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सीताराम येचुरी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के रूप में पेश की कश्मीर दौरे की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से येचुरी ने गत 29 अगस्त को माकपा की जम्मू कश्मीर इकाई के नेता और बीमार चल रहे पूर्व विधायक यूसुफ तारीगामी से मुलाकात करने के लिये वहां का दौरा किया था.

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से येचुरी ने गत 29 अगस्त को माकपा की जम्मू कश्मीर इकाई के नेता और बीमार चल रहे पूर्व विधायक यूसुफ तारीगामी से मुलाकात करने के लिये वहां का दौरा किया था.

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से येचुरी ने गत 29 अगस्त को माकपा की जम्मू कश्मीर इकाई के नेता और बीमार चल रहे पूर्व विधायक यूसुफ तारीगामी से मुलाकात करने के लिये वहां का दौरा किया था.

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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India) के महासचिव सीताराम येचुरी (Sitaram Yechury) ने जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाये जाने के बाद अपने कश्मीर दौरे से जुड़ी एक रिपोर्ट सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के समक्ष हलफनामे के रूप में पेश की. समझा जाता है कि इसमें उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति का भी जिक्र किया है.

सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से येचुरी ने गत 29 अगस्त को माकपा की जम्मू कश्मीर इकाई के नेता और बीमार चल रहे पूर्व विधायक यूसुफ तारीगामी से मुलाकात करने के लिये वहां का दौरा किया था. पार्टी सूत्रों के अनुसार येचुरी ने अपनी यात्रा से जुड़ी सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय में हलफनामे के साथ पेश कर दी.

रिपोर्ट के बारे में कुछ भी बताने से इंकार
माकपा सूत्रों ने हालांकि रिपोर्ट का ब्यौरा देने से इंकार कर दिया. उल्लेखनीय है कि येचुरी ने न्यायालय के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर श्रीनगर एम्स में इलाज करा रहे तारीगामी से मिलने की अनुमति मांगी थी.
जम्मू-कश्मीर के हालातों का भी दिया ब्यौरा


पार्टी सूत्रों के अनुससार येचुरी ने रिपोर्ट में न सिर्फ तारीगामी की सेहत का विवरण दिया है बल्कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद उत्पन्न स्थिति का ब्यौरा भी पेश किया है. येचुरी ने पांच अगस्त के बाद पार्टी की राज्य इकाई के नेताओं से मिलने की दो बार कोशिश की थी लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उन्हें कानून व्यवस्था का हवाला देकर श्रीनगर हवाईअड्डे से ही वापस भेज दिया.

बाद में उच्चतम न्यायालय ने येचुरी को इस शर्त पर तारीगामी से मिलने की अनुमति दी थी कि वह इस दौरान राज्य में किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे. शीर्ष अदालत ने येचुरी को हलफनामा पेश कर यात्रा विवरण देने का भी निर्देश दिया था.

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