तौर-तरीकों का पालन ही इस महामारी के खिलाफ सामाजिक टीका है.’’
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