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माओवादियों ने इस शख्स को बनाया पार्टी का नंबर 2, इस साल हिंसा बढ़ने का खतरा

News18Hindi
Updated: February 4, 2020, 11:58 PM IST
माओवादियों ने इस शख्स को बनाया पार्टी का नंबर 2, इस साल हिंसा बढ़ने का खतरा
रंजीत बोस को सुरक्षा बलों के खिलाफ भीड़ जुटाने की अपनी खासियत की वजह से जाने जाते हैं (फाइल फोटो)

रंजीत बोस उर्फ कबीर (Ranjit Bose alias Kabir) के सिर पर तीन राज्यों ने कुल मिलाकर 1 करोड़ का इनाम रखा हुआ है. रंजीत को वैचारिक लड़ाई (ideological warfare) में हथियारबंद हमले (armed attacks) के लिए जाना जाता है.

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  • Last Updated: February 4, 2020, 11:58 PM IST
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नई दिल्ली. उसके सिर पर तीन राज्यों ने कुल मिलाकर 1 करोड़ का इनाम रखा हुआ है. और फिलहाल वे 63 साल के हैं. अब उन्हें प्रमोशन (Promotion) दिया गया है. सीपीआई- माओवादी (CPI- Maoist) ने उन्हें अपना दूसरा नंबर का नेता बना दिया है.

इस कदम को आतंकवादी समूह (Terrorist Organisation) द्वारा पूर्वी भारत, खासकर बिहार और झारखंड (Bihar and Jharkhand) में हिंसक गतिविधियों को बढ़ाने वाले एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

नंदीग्राम में टाटा नैनो को खिलाफ लोगों को जुटाया था
बोस को सुरक्षा बलों के खिलाफ भीड़ जुटाने की अपनी खासियत के चलते जाने जाते हैं. माना जाता है कि बोस ने 2007 में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में टाटा नैनो परियोजना के खिलाफ आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. जिसमें स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच हुई झड़प में 14 लोगों की मौत हो गई थी.

उन्होंने 2009 में भी लालगढ़ के 44 गांवों में लोगों को जुटाकर राज्य के खिलाफ ऐसा ही अभियान चलाया था और इसे 'स्वतंत्र क्षेत्र' (सरकार से) घोषित कर दिया था. जिसके बाद सैकड़ों लोगों के माओवादियों द्वारा और सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच झड़पों में मारे जाने की खबरें आई थीं.

शीर्ष नेता बसवराज की मौजूदगी में लिया गया फैसला
उसके सिर पर बंगाल, झारखंड और तेलंगाना की सरकारों ने मिलकर इनाम रखा है. बोस, जिसे कबीर के नाम से भी जाना जाता है, वह हावड़ा, बंगाल का रहने वाला है. वह जिस शख्स की जगह लेगा, वह 74 साल का प्रशांत बोस उर्फ किशन दा है, जो पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले से आता है.सूत्रों के मुताबिक, बदलाव का यह फैसला पश्चिम सिंहभूम के सारंडा के जंगलों में हुई सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेताओं की बैठक में लिया गया, जहां उनका सबसे वरिष्ठ नेता, नामबाला केशल राव उर्फ बसवराज भी मौजूद था.

सीपीआई- माओवादी की ओर से इस साल बढ़ सकती है हिंसा की घटनाएं
सूत्रों का कहना है कि पिछले साल पार्टी में तरक्की पाए बसवराज और रणजीत बोस दोनों ही वैचारिक या प्रोपेगेंडा की लड़ाई में हिंसा को लाने के पक्षधर हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि इस साल सीपीआई (माओवादी) की ओर से हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो सकती है.

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First published: February 4, 2020, 11:58 PM IST
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