कोरोना संक्रमित मृतकों में 17.9% ऐसे जो थे किसी बीमारी का शिकार- स्वास्थ्य मंत्रालय

 (AP Photo/Altaf Qadri)
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Coronavirus In India: देश में कोविड-19 (Covid-19) के 8,38,729 मरीजों का इलाज चल रहा है और इनकी संख्या लगातार पांचवें दिन नौ लाख से नीचे बनी हुई है

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 10:24 AM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय  (Mohfw) ने कहा है कि देश में कोरोना वायरस (Coronavirus In India) के चलते होने वाली मौतों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो पहले से ही किसी रोग से पीड़ित हैं. बता दें विश्व स्तर पर भी वैज्ञानिक इस बात को स्वीकार कर रहे हैं हालांकि केंद्र सरकार पहली बार ऐसी रिपोर्ट जारी की है जिसमें भारत में कोरोना मृत्यु दर और उसकी हेल्थ हिस्ट्री का संबंध दिखाया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार पहले से किसी रोग के शिकार रहे पांच में से 1 शख्स की मौत कोरोना से हो रही है.

मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि कुल मृत्युदर में पहले से किसी न किसी बीमारी से पीड़ित लोगों की मृत्युदर 17.9 प्रतिशत है और उन लोगों की मृत्युदर 1.2 प्रतिशत है जिन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी.

उन्होंने बताया कि भूषण ने कहा,'कोविड-19 संबंधी मौत के लगभग 53 प्रतिशत मामलों में लोगों की उम्र 60 साल या इससे अधिक रही. मौत के 35 प्रतिशत मामलों में 45-60 वर्ष आयु समूह के लोग शामिल रहे हैं. 10 प्रतिशत मामलों में 26-44 वर्ष आयु समूह के लोग शामिल रहे. 18-25 वर्ष आयु समूह और 17 साल से कम उम्र के लोगों में एक-एक प्रतिशत मौत के मामले देखने को मिले.'




 47 प्रतिशत मौत के मामलों में 60 साल से कम उम्र के लोग 
विभिन्न आयु समूहों में मृत्युदर के आंकड़े उपलब्ध कराते हुए उन्होंने कहा कि 60 साल और इससे अधिक आयु समूह में मौत के मामलों में 24.6 प्रतिशत लोगों को पहले से कोई न कोई बीमारी थी, जबकि 4.8 प्रतिशत मामलों में लोगों को पहले से कोई बीमारी नहीं थी.

बताया कि 45-60 वर्ष आयु समूह के लोगों की मौत के मामले में 13.9 प्रतिशत रोगी पहले से किसी अन्य बीमारी से पीड़ित थे, जबकि 1.5 प्रतिशत लोग पहले से किसी अन्य बीमारी से पीड़ित नहीं थे. भूषण ने कहा कि 45 साल से कम उम्र के रोगियों की मौत के मामले में 8.8 प्रतिशत लोगों को पहले से कोई न कोई बीमारी थी, जबकि 0.2 प्रतिशत मामलों में लोगों को पहले से कोई बीमारी नहीं थी.

केंद्र के आंकड़ों का मतलब यह है कि कोरोना से पहले दूसरे रोगों के शिकार लोगों के कोरोना से संक्रमित होने पर मरने की संभावना 15 गुना अधिक होती है. कोविड -19 के मामलों में हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट, लीवर या किडनी के रोगियों में मरने का खतरा बढ़ जाता है.

'आवश्यक रूप से मास्क पहनें और कोई ढिलाई न बरतें '
वहीं नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल ने लोगों से आग्रह किया कि वे सर्दी के दिनों में आगामी त्योहारों के दौरान मास्क पहनने और फिजिकल डिस्टेंस बनाकर रखने जैसे कोविड-19 संबंधी दिशा-निर्देशों का उचित पालन करें. उन्होंने कहा कि युवा लोग सावधानी बरतें क्योंकि वे अपने परिवार में बड़ों को भी संक्रमित कर सकते हैं.

पॉल ने कहा कि नोवेल कोरोना वायरस सांस के जरिए आगे बढ़ने वाला विषाणु है और ऐसे विषाणु सर्दी के दिनों में अधिक हमला करते हैं. उन्होंने कहा कि सर्दी के आगामी महीनों में और त्योहारों के दौरान लोगों को निमोनिया तथा इन्फ्लुएंजा जैसे श्वसन संक्रमण का अधिक जोखिम होगा.

पॉल ने लोगों से अपील की कि वे आवश्यक रूप से मास्क पहनें और इसे लेकर कोई ढिलाई न बरतें क्योंकि वैज्ञानिक विश्लेषणों से पता चला है कि इस तरीके से महामारी को 36-50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. (भाषा इनपुट के साथ)
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