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भारत में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज़ को मिल सकती है हरी झंडी, 20% लोगों में नहीं दिखी एंटीबॉडी

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने के बाद कई लोगों में एंटीबॉडी का स्तर चार से छह महीने के बाद कम होता देखा गया. (फ़ाइल फोटो)

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने के बाद कई लोगों में एंटीबॉडी का स्तर चार से छह महीने के बाद कम होता देखा गया. (फ़ाइल फोटो)

Covid-19 Vaccine Booster Dose: अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में बूस्टर डोज़ की अनुमति पहले ही दे दी गई है. अमेरिका में वैक्सीन की तीसरी डोज़ 20 सितंबर से दी जाएगी.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. भारत में भी कोरोना वैक्सीन (Covid-19) की तीसरी यानी बूस्टर डोज़ (Booster Dose) को हरी झंडी मिल सकती है. जल्द ही इस बारे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) फैसला ले सकता है. दरअसल रिसर्च में पता चला है कि वैक्सीन लेने वाले 20 फीसदी लोगों में कोरोना से लड़ने की एंडीबॉडी खत्म हो गई है. बता दें अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में बूस्टर डोज़ की अनुमति पहले ही दे दी गई है. अमेरिका में वैक्सीन की तीसरी डोज़ 20 सितंबर से दी जाएगी.

    अंग्रेजी अखबार न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक रिसर्च यूनिट में काम करने वाले 23 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी नहीं मिली, जबकि इन सबने वैक्सीन की दोनों डोज़ ली थी. ऐसे में माना जा रहा है कि भारत में भी लोगों को जल्द ही बूस्टर डोज़ दी जा सकती है. भारत में इस साल 16 जनवरी से कोरोना वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की गई थी.

    एंटीबॉडी के स्तर में गिरावट
    भुवनेश्वर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (ILS) के निदेशक डॉ. अजय परिदा ने सुझाव दिया कि कम एंटीबॉडी वाले लोगों को बूस्टर डोज़ दी जाएगी. उन्होंने कहा, ‘हालांकि कुछ कोविड संक्रमित लोगों में एंटीबॉडी का स्तर 30,000 से 40,000 है. जबकि वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने वाले कुछ लोगों में ये 50 से भी नीचे है. अगर एंटीबॉडी का स्तर 60 से 100 है, तो हम कह सकते हैं कि व्यक्ति एंटीबॉडी पॉजिटिव है.’

    ये भी पढ़ें:- COVID-19 in India : कोरोना के नए मामलों में बड़ी राहत, 24 घंटे में आए 28591 नए केस, 338 मरीज़ों की मौत

    कितने दिनों में कम हो रही है एंटीबॉडी?
    बता दें कि भुवनेश्वर स्थित ये संस्थान भारतीय SARS-CoV-2 जीनोम कंसोर्टियम (INSACOG) का एक हिस्सा है, जो देश भर में 28 प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क है. इनका मुख्य तौर पर काम है कोरोना वायरस के नए वेरिएंट का पता लगाना. यानी जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए वायरस का पूरा कच्चा चिट्ठा तैयार करना. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने के बाद कई लोगों में एंटीबॉडी का स्तर चार से छह महीने के बाद कम होता देखा गया. अजय परिदा ने कहा कि पूर्ण टीकाकरण के बावजूद कम या नेगेटिव एंटीबॉडी वाले लोगों के लिए बूस्टर डोज़ की जरूरत होती है.

    ICMR को फ़ाइनल रिपोर्ट का इंतज़ार
    अजय परिदा ने ये भी कहा कि क्लीनिकल स्टडी अपने अंतिम चरण में है. उन्होंने कहा कि भारतीय टीकों- कोविशील्ड और कोवैक्सिन की प्रभावकारिता लगभग 70-80 प्रतिशत है. यानी टीका लेने के बाद भी लगभग 20-30 प्रतिशत ऐसे लोगो होते हैं जिनमें एंटीबॉडी विकसित नहीं होती है. परिदा ने कहा कि ICMR रिपोर्ट के आधार पर बूस्टर डोज़ को मंजूरी दे सकता है.

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