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कोविड-19: अस्पताल में भर्ती होने और मौत का खतरा कम करती वैक्सीन, ICMR की स्टडी में खुलासा

विशेषज्ञ लगातार टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की बात कह रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

विशेषज्ञ लगातार टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की बात कह रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

Coronavirus in India: स्टडी में पता चला है कि इस दौरान कुल प्रतिभागियों में से 384 में डेल्टा की पुष्टि हुई थी. 86.69 फीसदी या 443 लोग डेल्टा, अल्फा, कप्पा और डेल्टा के AY.1 और AY.2 का शिकार हुए थे.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) के दोनों डोज लेने के बाद अस्पताल में भर्ती होने और मौत की गुंजाइश काफी कम हो जाती है. हाल ही में हुई इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है. संस्था ने 677 लोगों को स्टडी में शामिल किया था. इनमें से केवल 9.8 फीसदी को ही अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. ICMR ने वैक्सीन के दोनों डोज लेने के बाद भी संक्रमण की जानकारी हासिल करने लिए यह अध्ययन किया था.

क्या कहती है स्टडी
स्टडी में शामिल किए गए 677 लोगों में से 592 लोगों ने वैक्सीन के दोनों डोज प्राप्त किए थे. इनमें से पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में तैयार हुई कोविशील्ड लेने वालों की संख्या 527 थी. जबकि, 63 लोगों ने भारत बायोटेक, ICMR और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की तरफ से तैयार की गई कोवैक्सीन की खुराक ली थीं. इनमें 85 लोगों को केवल एक ही डोज लगी थी. ये आंकड़े 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इकट्ठा किए गए. स्टडी के दौरान केवल 9.8 प्रतिशत लोगों को अस्पताल में दाखिले की जरूरत पड़ी. दोनों डोज प्राप्त कर चुके केवल 3 लोगों यानि 0.4 फीसदी की मौत हुई.

यह भी पढ़ें: Corona In India: 24 घंटे में 38,949 नए मामले, 542 की मौत, साढ़े 39 करोड़ से ज्यादा लोगों का हुआ वैक्सीनेशन

सबसे ज्यादा शिकार हुए डेल्टा वेरिएंट के
देश में दूसरी लहर के लिए कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा था. स्टडी में पता चला है कि इस दौरान स्टडी में शामिल कुल प्रतिभागियों में से 384 में डेल्टा की पुष्टि हुई थी. 86.69 फीसदी या 443 लोग डेल्टा, अल्फा, कप्पा और डेल्टा के AY.1 और AY.2 का शिकार हुए थे. हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी डेल्टा वेरिएंट को लेकर चेतावनी जारी की थी.

भाषा के अनुसार, INSACOG (Indian SARS-CoV-2 Genomics Consortium) ने कहा कि डेल्टा स्वरूप के उप-स्वरूपों AY.1, AY.2 के डेल्टा से अधिक संक्रामक होने की संभावना नहीं है. INSACOG ने बताया, ‘न तो AY.1 के और न ही AY.2 के डेल्टा से अधिक संक्रामक होने की संभावना है.' साथ ही कहा कि महाराष्ट्र के रत्नागिरि और जलगांव, मध्य प्रदेश के भोपाल और तमिलनाडु के चेन्नई चार ‘क्लस्टर’ में इसके तेजी से फैलने के कोई संकेत नहीं मिले हैं.

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