भारत-बांग्लादेश सीमा को जल्द ही बनाया जाएगा क्राइम फ्री जोन, ये है मकसद

देश का पहला क्राइम फ्री जोन कोलकता के पास नार्थ 24 परगना में बन चुका है.

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 5:18 PM IST
भारत-बांग्लादेश सीमा को जल्द ही बनाया जाएगा क्राइम फ्री जोन, ये है मकसद
क्राइम फ्री जोन के लिए भारत-बांग्‍लादेश की खास पहल.
अमित पांडेय
अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 5:18 PM IST
भारत और बांग्लादेश सीमा के आसपास आपको एक अलग एहसास होता है. भारत-पाकिस्तान सीमा पर जैसे हर वक्त तनाव का माहौल रहता है और सुरक्षा बल हथियार लिए तैनात रहते हैं, यहां स्थिति एकदम उलट है. लोगों से बात करते हुए और उनकी दिक्कतों को हल करते हुए जगह-जगह पर सुरक्षा बल नजर आ जाएंगे. यह भारत-बांग्लादेश के बीच दोस्ताना संबंध का नतीजा है, जो दोनों देशों की फोर्स मिलकर सीमा की रक्षा करती हैं और अपराध पर भी काबू पाने की कोशिश की जाती है. इसी सोच के साथ भारत और बांग्लादेश ने फैसला लिया है क्राइम फ्री जोन बनाने का. यानि चुने गए इलाके को पूरी तरीके से अपराध से मुक्त कर दिया जाए.

वैसे पशुओं का अवैध व्यापार और नशे का कारोबार भारत-बांग्‍लादेश सीमा पर मुख्य समस्या है. जबकि सबसे ज्यादा असर क्राइम फ्री जोन का इसी अपराध को काबू पाने में किया गया है.



अब तक कितने क्राइम फ्री जोन बने हैं

देश का पहला क्राइम फ्री जोन कोलकता के पास नार्थ 24 परगना में बन चुका है. बांग्लादेश सीमा से सटे इस इलाके में सबसे ज्यादा गो-तस्करी और नशे का कारोबार होता था. करीब एक साल तक दोनों देशों की फोर्स यानि बार्डर सिक्युरिटी फोर्स और बार्डर गार्ड बांग्‍लादेश ने अपने-अपने देश के स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ काम किया. इसका नतीजा भी जल्द देखने को मिला और महज 1 साल के भीतर यह इलाका क्राइम फ्री जोन बन गया.

पशुओं का अवैध व्यापार और नशे का कारोबार भारत-बांग्‍लादेश सीमा पर मुख्य समस्या है.


अगला क्राइम फ्री जोन त्रिपुरा में बन रहा है, जहां भी गो तस्करी प्रमुख समस्या है. इसके अलावा भारत सरकार की योजना है अलग-अलग हिस्सों को क्राइम फ्री जोन बनाना, ताकि 2017 से शुरू हुए हुआ ये प्लान भारत की सीमा पर अपना असर दिखा सके.

इन सारी जगहों पर अपराध में पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है. समय-समय पर कई जिला क्राइम फ्री हो चुके हैं और उनकी समीक्षा भी की जाती है. बीएसएफ के आला अधिकारियों के मुताबिक देश में बनी इस तरीके के पहले प्रयोग के बाद देश के अन्य सीमावर्ती इलाकों में ऐसे या फिर इससे मिलती-जुलती योजना के तहत काम किया जा सकता है, ताकि अपराध पर अंकुश लगाया जा सके.
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