क्राइम ब्रांच में अब नहीं दिखेंगे आतंकियों से बचाने वाले स्निफर ब्रूट और राजा

क्राइम ब्रांच में अब नहीं दिखेंगे आतंकियों से बचाने वाले स्निफर ब्रूट और राजा
Sniffer Dogs (File Photo)

क्राइम ब्रांच में भर्ती होने से पहले इन कुत्तों को एक कठिन ट्रेनिंग से गुजरना होता है. जो कुत्ता इस ट्रेनिंग को पास कर पाता है उसे ही डॉग स्क्वॉयड में शामिल किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 14, 2019, 10:20 AM IST
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हम अक्सर फिल्मों में देखते हैं कि जब भी किसी विस्फोटक या संदिग्ध चीज की खोज की जा रही हो, तो क्राइम ब्रांच के अफसर अपने कुत्तों को लगा देते हैं. इन्हें स्निफर कहा जाता है. ये स्निफर इतने शातिर होते हैं कि बहुत कम समय में संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु को पहचान लेते हैं. कहा जाता है कि ये कुत्ते किसी भी मेटल डिटेक्टर से ज्यादा सूक्ष्मता से चीजें खोजने में सक्षम होते हैं.

क्राइम ब्रांच में 8 साल तक सेवा देने के बाद दो स्निफर कुत्ते राजा और ब्रूट रिटायर हो गए हैं. इन दोनों ने कई पेंचीदा केस सुलझाने में क्राइम ब्रांच की मदद की थी. दोनों क्राइम ब्रांच के डॉग स्क्वॉयड में 11 जनवरी 2011 को भर्ती हुए थे. लेब्राडोर प्रजाति के ब्रूट को विस्फोटक सामाग्री सूंघकर पता लगाने में महारत हासिल है वहीं राजा ट्रेकिंग करने में माहिर है.

क्राइम ब्रांच में भर्ती होने से पहले इन कुत्तों को एक कठिन ट्रेनिंग से गुजरना होता है. जो कुत्ता इस ट्रेनिंग को पास कर पाता है उसे ही डॉग स्क्वॉयड में शामिल किया जाता है. आइए समझते हैं किस तरह से इन कुत्तों को ट्रेनिंग दी जाती है.



चलने की ट्रेनिंग-
ट्रेनिंग के दौरान हर कुत्ते को एक ट्रेनर के साथ प्रैक्टिस कराई जाती है. कुत्ते एक इंसान के साथ में जल्दी और आसानी से घुलमिल जाते हैं. इसके बाद सबसे पहले ट्रेनर कुत्तों को अपने साथ चलवाते हैं. कुछ दिनों बाद वे बिना पट्टों के ही अपने ट्रेनर के साथ चलने लगते हैं. ट्रेनर की जिम्मेदारी होती है कि वे ना केवल कुत्ते का ख्याल रखें बल्कि उसके दोस्त बन जाएं. धीरे-धीरे कुत्ते चलने और मुड़ने में ट्रेन्ड हो जाते हैं.

इशारों की ट्रेनिंग-
चलने के बाद कुत्तों को कुछ पोजीशन में बैठने की ट्रेनिंग टी जाती है. जिसमें सल्यूट पोजीशन भी शामिल होती है. यह ट्रेनिंग समूह में कराई जाती है, ताकि कुत्ते एक दूसरे को देखकर सीख सकें. इशारे को समझाने में काफी वक्त लगता है और कुछ कुत्ते इस चरण को पार नहीं कर पाते हैं.

दौड़ने की ट्रेनिंग-
इशारे समझने के बाद कुत्तों को दौड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि के इशारा पाते ही टारगेट के पीछे दौड़ जाएं. दौड़ के समय अचानक रुकने और इशारा पाते ही दूसरी दिशा में दौड़ने की ट्रेनिंग भी इन्हे दी जाती है. दौड़ने के बाद इन्हें पगबाधा दौड़ और कूदने की ट्रेनिंग भी दी जाती है.

सूंघने की ट्रेनिंग-
यह कुत्तों का आमतौर पर अंतिम चरण होता है. इसमें एक दूसरे शख्स की ज़रूरत होती है जो असल में टारगेट का रोल प्ले करता है. ज़्यादातर मामलों में टारगेट व्यक्ति हाथ में एक मोटा कपड़ा बांधकर एक तरह की विशेष सुगंध लपेट लेता है. ट्रेनर कुत्ते को इस सुगंध को फॉलो करने के लिए कहता है. पहले बार-बार कुत्ते को आदेश दिया जाता है कि संदिग्ध सुगंध वाले हाथ को वह काटे फिर उसे तरह-तरह की सुगंध को फॉलो करने की ट्रेनिंग दी जाती है. क्योंकि कुत्तों की सूंघने की क्षमता बहुत ज़्यादा होती है और वे इसी आधार पर टारगेट का पता लगाते हैं. इसलिए इन्हें स्निफर भी कहा जाता है.

कई तरह की होती है ट्रेनिंग-
कई बार कुत्तों को ट्रेनिंग किसी खास मिशन की तैयारी के लिए भी दी जाती है, ताकि वे मिशन को आसानी से पूरा कर सकें. अलग मिशन के लिए अलग कुत्तों की प्रजातियों का चयन भी किया जाता है.

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