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इतने ख़तरनाक हैं छोटे से दिखने वाले पटाखे

इतने ख़तरनाक हैं छोटे से दिखने वाले पटाखे

फुलझड़ी, अनार, चखरी और सांप की गोलियां सबसे ज्यादा प्रदूषण करते हैं.

फुलझड़ी, अनार, चखरी और सांप की गोलियां सबसे ज्यादा प्रदूषण करते हैं.

फुलझड़ी, अनार, चखरी और सांप की गोलियां सबसे ज्यादा प्रदूषण करते हैं.

    प्रकाश का त्योहार दिवाली हम इंसानों की गलती के चलते धुएं और प्रदूषण का प्रतीक बनता जा रहा है. हालात इतनी गंभीर हो चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट को दिवाली से पहले आतिशबाजी बेचने पर बैन का निर्देश देना पड़ा. बीते साल 2016 में मानकों का उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा था कि PM 2.5 खतरनाक स्तर तक पहुंच गया.

    सुप्रीम कोर्ट के बैन के बाद आतिशबाजी चलाने को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. लेकिन वो कितनी खतरनाक है इसका अंदाज़ा चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन, पुणे की 2016 की रिपोर्ट से पता चलता है. जो साधारण सी दिखने वाली आतिशबाजी जैसे फुलझड़ी, अनार, चखरी और सांप की गोलियां बच्चे सबसे ज़्यादा जलाते हैं, वो ही सबसे ज्यादा स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए ख़तरनाक है.



    1. स्नेक टैबलेट
    बचपन में आपने भी छोटी-छोटी गोलियां जलाकर बहुत सारे सांप बनाए होंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये छोटी सी गोली सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाती है. रिपोर्ट के मुताबिक एक गोली से 64500 µg/m³ PM 2.5 प्रदूषण फैलता है. जो WHO के मुताबिक आदर्श स्तर 25 µg/m³ (माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर) से 2560 गुना ज़्यादा है. जो गोली बच्चे सबसे ज्यादा चाव से दिवाली के दौरान जलाती है वो ही उनके लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है.



    2. पटाखे की लड़ी
    तेज़ आवाज़ वाली पटाखे की लड़ी का शौकीन कौन नहीं होता. 500, 1000, 5000 और 10 हजार तक की लड़ियां बाज़ार में मौजूद है. लोग जमकर दिवाली के दौरान इनको फोड़ते हैं.

    लेकिन प्रदूषण के स्तर पर जांचे तो एक 1000 वाली पटाखे की लड़ी से 38540 µg/m³ PM 2.5 वायु प्रदूषण पैदा होता है. जो WHO के आदर्श स्तर की तुलना में 1541 गुना ज़्यादा है.



    3. पलपल/हंटर
    कहीं हंटर तो कहीं पलपल नाम से मशहूर पतली सी रस्सी जैसी आतिशबाजी देखने में बेशक छोटी लगती हो लेकिन प्रदूषण बहुत करती है. चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक एक हंटर जलाने से 28950 µg/m³ PM 2.5 प्रदूषण पैदा होता है.

    इसकी तादाद WHO के तय आदर्श स्तर से 1158 गुना ज़्यादा है. आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये कितना खतरनाक है.



    4. फुलझड़ियां
    छोटे-छोटे बच्चों को दिवाली पर रंग-बिरंगी फुलझड़ियां सबसे ज्यादा लुभाती हैं. आतिशबाजियों में उनकी सबसे पहली पसंद वही होती है. लेकिन एक फुलझड़ी के जलाने से 10390 µg/m³ PM 2.5 प्रदूषण उत्पादित होता है. जो आदर्श स्तर (25 µg/m³) से 415 गुना ज्यादा प्रदूषण पैदा करती हैं.



    5. चखरी
    जिस चखरी पर कूदते हुए बचपन बीता हो, वो स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है, इसको जानकर आप हैरान रह जाएंगे. एक चखरी को जलाने से 9490 µg/m³ PM 2.5 प्रदूषण होता है. जो आदर्श स्तर की तुलना में 379.6 गुना ज्यादा बदतर है. ये समझने का वक्त है कि जो गलतियां बचपन में हमसे हुईं, वो हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के साथ नहीं करनी है.



    6. अनार
    फल के अलावा आतिशबाजी में भी अनार काफी लोकप्रिय है. बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई जमकर इसका इस्तेमाल करता है. लेकिन प्रदूषण के मामले में 1 अनार 4860 µg/m³ PM 2.5 वायु प्रदूषण पैदा करता है.

    जो किसी भी स्वस्थ्य व्यक्ति को बीमार करने के लिए काफी है. WHO के मुताबिक आदर्श स्तर से 194.4 गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाता है एक अनार. वैज्ञानिक परिणामों के आधार पर समझा जा सकता है कि जिन आतिशबाजियों को हम बेहद हल्के में ले रहे थे, वो कितनी खतरनाक हैं. व्यस्कों के साथ बच्चों और बुजुर्गों की जान के लिए भी घातक है.

    Tags: Diwali, Supreme Court

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