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Covishield vs Covaxin: भारत में कोरोना के ये दो वैक्सीन कितने है असरदार

सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्‍ड वैक्‍सीन और भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है
सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्‍ड वैक्‍सीन और भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की कोविशील्‍ड वैक्‍सीन (Covishield) और भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन (Covaxin) को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2021, 2:54 PM IST
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नई दिल्ली. देश भर में आज से कोरोना की वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) लगाने काम अभियान शुरू हो गया है. पहले फेज़ में हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन की डोज़ दी जाएगी . उम्मीद की जा रही है कि अगले एक हफ्ते में पहले चरण के सभी लोगों को वैक्सीन की पहली डोज़ दे दी जाएगी. पीएम मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित करते हुए दुनिया के इस सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को हरी झंडी दिखाई. बता दें कि ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की कोविशील्‍ड वैक्‍सीन (Covishield) और भारत बायोटेक की कोवैक्‍सीन (Covaxin) को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है.
कोविशील्‍ड वैक्‍सीन
कोविशील्‍ड वैक्‍सीन को ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन-स्वीडन की फार्मास्यूटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका ने तैयार किया है. भारत में इस वैक्सीन को बनाया है- सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया
ने. इस वैक्सीन के तीनों फेज के नतीजे काफी अच्छे आए हैं. कहा जा रहा है कि वैक्सीन की दो डोज़ काफी असरदार है. ब्रिटेन में इसके ट्रायल से 90-95 फीसदी तक असरदार रहे हैं. ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि ट्रायल में शामिल लोगों में एंटीबॉडी और व्‍हाइट ब्लड सेल्स (T-Cells) विकसित हुईं. फायजर और मोर्डेना की वैक्सीन से ये काफी अलग है.

कोवैक्‍सीन
कोवैक्‍सीन को भारत बायोटेक और आईसीएर ने मिलकर तैयार किया है. इस वैक्सीन को तैयार करने में पुरानी तकनीक का इस्तामल किया गया है. यानी आम भाषा में कहें तो यहां पहले वैक्सीन की डोज़ देकर लोगों को वारस से संक्रमित किया जाता है. इसके बाद उस वायरस को मारा जाता है. मुंबई के 6 सेंटर पर लोगों को कोवैक्सीन की डोज़ दी जाएगी. खास बात ये है कि इस वैक्सीन से साइडइफ्केट होने पर कंपनी की तरफ से हर्जाना भी दिया जाएगा. वैक्सीन की डोज़ लेने के बाद लोगों को एक फैक्टशीट भी दी जाएगी जिसमें उन्हें उन्हें अलग-अलग लक्षणों के बारे में अगले 7 दिनों तक लिखना होगा. बता दें कि कोवैक्सीन के तीसरे फेज के ट्रायल अभी भी करीब 26 हज़ार लोगों पर चल रहे हैं.
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