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सियासतदानों! बीमार, भूखी और बदहाल हैं गोशालाओं में गाय

गोशाला में गाय 'सिस्टम' की शिकार

गोशाला में गाय 'सिस्टम' की शिकार

दिल्ली, गुजरात और राजस्थान के अलग-अलग शहरों की तस्वीरें देखकर यकीन करना मुश्किल होगा कि जिस गाय को लेकर लोग मरने-मारने पर उतारू हैं, वो गोशालाओं में कितनी बुरी हालत में है.

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    दिल्ली की एक गोशाला में 48 गायों की मौत के बाद हर तरफ हड़कंप मच गया. जांच में पता चला कि वहां गायों की देखभाल के लिए एक गाय पर 40 रुपए खर्च किए जाते थे. इसके बाद न्यूज18 इंडिया ने देश के अलग-अलग राज्यों में गोशालाओं की जांच की तो बेहद खौफनाक हकीकत सामने आई. दिल्ली के अलावा राजस्थान, गुजरात और बिहार तक में गायें बदहाली की जिंदगी जी रही हैं और भूख से दम तोड़ रही हैं

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    न जीते जी खाना मिला, न बीमार होने पर इलाज क्योंकि गाय के नाम पर आंसू बहाने वालों ने एक गाय की कीमत 40 रुपए तय कर दी है. आज के दौर में एक गाय की देखभाल, पालन-पोषण के लिए सरकार एक गाय पर सिर्फ 40 रुपए खर्च कर रही है. ये हाल देश की राजधानी दिल्ली का है.

    अगर दिल्ली में एक दिन में गाय पर 40 रुपए खर्च हो रहे हैं तो राजस्थान में गाय के लिए 16 रुपए खर्च किए जा रहे है. जिस गौमाता के नाम पर दिन-रात सियासी बयानबाजी चल रही है, उसकी जिंदगी की कीमत राज्य सरकारों ने 40 रुपए और 16 रुपए तय कर दी है.

    दिल्ली, गुजरात और राजस्थान के अलग-अलग शहरों की तस्वीरें देखकर यकीन करना मुश्किल होगा कि जिस गाय को लेकर लोग मरने-मारने पर उतारू हैं, वो गोशालाओं में कितनी बुरी हालत में है.

    सूरत की गोशाला में कीचड़ में धंसकर गायों की मौत तो कोटा में भूख से 30 से ज़्यादा गायों की मौत और सीकर में कीचड़ की वजह से गाय बीमारियों की शिकार, ये वो ख़बरें हैं जो सवाल खड़े करती हैं.

    बारिश का मौसम शुरू होते ही गोशालाओं की बदहाली की तस्वीरें सामने आने लगी थीं लेकिन तब भी प्रशासन ने गायों की सुध नहीं ली. लेकिन जैसे ही गायों की मौत की खबर सुर्खियों में आई, हर विभाग अपनी ड्यूटी करने के लिए मुस्तैद दिखने लगा. दिल्ली में 48 गायों की मौत के बाद प्रशासन की नींद खुली और बीमार गायों को अस्पताल पहुंचाने का इंतजाम किया गया.

    इससे पहले दिल्ली के घुम्मनहेड़ा गांव के 'आचार्य सुशीला सदन गौ सदन' में गायों की मौत की खबर सामने आई, तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. लेकिन अधिकारियों के मुस्तैदी दिखाने से पहले मीडिया के कैमरे इस गोशाला तक पहुंच गए और फिर जो तस्वीरें कैमरों में कैद हुईं, वो रूह कंपा देने वाली थीं. इस गोशाला में जहां-तहां गायों के शव पड़े थे. कीचड़ के बीच गायों को ठूंस-ठूंसकर रखा गया था. हर तरफ गंदगी का अंबार लगा था. गायों की देखभाल करने वाला यहां कोई नहीं था. लिहाजा भूख से तड़पती गायें पहले बीमार हुईं और फिर जब पैरों में खड़े होने की ताकत नहीं बची, तो गिर गईं. उसके बाद भी उन्हें देखने वाला यहां कोई नहीं आया.

    गाय की देखभाल के लिए दिल्ली सरकार 20 रुपए और MCD 20 रुपए देती है, यानी एक गाय को खाने-पीने और दवा के लिए हर रोज 40 रुपए मिलते हैं. जबकि एक गाय के भरण-पोषण के लिए कम से कम 100 रुपए हर रोज चाहिए

    सीकर के श्रीकृष्ण गोशाला में कदम रखते ही कलेजा मुंह को आ जाता है. यहां खाली मैदान में जहां-तहां गायों के शव बिखरे पड़े मिले. पिछले कई दिनों से इस गोशाला के गायों के मरने का सिलसिला जारी है. किसी ने भूख से दम तोड़ दिया, तो किसी के पैरों में कीचड़ में रहने की वजह से कीड़े लग गए.

    गायों के शव सड़ने लगे हैं लेकिन इन्हें उठाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा. गोशाला के कर्मचारियों की दलील है कि यहां कमजोर और बीमार गायें ही लाई जाती हैं, लिहाजा वो दम तोड़ देती हैं. लेकिन बीमार गायों की देखभाल के लिए डॉक्टर क्यों नहीं है, इसका जवाब किसी के पास नहीं.

    कोटा की गोशाला में गायों के बाड़े में इतनी भी जगह नहीं रखी जा रही कि गायें हिल-डुल सकें. इस हालत में कोई गाय जमीन पर बैठना भी चाहे, तो बैठ नहीं सकती. इस कीचड़ से भरे बाड़े में कोई गाय बैठ जाए तो उसका बीमार होना तय है.

    कोटा के धर्मपुरा सरकारी गोशाला में हर रोज आठ से दस गायें दम तोड़ रही हैं. पिछले एक हफ्ते में करीब 30 गायों की मौत हो चुकी है, ज्यादातर गायों की मौत भूख और बीमारी से हुई है.

    गोशाला के कर्मचारियों का कहना है कि गायों के चारे और दवाइयों के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाला पैसा छह महीने से नहीं मिला है, जबकि सरकार का दावा है कि वो गायों पर हर साल 200 करोड़ रुपए खर्च कर रही है.

    राजस्थान सरकार ने गोशालाओं को पैसे देने के लिए नए कर लगाए थे. शराब और 'स्टैंप ड्यूटी' पर 20% सरचार्ज लगाया गया है. इन पैसों को गायों की बेहतरी पर खर्च करने का दावा किया गया था.

    अब सवाल उठता है कि जब राज्य में गोशालाओं और गायों की हालत ऐसी है तो जनता की जेब पर बोझ किसलिए डाला गया था. जनता की गाढ़ी कमाई सरचार्ज के रूप में वसूलने के बाद उसका क्या किया गया?

    राजस्थान सरकार करीब 800 गोशालाओं को अनुदान देती है. बड़े जानवरों पर खर्च के लिए 32 रुपए
    और छोटे जानवरों के लिए 16 रुपए की रकम तय की गई है. दावा है कि अगले साल राजस्थान सरकार 400 करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है. लेकिन इन सरकारी दावों की हकीकत कुछ और ही है.

    गोशालाओं की बदहाली का आलम गुजरात में भी दिखा. सूरत की गोशाला में बारिश के बाद इतना कीचड़ भर गया कि गायें आधी डूब गईं. इसी हालत में गायें घंटों खड़ी रहीं और फिर कीचड़ में ही गिरकर दम तोड़ दिया. इस गोशाला की हकीकत तब सामने आई, जब किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया. देखते ही देखते इस गोशाला की तस्वीरें वायरल होने लगीं. प्रशासन की नाकामी सामने आने के बाद ताबड़-तोड़ सफाई शुरू की गई. इसके बावजूद हाल-फिलहाल इसकी सूरत बदलने वाली नहीं दिखती.

    गायों के नाम पर हो रहे सियासी शोर के बीच कैमरे में कैद हकीक़त इसकी पोल खोलने के लिए काफी है.

     

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