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कोविशील्ड और कोवैक्सीन: यूरोप के उन देशों की लिस्ट जहां मिली है इन्हें मान्यता, जानें क्या था पूरा विवाद

भारत में कोवैक्सीन का निर्माण भारत-बायोटेक, जबकि कोविशील्ड का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट कर रही है.

Covaxin and Covishield Vaccine: कोवैक्सीन को NIV और ICMR के साथ साझेदारी में हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक द्वारा विकसित किया गया है, जबकि कोविशील्ड का विकास ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका ने किया है और इसका निर्माण SII कर रही है.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस रोधी वैक्सीन कोविशील्ड को यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) की मंजूरी का इंतजार है, तो कोवैक्सिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचए) से अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रहा है. लेकिन इस बीच यूरोप के कुछ देश अपने यहां इन दोनों वैक्सीन को मान्यता प्रदान कर रहे हैं. ऐसे में जब ये देश भारत पर यात्रा पाबंदी के अपने आदेश को वापस लेंगे, तो वे भारतीय जिन्होंने इन दोनों वैक्सीन में कोई एक भी लिया होगा, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी.


    गौरतलब है कि कोवैक्सीन को राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ साझेदारी में हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक द्वारा विकसित किया गया है. इसके आपातकालीन प्रयोग की मंजूरी तीन जनवरी को मिली थी. दूसरी ओर, कोविशील्ड का विकास ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटेन-स्वीडन की कंपनी एस्ट्राजेनेका ने किया है और इसका निर्माण पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) कर रही है.


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    इन देशों में कोविशील्ड को मंजूरी:
    ऑस्ट्रिया, एस्टोनिया, जर्मनी, यूनान, आयरलैंड, नीदरलैंड, स्लोवेनिया, स्पेन.


    इन देशों के अलावा यूरोपीय संघ में शामिल स्विट्जरलैंड और आइसलैंड ने भी कोविशील्ड को यात्रा के लिहाज से मान्यता दी है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि फ़िनलैंड और लातविया ने भी कोविशील्ड को मंजूरी दे दी है, जबकि एस्टोनिया से कोविशील्ड और कोवैक्सिन दोनों को मंजूरी मिली है.


    क्या था विवाद?
    दरअसल, यूरोपीय संघ ने 1 जुलाई से यूरोपीय संघ के देशों के बीच ग्रीन पास को पेश किया है, यह एक यात्रा पास की तरह काम करता है. इसमें उल्लेख किया गया है कि चार टीकों फाइजर/बायोएनटेक, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सजेरविरिया और जॉनसन एंड जॉनसन के जेनसेन में से किसी एक के साथ टीकाकरण करने वाले लोगों को यूरोपीय संघ के देशों में यात्रा करने की इजाजत होगी. चूंकि वैक्सीन के इन नामों में कोविशील्ड का जिक्र नहीं किया गया था, जबकि इसके समकक्ष वैक्सजेरविरिया का नाम था, इससे यह डर पैदा हो गया कि जिन भारतीयों ने कोविशील्ड और कोवैक्सिन का टीका लगाया है वे यूरोपीय देशों की यात्रा नहीं कर पाएंगे.


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    अहम बातें.
    1. वर्तमान में यात्रा प्रतिबंधों की वजह से भारतीय कई यूरोपीय देशों की यात्रा नहीं कर सकते हैं.
    2. यूरोपीय संघ ने स्पष्ट किया कि ग्रीन पास बाहरी यात्रियों के लिए नहीं है.
    3. अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए अभी तक वैक्सीन अनिवार्य नहीं है. अब भी बाहरी यात्रियों को अनुमति देने के लिए निगेटिव आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट के साथ ही स्थानीय नियमों के अनुसार क्वारंटाइन जैसे कुछ निर्देशों का पालन करना होता है.
    4. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कहा है कि उसने ईएमए की मंजूरी के लिए आवेदन किया है जिसमें लगभग एक महीने का समय लग सकता है.
    5. भारत ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से व्यक्तिगत रूप से कोविशील्ड और कोवैक्सिन को मान्यता देने का आग्रह किया है. इसके साथ ही भारत ने यह भी कहा है कि टीकाकरण किए गए भारतीयों के साथ उसी तरह का व्यवहार हो जैसा कि यूरोपीय संघ के देशों में टीकाकरण करने वालों के साथ होता है. अपनी अपील के साथ भारत ने कूटनीतिक लहजे में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा था कि यदि यूरोपीय संघ के देशों में कोविशील्ड और कोवैक्सिन को मान्यता नहीं दी जाती है, तो यूरोपीय संघ के वैक्सीन वाले लोगों को भी भारत में क्वारंटाइन नियमों से छूट नहीं मिलेगी.

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