कुंभ में फर्जी कोविड टेस्ट: नोएडा और दिल्ली में दिए गए पते से नदारद हैं फर्म के ऑफिस

मैक्स कंसल्टेंसी सर्विस (MCS) की खाली इमारत (News18)

कुंभ में फर्जी कोविड जांच का मामला सामने आया. इसके बाद News18 की पड़ताल में पता चला है कि हरिद्वार कुंभ प्रशासन ने अप्रैल में मैक्स कंसल्टेंसी सर्विस (MCS) के साथ कोविड टेस्टिंग करने के लिए MOU पर साइन किया था.

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    अनुपम त्रिवेदी


    हरिद्वार/नई दिल्ली. कुंभ (Kumbh 2021) में कोरोना की जांच (Coronavirus In India) के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है. News18 की पड़ताल में पता चला है कि कोरोना की जांच करने के लिए जिस फर्म को जिम्मेदारी दी थी, वह सिर्फ कागज पर थी. इन फर्मों द्वारा जिन लैब्स को काम पर रखा गया उन्होंने भी जमकर कोविड के फर्जी टेस्ट्स किए. News18 की पड़ताल में  पता चला है कि हरिद्वार कुंभ प्रशासन ने अप्रैल में मैक्स कंसल्टेंसी सर्विस (MCS) के साथ कोविड टेस्टिंग करने के लिए MOU पर साइन किया था. Mou के अनुसार कंसल्टेंसी के पास रैपिड एंटीजन और आरटी-पीसीआर टेस्टिंग के सैंपल इकट्ठा करने के लिए दो लैब्स थी.


    पंजाब निवासी विपिन मित्तल की एक शिकायत के बाद यह पता चला कि हजारों की तादाद में कोविड-19 की जांच हुई. Mou के अनुसार इस कंसल्टेंसी का एड्रेस राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित भीकाजी कामा प्लेस में दर्ज है लेकिन असलियत में उस जगह पर ऐसी किसी फर्म का कोई दफ्तर ही नहीं है. वेबसाइट चेक करने पर नोएडा का एड्रेस मिला जहां News18 टीम पहुंची. नोएडा सेक्टर 63 पहुंचने पर पता चला कि जो पता दिया गया है वहां एक निर्माणाधीन इमारत है. इमारत के गेट पर चेन बंधी हुई थी.


    जब LIC एजेंट को आया मैसेज!
    इस मामले में व्हिसलब्लोअर फरीदकोट निवासी मित्तल पेशे से एलआईसी एजेंट हैं. उन्हें एक मैसेज के जरिए अपनी कोविड टेस्ट रिपोर्ट मिली. रिपोर्ट नेगेटिव थी लेकिन वह मैसेज आने पर चौंक गए क्योंकि उन्होंने ऐसी कोई जांच कराई ही नहीं थी. एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार एलआईसी एजेंट ने शुरू में सोचा था कि किसी ने उसके निजी डेटा चुरा लिया है और अब उसका इस्तेमाल कर रहा है. इसलिए उन्होंने पहले स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन वह बैरंग लौटा दिए गए.


    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी उसके मामले में कम दिलचस्पी दिखाई तो उन्होंने आगे बढ़कर आईसीएमआर में शिकायत दर्ज कराई. ICMR ने मित्तल के मामले पर ध्यान दिया, लेकिन जब कई दिन बीत गए और कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अंततः RTI याचिका दायर की ताकि वह असलियत जान सकें. इसके बाद जब जांच शुरू हुई तो पता चला कि मामला हरिद्वार के कुंभ से जुड़ा हुआ था.


    कुंभ के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अर्जुन सेंगर ने कहा कि फर्म उन्हें ठीक लग रही थी क्योंकि उसने सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे. कंपनी के दस्तावेज में अर्जुन नेगी नाम के शख्स का जिक्र है. नेगी ने News18 से कहा, 'मैं (गलत कामों के लिए) जिम्मेदार नहीं हूं. मैं कुछ समय के लिए फर्म की मदद करने के लिए वहां था.'




    कुंभ प्रशासन ने विभिन्न लैब्स के साथ हर एंटीजन टेस्ट के लिए 354 रुपये और आरटी-पीसीआर परीक्षण के लिए 500 रुपये का भुगतान करने का समझौता किया था. इस बीच, उत्तराखंड के सचिव (स्वास्थ्य) अमित नेगी ने हरिद्वार के अधिकारियों को फर्म के 3 करोड़ रुपये के भुगतान को रोकने के लिए कहा है. उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, 'हरिद्वार प्रशासन जांच कर रहा है और हमें निष्पक्ष रिपोर्ट की उम्मीद है.' आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान प्रशासन द्वारा किराए पर ली गई 22 लैब्स  ने चार लाख के करीब कोविड टेस्ट किए.

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