प्राइवेट हॉस्पिटल को अलॉट हुए 25 फीसदी वैक्सीन, अब तक मिले महज 7.5%: रिपोर्ट

देश की 65 फीसदी आबादी गांवों में रहती है.  यहां के लोग सिर्फ सरकार पर वैक्सीन के लिए निर्भर है.

देश की 65 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. यहां के लोग सिर्फ सरकार पर वैक्सीन के लिए निर्भर है.

Covid-19 Vaccine: 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सिर्फ 80 ज़िलों के प्राइवेट हॉस्पिटल को 10 परसेंट वैक्सीन मिले हैं. जबकि कोविन एप पर 750 ज़िलों की लिस्ट है.

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नई दिल्ली.  देशभर में इन दिनों कोरोना वायरस की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) के लिए मारामारी है. राज्यों को डिमांग के मुताबिक वैक्सीन की सप्लाई फिलहाल नहीं है. इस बीच प्राइवेट हॉस्पिटल को भी वैक्सीन की किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है. केंद्र सरकार की वैक्सीन पॉलिसी के मुताबिक प्राइवेट अस्पतालों को 25 फीसदी वैक्सीन आवंटित किए जाने थे. लेकिन 30 मई तक के आंकड़ों के मुताबिक प्राइवेट हॉटस्पिटल को सिर्फ 7.5% वैक्सीन ही मिली है.

अंग्रेजी अंखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सिर्फ 80 ज़िलों के प्राइवेट हॉस्पिटल को 10 परसेंट वैक्सीन मिले हैं. जबकि कोविन एप पर 750 ज़िलों की लिस्ट है. सिर्फ कुछ शहरी इलाकों के ही प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन मिल रही है. आंकड़ों के मुताबिक 80 फीसदी ज़िलों में सरकार ने 95 परसेंट वैक्सीन दी है. जबकि ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी महज़ 1 फीसदी है.

बड़े शहरों में भी प्राइवेट हॉस्पिटल की हिस्सेदारी कम

हैरानी की बात ये है कि प्राइवेट हॉस्पिटल की तरफ से बड़े शहरों जैसे कि दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता में भी वैक्सीन बेहद कम संख्या में दी जा रही है. दिल्ली में वैक्सीनेशन को लेकर प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 21.1 परसेंट है. इसके बाद बारी चंडीगढ़(14.6%), तेलंगाना (14%), महाराष्ट्र (13.3%) और फिर तमिलनाडु 12.4%) की आती है. दिल्ली के कई ज़िलों में तो सरकार की तरफ से 99.85% वैक्सीनेशन किए गए.


क्या होगा ग्रामीण भारत का?

देश की 65 फीसदी आबादी गांवों में रहती है. यहां के लोग सिर्फ सरकार पर वैक्सीन के लिए निर्भर है. ऐसे सवाल उठता है कि प्राइवेट हॉस्पिटल को 25 परसेंट वैक्सीन देने का क्यों फैसला किया गया. बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर ने इस बार ग्रामीण भारत को अपनी चपेट में ले लिया है. ऐसे में गांव में टीकाकरण अभियान को तेज़ी से पूरा करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.

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