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    निमोनिया, डायरिया से बच्चों को बचाने में भारत की उपलब्धियों को नुकसान पहुंचा रही है कोविड : रिपोर्ट

    भारत में डायरिया के इलाज का कवरेज सबसे कम है.
    भारत में डायरिया के इलाज का कवरेज सबसे कम है.

    रिपोर्ट के अनुसार भारत में अधिक आबादी होने की वजह से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की निमोनिया और डायरिया से मृत्यु का जोखिम अन्य किसी देश से अधिक है.

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    नई दिल्ली. वार्षिक निमोनिया (Pneumonia) और डायरिया (Diarrhea) प्रगति रिपोर्ट के ताजा संस्करण के अनुसार भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों को टीकाकरण कर निमोनिया और डायरिया से बचाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन कोविड-19 महामारी (Covid-19 Epidemic) से इस दिशा में अर्जित उपलब्धियों को नुकसान पहुंचने का खतरा है.

    जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में इंटरनेशनल वैक्सीन एक्सेस सेंटर (आईवीएसी) की रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में जहां बच्चों में बीमारी की रोकथाम और उनके इलाज संबंधी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, वहीं भारत ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है और बच्चों को डायरिया और निमोनिया की रोकथाम के टीके सुनिश्चित किए हैं.

    रिपोर्ट में ताजा उपलब्ध आंकड़ों से दस संकेतकों का विश्लेषण कर इस प्रगति को आंका गया है. रिपोर्ट के अनुसार भारत में अधिक आबादी होने की वजह से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की निमोनिया और डायरिया से मृत्यु का जोखिम अन्य किसी देश से अधिक है. हर साल भारत में निमोनिया और डायरिया से पांच साल से कम उम्र के करीब 2,33,240 बच्चों की मृत्यु हो जाती है और यह आंकड़ा लगभग 640 बच्चे प्रतिदिन है.




    इसमें कहा गया है कि भारत में ‘रोटावायरस’ टीके का दायरा 18 प्रतिशत बढ़ गया. 2018 में यह 35 प्रतिशत था जो 2019 में 53 प्रतिशत हो गया.

    बयान के अनुसार भारत में डायरिया के इलाज का कवरेज सबसे कम है और केवल 51 प्रतिशत बच्चों को ओआरएस घोल मिला वहीं केवल 20 प्रतिशत बच्चों को जिंक मिला.
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